Friday, 2 January 2015

किडनी में बार-बार बनती है पथरी



आजकल पथरी रोग लोगों में एक आम समस्या बनता जा रहा है। इस समस्या के पीछे काफी हद तक जीनवशैली से जुड़ी अनियमितताएं जि़म्मेदार होती हैं जैसे ग़लत खान-पान व जरुरत से कम पानी पीने से भी गुर्दे की पथरी का निर्माण होता है। गुर्दे की पथरी सबसे अधिक होती है, जिसके प्रारंभिक चेतावनी संकेत भी हमें मिलते हैं। इस समस्या से बचने के लिए सबसे ज़रूरी होता है इन संकेतों को पहचानना और समय से इसका उपचार कराना। तो चलिये जानते हैं क्या कारण हैं कि बार-बार किडनी में पथरी बन जाती है-
दरअसल गुर्दे की पथरी एक मूत्रतंत्र रोग है जिसमें गुर्दे के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोरता बन जाती हैं, जिन्हें पथरी कहा जाता है। आमतौर पर यह ये पथरियां मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं। कई लोगों में पथरियां बार-बार बनती हैं और बिना अधिक तकलीफ के निकल भी जाती हैं, लेकिन यदि पथरी बड़ी हो जाए तो मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर देती है। इस स्थिति में मूत्रांगो के आसपास असहनीय दर्द होता है। मधुमेह रोगियों में गुर्दे की पथरी होने की ज्यादा सम्भावना रहती है।

क्या होती है पथरी

विशेषज्ञों के अनुसार, पथरी का कारण अधिकतर किडनी में कुछ खास तरह के साल्ट्स का जमा हो जाना होता है। इसमें सबसे पहले स्टोन का छोटा खंड (निडस) बनता है, जिसके चारों ओर सॉल्ट जमा होता रहता है। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में पथरी होने की आशंका ज़्यादा होती है। इसके कई जेनेटिक कारण, हाइपरटेंशन, मोटापा, मधुमेह और आंतों से जुड़ी कोई अन्य समस्या भी हो सकती हैं।

गुर्दे की पथरी के लक्षण

गुर्दे की पथरी से पीठ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है, जो कुछ मिनटो या घंटो तक बना रह सकता है। इसमें दर्द के साथ जी मिचलाने तथा उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। यदि मूत्र संबंधी प्रणाली के किसी भाग में संक्रमण है तो इसके लक्षणों में बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, पेशाब आने के साथ-साथ दर्द होना आदि भी शामिल हो सकते हैं मूत्र में रक्त भी आ सकता है। चलिये विस्तार से जानें इसके संकेत-

दर्द के साथ पेशाब आना

गुर्दे की पथरी से पीडि़त लोग अक्सर लगातार या दर्द के साथ पेशाब आने की शिकायत करते हैं। ऐसा तब होताहै जब गुर्दे की पथरी मूत्रमार्ग में मूत्राशय से चली जाती है। ये स्थानांतरण बेहद दर्दनाक होता है और यह अक्सर मूत्र पथ के संक्रमण का कारण भी बनता है।

पीठ दर्द

गंभीर दर्द होना गुर्दे की पथरी से पीडि़त लोगों के लिए एक आम समस्या है, विशेषकर कमर और कमर के निचले हिस्से में (ठीक पसलियों के नीचे जहां  गुर्दे स्थित होते हैं)। दर्द पेट के निचले हिस्से से पेट और जांघ के बीच के भाग में जा सकता है। यह दर्द तीव्र होता है और तंरगों की तरह उठता है।

पेशाब में खून

गुर्दे की पथरी से पीडि़त लोगों का मूत्र अक्सर गुलाबी, लाल या भूरे रंग का आने लगता है। जो कि स्टोन के बढऩे और मूत्रमार्ग ब्लॉक हो जाता है, किडनी में पथरी वाले लोगों के मूत्र में रक्त आ सकता हैं।

