Saturday, 23 April 2022

गर्मी में लू से बचने के असरदार उपाय

र्मी और लू का गहरा संबंध है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे लोग लू का शिकार होने लगते हैं। गर्मी


के बढ़ते ही लोगों को लू का डर सताने लगता है। बढ़ती गर्मी में लू से बचना जरूरी है। गर्मी में लू से बचने के लिए अलग-अलग उपाय करना बेहद जरूरी है। आइए जानें गर्मी में लू से कैसे बचें। किन टिप्स को अपनाकर गर्मी में लू से बचा जा सकता है।



  • लू से बचने के लिए गर्मी के मौसम में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। इसके लिए अधिक धूप में घर से बाहर न निकलें। यदि निकलना जरूरी है तो पूरी तरह अपने को ढक कर रखें या फिर टोपी, चश्मा, छतरी इत्यादि का प्रयोग करें।
  • गर्मी में बहुत ज्यादा रेशमी, डार्क या चटीले वस्त्र न पहनते हुए सूती व हल्के रंग के कपड़े पहनें। इतना ही नहीं बहुत अधिक टाइट कपड़े न पहनें।
  • गर्मी में लू से बचने के लिए जरूरी है कि खूब पानी पीएं।
  • चाय-काफी की बजाय समय-समय पर नींबू पानी, सोडा, शिकंजी, लस्सी, शर्बत इत्यादि को अधिक प्राथमिकता दें।
  • धूप से आकर एकदम ठंडा पानी न पीएं।
  • तैलीय पदार्थो के बजाय पेय पदार्थों को अधिक लें।
  • दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से स्नान करें।
  • गर्मी में बहुत अधिक देर रहने या घूमने-फिरने से लू लग जाती है।
  • जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या फिर बूढ़े, बच्चों या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लू लगने का अधिक खतरा रहता है। इसीलिए इन लोगों को अधिक देर तक धूप में रहने से बचना चाहिए।
  • गर्मी के मौसम में तन को अधिक से अधिक ढककर रखें। तेज धूप में नंगे पांव न रहें।
  • पेय पदार्थो में थोड़ा नमक मिलाकर पीने से लू से बचने में सहायता मिलती है। खाली पेट गर्मी में बाहर न निकलें।
  • बहुत अधिक भीड़ वाली जगहों या गर्मी वाले क्षेत्रों में न जाएं।
  • धूप में बाहर निकलना भी पड़े तो जेब में एक प्याज रख लें, इससे लू से बचाव में मदद मिलती है। इसी प्रकार ओआरएस घोल का प्रयोग भी लू से बचाता है।
  • ऐसे फल ज्यादा लें, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी आदि।
  • बहुत अधिक थका देने वाली एक्टिविटीज से बचें।

    इसके अलावा पूरा दिन फिट रहने व तरोताजा महसूस करवाने के लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज व मेडिटेशन भी बेहतर रहता है। गर्मी के मौसम में खान-पान का खास ख्याल रखें। इन टिप्स से आपको लू का डर नहीं रहेगा।

होम्योपैथी से इस तरह दूर करें मोटापा

होम्योपैथिक चिकित्सा मोटापा एवं उसके विभिन्न पहलुओं का उपचार करता है। होम्योपैथी में भी वजन कम करने के लिए दवाओं के अलावा डाइट कंट्रोल और एक्सरसाइज पर पूरा जोर दिया जाता है। इन दवाओं से पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है, चयापचय की क्रिया अच्छी होती है जिसकी वजह से मोटापा कम होता है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए कारगर एवं उपयुक्त होता है क्योंकि ये बहुत ही कोमल और पतले होते हैं और आमतौर पर इनका शरीर पर कुप्रभाव नहीं होता। वजन घटाने से पूर्व एक महत्वपूर्ण बात पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए कि आप कितने मोटे हैं तथा आपको कितना वजन घटाने की जरूरत है।

होम्योपैथी में वैसे तो मोटापे के लिए हैं 189 दवाएं

होम्योपैथी में वैसे तो मोटापे के लिये 189 दवाएँ हैं। दवाओं का चुनाव रोग के अनुसार रोग के इतिहास के अनुसार मरीज को देखकर किया जाता है एंटीमोनिअम क्रूडम, अर्जेन्टम नाट्रीकम, केलकेरिया कार्बोनिका, कोफिया क्रूडा, केपसिकम आदि वजन घटाने के लिए कुछ सबसे आम और प्रभावी उपचार होते हैं। खाना खाने के बाद दिन में तीन बार 10-15 बूंदें फायटोलका क्यू या फ्यूकस वेस क्यू चौथाई कप पानी में लें। कैल्केरिया कार्ब की 4-5 गोलियां भी दिन में तीन बार ले सकते हैं। ये दवाएं फैट कम करती हैं और नियमित लेने पर दो-तीन महीने में असर दिखने लगता है।

उपचार शुरू करने से पहले जान लें कि अपनी जीवन शैली में क्या क्या बदलाव लाना है

दिनभर खाने के बाद भी पेट न भरना, खाने से संतुष्टि ना होना और ज्यादा भूख की शिकायत वालों को आयोडम (30 पोटेंसी) देते हैं। मोटापे के साथ, अनियमित माहवारी व कब्ज की शिकायत हो तो ऐसी महिलाओं को ग्रेफाइटिस (30 पोटेंसी) दवा दी जाती है।  इसके लिए आपको होम्योपैथिक चिकित्सक से मिलकर वजन कम करने के सबसे अच्छे विकल्प का परामर्श लेना चाहिए साथ हीं उपचार शुरू करने से पूर्व आपको यह भी जान लेना चाहिए कि आपको अपनी जीवन शैली में क्या क्या बदलाव लाना है। आप वजन घटाने के लिए यदि कोई अन्य प्राकृतिक पूरक या उपचार ले रहे हैं। तो भी आप होम्योपैथिक दवाइयां ले सकते हैं क्योंकि यह दूसरे उपचार में न तो अवरोध पैदा करता है न हीं बुरा प्रभाव डालता है।

होम्योपैथी में संभव है बिना ऑपरेशन पथरी का इलाज

मतौर पर मान लिया जाता है कि पथरी का इलाज सिर्फ ऑपरेशन कराना है, लेकिन होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें कुछ ही दिनों में पथरी के दर्द से राहत मिल सकती है। पथरी एक ऐसा दर्दनाक रोग है, जिससे आज देश के 100 परिवारों में से 80 परिवार पीड़ित है। सबसे दु:खद बात यह है कि इनमें से कुछ प्रतिशत रोगी ही इसका होम्योपैथी इलाज करवाते हैं और बाकी लोग जानकारी के अभाव में इस असहनीय पीड़ा को सहन करते रहते हैं। तले-भुने और वसायुक्त आहार का सेवन, मोटापा, पानी कम पीने जैसी आदतों के चलते भी पथरी के मामले बढ़ रहे हैं। होम्योपैथी में मौजूद है सरल इलाज...

बेहद आम इस समस्या के होने के यूं तो कई कारण हैं। आमतौर पर मान लिया जाता है कि पथरी का इलाज सिर्फ ऑपरेशन कराना है, लेकिन होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें कुछ ही दिनों में पथरी के दर्द से राहत मिल सकती है। यहां हम पथरी होने के कारणों, पथरी के प्रकार और होम्योपैथी में कैसे इसका बिना ऑपरेशन, बिना इंजेक्शन सरल इलाज मौजूद है, इस बारे में हमने बात की इंदौर के होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. ए.के.द्विवेदी से, जो कई सालों से पथरी के इलाज के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कई मरीजों को पथरी से 20 से 25 दिनों में निजात दिलाई है।

पथरी होने के कारण

  • तले-भुने एवं वसायुक्त आहार का सेवन, मोटापा, पानी कम पीने जैसी आदतों के चलते पथरी के मामले बढ़ रहे हैं।
  • पथरी बनने का कारण कैल्शियम की जमावट, मूत्राशय की नलिका में रूकावट आदि हैं। इसका संबंध हाइपर पैराथायरॉइडिजम से भी होता है। यदि यह कैल्शियम पेशाब के साथ बाहर निकल जाए तो बेहतर है वर्ना यह गुर्दे की कोशिकाओं में एकत्र होता रहता है और पथरी का रूप ले लेता है।
  • पेशाब में कैल्शियम की अधिकता हाइपरकैल्सियूरिया कहलाती है। यह समस्या अत्यधिक कैल्शियम वाले आहार के सेवन से होती है।

पथरी के लक्षण

पित्ताशय की पथरी कई वर्षों तक लक्षणरहित भी रह सकती है। आमतौर पर लक्षण तब दिखने शुरू होते हैं, जब पथरी एक निश्चित आकार प्राप्त कर लेती है, जबकि किडनी की पथरी में पेशाब में जलन जल्दी होने लगती है।

  • पित्ताशय की पथरी का एक प्रमुख लक्षण "पथरी का दौरा" होता है जिसमें व्यक्ति को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में अत्यधिक दर्द होता है, जिसके बाद प्राय: मिचली और उल्टी आती है, जो 30 मिनट से लेकर कई घंटों तक निरंतर बढ़ती ही जाती है।
  • किसी मरीज को ऐसा ही दर्द कंधे की हड्डियों के बीच या दाहिने कंधे के नीचे भी हो सकता है। यह लक्षण "गुर्दे की पथरी के दौरे" से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
  • अक्सर ये दौरे विशेषत: वसायुक्त भोजन करने के बाद आते हैं और लगभग हमेशा ही यह दौरे रात के समय आते हैं।
  • अन्य लक्षणों में, पेट का फूलना, वसायुक्त भोजन के पाचन में समस्या, डकार आना, गैस बनना और अपच इत्यादि होते हैं।