मतली और उल्टी

पेट में गड़बड़ महसूस करना और मिचली आना किडनी स्टोन का संकेत हो सकता है और इसमें उल्टियां भी हो सकती हैं। उल्टियां दो कारणों से आती हैं, पहला कारण स्टोन के स्थानांतरण के कारण होना वाला तीव्र दर्द तथा दूसरा इ सलिए क्योंकि गुर्दे शरीर के भीतर की गंदगी (टॉक्सिक) को बाहर करने में मदद करते हैं और जब स्टोन के कारण अवरुद्ध हो जाते हैं तो इन टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने के लिए उल्टी ही एकमात्र रास्ता बचता है। ज़रूरत से कम पानी पीने व फैट और कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार अधिक खाने से भी किडनी स्टोन की समस्या होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुर्दे में पथरी की समस्या से ग्रसित मरीजों में 30 फीसदी 25 से 35 वर्ष की आयु वाले होते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि युवाओं में खाने के साथ पानी की बजाय सॉफ्ट ड्रिंक लेने का चलन बढ़ा है। जिसका उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है और लोग कम उम्र में ही किडनी स्टोन की समस्या से ग्रसित हो जाते हैं।

पथरी की जांच और उपचार

मरीज के लक्षण के आधार पर जांच का तरीका तय किया जाता है। रेडियोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन्स जैसे एक्सरे, अल्ट्रा-सोनोग्राफी या कम्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) के जरिए पथरी की पुष्टि की जाती है। इनमें से सीटी स्कैन सबसे मानक माना जाता है। पथरी का उपचार इसके आकार और जगह पर निर्भर करता है। चार एमएम से कम की पथरी अपने आप या कुछ दवाओं के जरिए यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाती है। इसके अलावा मूत्र मार्ग में निचली तरफ आ चुके स्टोन के लिए यूरेट्रोस्कॉपी की जाती है। गुर्दे और ऊपर की ओर के स्टोन के लिए लीथोट्राइप्सी को अपनाया जाता है। किडनी का आकार बढऩे पर नेफ्रोलिथोटॉमी को अपनाया जाता है।

विटामिन सी से गुर्दे की पथरी का खतरा

लंदन. एक नए शोध के मुताबिक रोजाना विटामिन सी लेने वालों को गुर्दे में पथरी होने का खतरा दोगुना हो जाता है। इस बात का पता स्वीडन के स्टॉकहोम में स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीच्यूट के लूरा थॉमस ने लगाया है। उन्होंने कहा है कि लंबे समय से यह संदेह था कि विटामिन सी की अत्यधिक खुराक गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ाता है। जेएएमए इंटर्नल मेडिसिन जर्नल में छपी रपट के मुताबिक इसका कारण यह है कि शरीर द्वारा अवशोषित कुछ विटामिन सी ऑक्सलेट के रूप में मुत्र के साथ मिल जाता है। यही गुर्दे में पथरी बनने का एक महत्वपूर्ण अवयव होता है। वे छोटे क्रिस्टल के बने होते हैं, जिसका निर्माण ऑक्सलेट के साथ कैल्सियम के संयोग से हो सकता है। थॉमस ने कहा, "विटामिन सी पौष्टिक आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुर्दे की पथरी के खतरे पर विटामिन सी का कोई भी प्रभाव खुराक पर और जिस पोषक के साथ इसे लिया जा रहा है उस पर निर्भर करता है।" 22 हजार से अधिक अधेड़ों और बुजुर्गो पर 11 वर्षो तक किए गए अध्ययन में पता चला है कि नियमित रूप से विटामिन सी की अलग से खुराक लेने वाले 3.4 प्रतिशत लोगों में अध्ययन के दौरान पहली बार गुर्दे की पथरी विकसित हुई। इसके मुकाबले बिटामिन सी न लेने वाले 1.8 प्रतिशत लोगों में ही गुर्दे की पथरी विकसित हुई।

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