20-25 दिन में मिल सकती है पथरी की समस्या से राहत

डॉ. एके द्विवेदी बताते हैं कि उनके द्वारा दी जाने वाली दवाइयों से कई मरीजों की छोटी-छोटी पथरी कुछ ही दिनों में होम्योपैथिक दवा से निकल गई। एक महिला मरीज, जिसको 11X6 एमएम की पथरी थी, मात्र 21 दिन की होम्योपैथी दवा लेने से मूत्र मार्ग से निकल गई। इसके लिए डॉ. द्विवेदी को गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया। छोटे बच्चों में भी पथरी बन जाती है, जिन्हें कुछ माह तक होम्योपैथी दवाइयां देने से पथरी निकल भी जाती है तथा बार-बार पथरी का बनना भी बंद हो जाता है।

डॉ. ए.के. द्विवेदी  
बी.एच.एम.एस., एम.डी. (होम्यो.), एफ.एच.सी.एच., लंदन (यू.के.),
पीएच.डी., एम.बी.ए., एम.ए. (योग)
ई-मेलः drakdindore@gmail.com  
मोबा. 98260 42287

Friday, 22 April 2022

अजीबोगरीब बीमारी, लड़की के शरीर से पसीने की जगह निकलता था खून, होम्योपैथिक इलाज से हुई ठीक

  • कई डॉक्टर्स से इलाज से कर दिया था मना, होम्योपैथिक उपचार वरदान साबित हुआ

  • बीमारी  की वजह से स्कूलों वालों ने आने भी कर दिया था मना, इससे मानिसक आघात होने का था खतरा

इंदौर ।  दुनिया में कई तरह के लोग होते हैं, जिन्हें कई तरह की अजीबोगरीब बीमारियां रहती है।  कुछ बीमारी ऐसी सामने आ जाती है जो मेडिकल साइंस को भी हैरान कर देती है। इसी  तरह की अजीब बीमारी का मामला इंदौर में सामने आया है जिसने दुनियाभर के डॉक्टर्स को परेशान कर दिया है। इंदौर की रहने वाली 17 वर्षीय एक लड़की के शरीर से पसीने की जगह खून निकलता था।। जी हां, किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करने के बाद इस लड़की के माथे से लेकर हथेलियों तक से खून निकलने लगता था। जिसका उपचार इंदौर के होम्योपैथिक स्पेशलिस्ट डॉ. एके द्विवेदी ने मात्र 30 हजार रुपए के खर्च में कर दिया और और इस बालिका को इस अजीबोगरीब बीमारी से मुक्ति दिलवा दी।

कई डॉक्टर्स को बताने के बाद भी नहीं हुआ आराम, पोड़सी इसे मानते थे देवी का प्रकोप

लड़की की इस बीमारी को लेकर परिजन काफी परेशान हो गए थे, क्योंकि किसी भी समय बच्ची को पसीने की जगह खून आना शुरू हो जाता था। परिजनों ने बताया कि सबसे अजीब बात ये हो गई कि पड़ोसी इससे देवी प्रकोप मानकर झाड़-फूंक करने की बात करते थे। वहीं परिजनों ने बच्ची के इलाज के लिए कई विशेष डॉक्टर्स को भी दिखाया लेकिन किसी तरह का आराम बच्ची को नहीं मिला। वहीं स्कूल के प्रिंसिपल ने भी लड़की को स्कूल आने से मना कर दिया जिसके बाद बच्ची को मानिसक आघात पहुंचने का खतरा भी परिजनों को हो रहा था।


हेमैटोहाइड्रोसिस बीमारी से पीड़ित थी लड़की

डॉ. एके द्विवेदी के अनुसार लड़की को हेमैटोहाइड्रोसिस नाम की एक बीमारी है, जो करोड़ों लोगों में से किसी एक में ही पाई जाती है। यह बीमारी होने के कारण लड़की के शरीर से पसीने की जगह खून निकलता था। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि आपने देखा होगा कि लोगों को हाथ और चेहरे के साथ में पूरे शरीर में पसीना आता है। हाईड्रोसिस यानी कि साधारण पसीना ही ज्यादातर लोगों को आता है तो लोग परेशान हो जाते हैं लेकिन डॉ. एके द्विवेदी के पास फरवरी 2021 को एक ऐसा केस आया जिसमें मरीज को खून का पसीना आता है। डॉ. द्विवेदी के अनुसार इस तरह का केस देश में दिल्ली में पहले मिल चुका था जो कि एक लड़की ही थी।

खबर देखिये... https://www.youtube.com/watch?v=qJYZtJdy7nY

30 हजार रुपए से कम खर्च में होम्योपैथी से हो गया पूरा इलाज

इंदौर के डॉ.  वैभव चतुर्वेदी (एमडी, सायकाइट्री) आप इंडेक्स मेडिकल कॉलेज इंदौर में प्रोफेसर भी हैं। आपने और डॉ. द्विवेदी ने मिलकर  पीड़ित बच्ची से बात की और परिजनों से बात कर होम्योपैथिक के साथ सायकाइट्री पॉइंट आफ व्यू से भी देखा। डॉ. चतुर्वेदी का ऐसा मानना था कि इसमें सायकाइट्री के लक्षण नहीं दिखाई दिए। कहीं ना कहीं ब्लड रेशम में प्रेशर बढ़ जाने के चलते इस तरह की परेशानी हो रही थी। इसके बाद बच्ची को होम्योपैथिक ट्रीटमेंट शुरू किया गया। ट्रीटमेंट फरवरी 2021 में शुरू किया गया और जुलाई आते-आते उसका टेक आना बंद हो गया और नवंबर 2021 के बाद ब्लड का या किसी तरह का चेहरे का घाव नहीं हुआ। फिलहाल अभी बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। वहीं इस पूरी अजीबोगरीब बीमारी के ठीक होने के बाद परिवार में काफी खुशी का माहौल है। खास बात यह कि मात्र 30 हजार रुपए के कम खर्च में इस खतरनाक कही जाने वाली बीमारी को काबू में कर लिया गया।

Saturday, 16 April 2022

 

दो साल के बच्चे से हारा अप्लास्टिक एनीमिया, होम्योपैथी साबित हुई वरदान


  • बिहार के दो वर्षीय बच्चे शिवांश सिंह ने जीती जिंदगी की जंग
  • एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी से इलाज लेने के बाद मिली सफलता
  • बच्चे के पिता नीरज कुमार ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर दी जानकारी

इंदौर।  चिकित्सा विज्ञान में अत्याधुनिक नवीनतम पद्धतियां मौजूद होने के बावजूद अप्लास्टिक एनीमिया का इलाज करना अब भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, लेकिन अब होम्योपैथिक दवाईयों से मरीजों को पूरी तरह ठीक

करने में बड़ी सफलता मिल रही है। अप्लास्टिक एनीमिया के हर उम्र के मरीजों को स्वस्थ पर नया जीवन देने की दिशा में होम्योपैथिक दवाईयों से कम समय में बड़े समारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हाल ही में इंदौर के एक वरिष्ठ चिकित्सक द्वारा बिहार के दो वर्षीय बच्चे की इस बीमारी को दूर किया गया है। मरीज बच्चे के पिता ने मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को इस उपलब्धि की जानकारी देने के लिए उन्हें पत्र भी लिखा है।

मौलाबाग, भोजपुर निवासी नीरज कुमार ने बताया कि मेरे बेटे शिवांश सिंह (दो वर्ष) को अप्लास्टिक एनीमिया नामक बीमारी हो गई थी। स्थानीय स्तर पर हमने कई अस्पतालों और डॉक्टरों से इलाज करवाया लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। इसके बाद दिल्ली के अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से भी पांच महीने तक इलाज करवाया लेकिन बच्चे की हालत खराब होती चली गई। इसके बाद मुझे इंदौर के एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर के बारे में जानकारी मिली और मैंने यहां डॉ. एके द्विवेदी से संपर्क किया। डॉ. द्विवेदी ने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से इलाज शुरू किया और दवाईयां दी गईं। कई बार जांचें करवाई गईं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर  दवा की मात्रा कम- ज्यादा की गई। अब मेरे बच्चे के स्वास्थ्य में काफी सुधार है और उम्मीद है कि जल्द ही वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा।

क्या है अप्लास्टिक एनीमिया

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि अप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर बीमारी है जो किसी भी उम्र के लोगों को अपना शिकार बना सकती है। अप्लास्टिक एनीमिया हमारे शरीर के बोन मैरो में होने वाली बीमारी है। इसमें हमारा बोन मैरो नए ब्लड सेल्स का निर्माण नहीं कर पाता। इसे मायेलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम भी कहा जाता है। अप्लास्टिक एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण बंद हो जाता है और शरीर के अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस बीमारी के कारण शरीर में प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं और बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। अनियंत्रित रक्त स्त्राव होने लगता है। मरीज को बार-बार ब्लड देने के बावजूद प्लेटले्टस घटते जाते हैं और सही समय पर इलाज नहीं होने की स्थिति में यह जानलेवा साबित होता है। 

न ब्लड देना पड़ रहा, न प्लेटलेट्स

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि शिवांश की हालत में अब पहले से काफी सुधार है और दवाईयों के असर से उसकी बीमारी लगभग ठीक हो चुकी है। अब न ही उसे ब्लड चढ़ाना पड़ता है और न ही प्लेटलेट्स देने की जरूरत पड़ती है। अब शरीर के विभिन्ना हिस्सों से ब्लीडिंग भी नहीं होती और कुछ ही दिनों में वह सामान्य बच्चों के साथ दौड़ने-भागने और खेलने में सक्षम होगा। संभव है कि भविष्य में उसे दवाईयां लेने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

पिता ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

शिवांश के पिता नीरज कुमार ने बताया कि अप्लास्टिक एनीमिया जानलेवा बीमारी है और कई मरीज इसके कारण मौत के मुहाने पर खड़े हैं। यह हर उम्र के लोगों को हो सकती है और इसके बाद लोग जगह-जगह भटकते रहते हैं लेकिन उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाता। मैंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर शिवांश की तबीयत में सुधार और डॉ. द्विवेदी की सफलता के बारे में जानकारी दी है। ताकि अन्य मरीजों और  परिजनों को भी यह पता लग सके, वे विशेषज्ञ डॉ. द्वारा होम्योपैथी इलाज ले सके और मरीजों को नई जिंदगी मिल सके।

Monday, 21 June 2021

 

योग भगाये रोग

आयुष मन्त्रालय भारत सरकार के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार योग हमारे जीवन में अत्यन्त महत्व रखता है। योग द्वारा हम अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को तो बढ़ा ही सकते हैं साथ में योग हमें स्वस्थ रहने की स्वस्थ तरीके से जीने की, स्वस्थ तरीके से सोचने की कला भी सिखाता है।

आयुष मन्त्रालय भारत सरकार के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार योग हमारे जीवन में अत्यन्त महत्व रखता है। योग हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, योग हमें स्वस्थ रहने की कला सिखाता है, योग हमें निरोग बनाता है। आपके अनुसार आपने कई असाध्य रोगियों की चिकित्सा होम्योपैथी व योग के जरिये किया है। ऐसे मरीज जिनको लम्बर स्पॉडिलाइटिस था, जिनको सर्वाइकल स्पॉडिलाइटिस था, जिनको वेरिकोज वेन थी, जिनको चक्कर आते थे, जिनको नींद नहीं आती थी, अनेकों प्रकार की ऐसी बीमारियाँ जिसमें उनका कंसन्टेऊषन नहीं बनता था, बच्चों को एग्जाम से डर लगता था, फेल होने से डर लगता था, इत्यादि ऐसे मरीज आये जो निराश होकर करके जो अन्य चिकित्सा पद्धति को अपना करके डॉ. द्विवेदी के पास आये और डॉ. द्विवेदी ने होम्योपैथी चिकित्सा के साथ-साथ सामान्य सी यौगिक क्रियायें बताई, सामान्य आसन करवाया और वे लोग आज बिलकुल स्वस्थ हैं।

डॉ. द्विवेदी बताते हैं कि, जितने भी सर्वाइकल स्पॉडिलाइटिस के मरीज आते थे, उन सभी को आप भुजंगासन की सलाह देते थे, उनको भुजंगासन एक बार करवाते थे, कैसे करना है, उसकी पूरी क्रिया बताते थे और उनको लगातार घर पर करने की सलाह देते थे। इसी प्रकार लम्बर स्पॉडिलाइटिस की परेशानी होती थी, जिनको कमर में नीचे दर्द होता था, उनको आप भुजंगासन के साथ-साथ सेतुबन्धासन करने की सलाह देते थे। सेतुबन्धासन में जब हमारा कमर ऊपर की ओर उठ जाता है तो जो दबाव आता है नसों में वो कम हो जाता है और इस तरीके से मरीजों का दर्द कम हो जाता है और जो स्पाइन पर कम्प्रेसर आता है वो भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। इसी तरीके से जिन्हें वेरिकोज वेन की परेशानी थी, उनको सर्वांगासन और शीर्षासन करने की सलाह दी। इसी तरीके से जिनको चक्कर आता था, उनको भ्रामरी करने की सलाह दी। इसी तरीके से जिनको अनिद्रा या लय का कंसन्टेऊषन की  परेशानियाँ होती थी, उनको शवासन की सलाह दी। आपने होम्योपैथी चिकित्सा के साथ-साथ योग की क्रियायें कराने का जो लोगों को अनूठा प्रयोग किया उससे लगभग 21 वर्षों में हजारों रोगियों को पूर्णरूप से बीमारी से छुटकारा मिला। आजकल जो लोग चेयर पर बैठकर ऑफिस वर्क करते हैं, उनको भुजंगासन या फिर सेतुबन्धासन करने से बहुत आराम मिल जाता है।

उनमें दो तरह की परेशानी होती है, जो लोग कम्प्यूटर चलाते हैं, लैपटॉप चलाते हैं, मोबाइल चलाते हैं उनको सर्वाइकल स्पॉडिलाइटिस हो जाती है जो लोग ज्यादा ड्राइविंग करते हैं या चेयर सिटिंग करते हैं लगभग 10-12 घंटे उनको लम्बर स्पॉडिलाइटिस की परेशानी होती है। इन दोनों ही मरीजों के लिये सर्वाइकल और लम्बर की परेषानी से छुटकारा पाने के लिये भुजंगासन और सेतुबन्धासन बहुत ही अच्छा तरीका है और इससे कई रोगियों को काफी लाभ मिला है। ऐसे कई स्टूडेंट जो परीक्षा से डरते थे फेल होने से डरते थे, जिनमें लय का कंसन्टेऊषन उनको जब योगासन व योगनिद्रा की सलाह दी गई तो देखा गया कि, उनका कंसन्टेऊषन लेवल बढ़ गया या याददाष्त बेहतर हो गई और अनिद्रा से भी छुटकारा मिला।

डॉ. द्विवेदी के अनुसार योग हमें जीवन जीने की कला सिखाता है, योग हमें बीमारियों से बचाता है। योग रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ा सकता है। हमारे कम्पलीट वेल बींग के लिये योग सबसे जरूरी है। सभी को 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट निकालकर योग अवष्य करना चाहिये। डॉ. द्विवेदी ऐसे होम्योपैथी चिकित्सक हैं, जो होम्योपैथी चिकित्सा के साथ-साथ ही योग की थेरेप्युटिक वैल्यू मरीजों को बताते हैं। मतलब किस बीमारी में कौन-सा योग थेरेप्युटिक काम करेगा, इस तरीके से आप योग का थेरेप्युटिक प्रयोग करते हैं मरीजों पर, उससे मरीजों को काफी लाभ मिलता है और इस पर आपके कई आर्टिकल भी प्रकाशित हो चुके हैं। योग और होम्योपैथी के द्वारा रोगों की चिकित्सा की जाती है।

आपके अनुसार योग किसी भी चिकित्सा पद्धति के साथ अपनाई जा सकती है। योग में चूँकि किसी भी प्रकार का कोई दवा प्रयोग नहीं होती है इसलिये किसी भी अन्य चिकित्सा पद्धति के साथ योग को अपनाया जा सकता है। साथ ही आपने सलाह दी कि योग अच्छे से सीखकर ही करना चाहिये यदि आप गलत तरीके से योग करेंगे तो उसके कुछ दुष्परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। तो लोगों से अपील है कि, योग जो अच्छे जानकार हैं जिन्हें थेरेप्युटिक योग की अच्छी जानकारी है, उनसे समझकर ही योग किया जाना चाहिये। योग रोगी भी कर सकता है, योग स्वस्थ भी कर सकता है। कोई भी व्यक्ति योग कर सकता है। रोगी अपने रोग के निवारण के लिये योग कर सकता है और स्वस्थ व्यक्ति बीमार नहीं होने के लिये योग कर सकता है। 

इम्यून सिस्टम की मजबूती के लिए कारगर हैं ये 4 योगासन, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों को भी रखते हैं दूर!

नियमित योग करने से इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाया जा सकता है. इम्यूनिटी ही हमें संक्रमण, वायरल से बचाने में मदद करती है. अगर हमारी इम्यूनिटी अच्छी है तो हम किसी भी वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बच सकते हैं. गतिहीन जीवनशैली हमेशा कमजोर इम्यून सिस्टम  का कारण बनती है. इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर आप अक्सर सर्दी जुकाम और बुखार से परेशान रहते हैं. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए योग  एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. कई लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के नेचुरल तरीके ढूंढते हैं. योग भी इन्ही में से एक है. जो लोग जानना चाहते हैं कि नेचुरल तरीके से इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं उनके लिए योग से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता है. योग एक नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर  का काम कर सकता है. यहां हम आपको 4 ऐसे ही योगासनों के बारे में बता रहे हैं जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं.

 त्रिकोणासन 

त्रिकोणासन का नियमित अभ्यास करने से इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं. इस मुद्रा में त्रिभुज की आकृति बनाई जाती है इसलिए इसे त्रिकोणासन कहा जाता है. यह योगासन प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए सबसे अच्छे योग में से एक माना जाता है. इस योगासन को सुबह उठकर करना फायदेमंद माना जाता है.

त्रिकोणासन करने का तरीका

सीधे खड़े हो जाएं, दोनों पैरों के बीच में 3.5 से लेकर 4 फीट तक गैप कर लें. अपनी दाहिने एड़ी के केंद्र बिंदु को बाएं पैर के आर्च के केंद्र की सीध में रखें. गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ते जाएं. सांस छोड़ते हुए शरीर को हिप्स के नीचे से दाहिनी तरफ मोड़ें. बाएं हाथ को ऊपर उठाएं और दाहिने हाथ से जमीन को स्पर्श करें. दोनों हाथ मिलकर एक सीधी लाइन बनाएंगे. दाहिने हाथ को पिंडली, टखने या जमीन पर टिके दाहिने पैर पर रखें. सांस छोडऩे के साथ ही शरीर को ज्यादा रिलेक्स महसूस करें। गहरी सांस भीतर खींचते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें. हाथों को साइड्स में गिराएं और पैरों को सीधा करें.

 पादंगुष्ठासन 

इम्यून सिस्टम के लिए एक और आसन को फायदेमंद माना जाता है वह है पादंगुष्ठासन. इस आसन को बिग टो पोज़ भी कहा जाता है, आपकी मांसपेशियों को आपके पैरों, आपकी रीढ़ और गर्दन के पीछे खींचने में मदद करता है. यह बेसिक लेवल का हठ योग सुबह खाली पेट कम से कम 30 सेकंड के लिए करें.

पादंगुष्ठासन का तरीका

पादंगुष्ठासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को फर्श पर बिछा के उस पर सीधे खड़े हो जाएं. इस आसन को करने के लिए आप ताड़ासन की मुद्रा में भी खड़े हो सकते हैं. अपने दोनों हाथों और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और अपने दोनों पैरों के बीच कम से कम 6 इंच की दूरी रखें. अब साँस को छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को सीधा रखें हुए कूल्हों के जोड़ से नीचे की ओर झुकें. सांस लें और धड़ को ऊपर उठाएं और अपने हाथों को कोहनी से सीधा करें. इस आसन में आप 30 से 90 सेकंड तक रुक सकते हैं.

 भुजंगासन 

भुजंगासन, जिसे कोबरा पोज़ भी कहा जाता है, एक कोबरा के उभरे हुड जैसा दिखता है. भुजंगासन सूर्यनमस्कार अभ्यास का हिस्सा है. 15-30 सेकंड या 5-10 सांस के लिए इस बेसिक लेवल अष्टांग योग मुद्रा को करें. यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद हो सकता है.

भुजंगासन करने का तरीका

सबसे पहले योग मेट पर पेट के बल लेट जाएं, हाथों को सिर के दोनों तरफ रखें और माथे को जमीन से टिकाएं. इस दौरान अपने पैरों को तना हुआ और इनके बीच थोड़ी दूरी रखें. अब अपनी हथेलियों को अपने कंधों के बराबर में लाएं. फिर लंबी गहरी सांस भरते हुए हाथों से जमीन की ओर दबाव डालते हुए, नाभि तक शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें. इस पोजीशन में रहकर आसमान की ओर देखने की कोशिश करें और इस पोजीशन में कुछ देर ठहरें. इस दौरान अपने शरीर का भार दोनों हाथों पर बराबर बनाएं रखें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें. अब धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं.

 ताड़ासन 

नियमित रूप से ताड़ासन करने से आप इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं. यह एक ऐसा योगासन है जिससे न सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य मिल सकता है बल्कि यह शरीर को स्ट्रेच करने में भी मददगार हो सकता है. ताड़ासन को माउंटेन पोज़ भी कहा जाता है. इस योगासन को दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि जब भी आप इस योग को करें आपका पेट खाली होना चाहिए. ऐसे में सलाह यही दी जाती है कि इसे सुबह उठने के बाद खाली पेट किया जाए.

ताड़ासन करने का  तरीका

सबसे पहले किसी साफ और खुली जगह का चुनाव करें और योग मैट बिछाएं. अब पैर और कमर को सीधा करके योग मैट पर खड़े हो जाएं. इस दौरान एडिय़ों को एक दूसरे से मिला कर रखें. अपने दोनों हाथों को बगल में सीधा रखें. अगले चरण में हथेलियों को आपस में फंसाकर ऊपर उठाएं. हथेलियों की दिशा आकाश की तरफ होनी चाहिए. अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए, पंजों के बल खड़े होते हुए शरीर को ऊपर की ओर खीचें. जब शरीर पूरी तरह तन जाए तो इस मुद्रा में कुछ देर बने रहने की कोशिश करें. साथ ही सामान्य रूप से सांस लेते रहें. इस अवस्था में शरीर का पूरा भार पंजों पर होगा. फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं. इस पूरी प्रक्रिया को लगभग 8 से 10 बार दोहराएं.


Tuesday, 29 December 2020



नूतन वर्ष 2021 में इन इक्कीस सूत्रों को अपना, हजारों के बीच स्वयं की पहचान बनायें अलग- 

आयुष मंत्रालय के सदस्य डॉ ए के द्विवेदी के अनुसार वो लोग खुश नसीब हैं जो 2021  में जीवित हैं,  वर्ष 2020  सभी के लिए यादगार रहेगा खुद को बचाने का वर्ष था खुद के लिए सभी ने हर संभव प्रयास भी किए कुछ और संकल्प लेकर हम लोग अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं 2021  में 21 संकल्प लेकर हम अपनी उन्नति कर सकते हैं पिछले बीते वर्ष को एक सबक के रूप में लेकर आगे बढ़े
जिंदगी जिंदादिली का नाम है।  जिन्दा दिली दिखाएँ खुद स्वस्थ रहें और दुसरो को स्वस्थ बनाये आप भी मुस्कुराये और दुसरो के मुस्कराहट का कारण बने


1- अलसुबह जागें नींद से, देर से उठने की आदत को करें, अलविदा। दाँतों को प्रतिदिन प्राकृतिक एवं इकोफ्रेण्डली टूथब्रश से साफ करें।

2 - ताँबे के पात्र में भरा जल का सेवन करें। पानी पियें छान कर।

3 - नाश्ता हो पौष्टिक, खाना हो हल्का, घर पर तैयार खाना, है बेहतर विकल्प, पैक्ड फूड, जंक फूड से बचें, ताजे फलों को करें, आहार में शामिल। खाने में सब्जियों का प्रमाण बढ़ायें।

4 - पाँच बादाम रोज खायें। मोटापा घटायें न कि न्यूट्रिएन्ट्स। सप्ताह में एक बार उपवास करें।

5- खाने की वस्तुओं में रोज बदलाव करें, अधिक नमक का सेवन न करें। शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों से बनायें दूरी।

6 - दही एक अच्छा प्रोबायोटिक है, जो कि आँतों को स्वस्थ रखता है। अपने आहार में फाइबर एवं विटामिन-सी युक्त पदार्थों का सेवन बढ़ायें।

7 - दूध पियें रोजाना। नारियल पानी है अमृत पेय। दिन में एक बार ग्रीन टी जरूर पियें।

8 - अपने आहार में फाइबर एवं विटामिन-सी युक्त पदार्थों का सेवन बढ़ायें।

9 - तन-मन की शक्ति योग से। सीढ़ियों का प्रयोग हमेशा करें, लिफ्ट में सवार होने की वजाय।

10 - खुद के साथ क्वालिटी टाईम बितायें, खुद को न करें, नजरअन्दाज।

11 - रात में सोने से पहले दिनभर की गतिविधियों का आँकलन करें। लेते रहें, गहरी मीठी नींद और अपनी हाॅबी से तनाव को करें दूर।

12 - शान्त वातावरण में स्वयं को खोजें, ध्यान (मेडिटेशन) करके मन को रखें स्वस्थ।

13 - मोबाईल के उपयोग का समय निश्चित करें।

14 - अपने शरीर की क्षमता जानकर ही कार्य करें, प्रत्येक दिन के कार्य की समय-सारिणी बनायें।

15 - प्रत्येक कार्य का लक्ष्य निर्धारित कर तनाव से बचें। देर तक ना देखें, टीवी/मूवीज। सोने का समय हो निश्चित।

16 - स्वयं से दवाई न लें, चिकित्सक की सलाह लें। महिलायें मासिक धर्म के समय स्वच्छता का रखें ख्याल।

17 - लम्बी गहरी साँसें लेकर मन को करें शान्त। जलन, ईर्ष्‍या बुराई से रहें दूर।  

18 - अपने-आप से प्यार करना सीखें और अपनी लाईफ के उद्देश्य को जानें।

19 - 20-20 का रूल अपनायें। 20 सेकेण्ड के लिये 20 फीट दूर किसी चीज को देखने के लिये हर 20 मिनिट का ब्रेक लें।

20 - किसी भी प्रकार के नशे का सेवन ना करें। शरीर व फेफड़ों को बचाना है तो छोड़ दें, धूम्रपान।

21 - शारीरिक-दूरी बनाये रखें, मानसिक नहीं।