Friday, 12 September 2014

जिम में ऐसे न करें शुरुआत


बॉडी बनाने का शौक नया नहीं लेकिन कई बार जोश-जोश में ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिससे लेने के देने पड़ जाते हैं। पहली बार जिम जाने वाले लोग अधिकतर ऐसी गलतियां करते हैं। जिम में कुछ गलतियों को दोहराना अपने शरीर को और खराब करने जैसा है। जिम में इन बातों का रखें खास ख्याल...
ज्यादातर युवा या नौसिखिए जिम के पहले दिन ही सबकुछ पा लेना चाहते हैं। इसके लिए वह पूरा जोश निकाल देते हैं, यह जाने बिना की इस एक्सरसाइज के लिए कितने सेट चाहिए और क्या यह उनके लिए जरूरी है भी। डंबल्स, ऐब क्रंच मशीन, लेवरेज चेस्ट प्रेस, मशीन कोई भी हो, शुरुआती हफ्ते में इसे 1 सेट (10-15 बार) ही रखें।
ध्यान रखिए, आप जिस किसी की बॉडी देखकर इन्सपायर्ड हैं उसने इसे एक दिन में ही नहीं हासिल किया है। इसके पीछे सालों की मेहनत और सही दिशा की जरूरत होती है। जिम के लिए अपना रूटीन निर्धारित अवश्य करें। चेस्ट, शोल्डर्स, बाइसेप्स शरीर के अलग-अलग हिस्से के लिए एक-एक दिन निर्धारित करें और उससे संबंधित मशीन पर निर्धारित दिन ही मेहनत करें।

धीरे-धीरे सेट बढ़ाएं...

  • एक अहम बात गांठ बांध लें, जिम करना और बॉडी बनाने के लिए जितना शारीरिक श्रम चाहिए होता है, उतनी ही मानसिक एकाग्रता भी इसके लिए जरूरी है
  • पॉजिटिव रहकर जज्बे के साथ धीरे-धीरे आगे बढि़ए। शुरुआत में जाकर फिर जिम छोड़ देने की प्रवृत्ति भी बहुतेरे लोगों में होती है।
  • भारत में जिम कल्चर तेजी से आगे बढ़ रहा है। गली-गली में जिम खुलने से एक्सपर्ट्स की डिमांड भी बढ़ी है। ऐसे में आपने कौन सा जिम जॉइन किया है, इसका खास ख्याल रखें। एक बेहतरीन ट्रेनर ही आपकी बॉडी को बेहतरीन शेप दे सकता है। डाइट से लेकर सोने-उठने तक का रूटीन ट्रेनर से ही बनवाएं। और एक्सरसाइज भी उसकी देख-रेख में ही करें।
  • बॉडी बनाने के लिए युवा अक्सर ही ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जिसके बुरे परिणाम उन्हें भुगतने पड़ते हैं। बॉडी को बेहतर शेप देने के चक्कर में युवाओं के बाल झडऩे के किस्से भी सामने आए हैं। इसलिए जल्दबाजी में न पड़कर ट्रेनर की सलाह का पालन करें।
  • जिम में आते ही मशीन पर व्यायाम शुरू न करें, क्योंकि इससे आपको चोट लग सकती है, आपकी पीठ अकड़ सकती है और आपके शरीर में दर्द हो सकता है, इसलिए जिम में सबसे पहले हल्के-फुल्के व्यायाम करें, जैसे वार्म-अप और स्ट्रेचिंग।
  • वैसे, सेहत को दुरुस्त रखने के लिए योग, कसरत से बेहतर माध्यम कुछ हो ही नहीं सकता।

Thursday, 11 September 2014

मुंह के छाले का बार-बार होना


मुंह का अल्सर बहुत आम हैं और ओरल स्वास्थ्य सामान्य जनसंख्या के लगभग 20 प्रतिशत के आसपास को प्रभावित करती है। इसके अलावा, छालेयुक्त अल्सर के रूप में जाना जाने वाला अल्सर हम में से ज्यादातर लोगों को जीवन में कम से कम एक बार जरूर विकसित होता है। हालांकि मुंह का अल्सर महिलाओं में अधिक आम हैं, लेकिन यह वयस्कों और बच्चों को भी प्रभावित कर सकता हैं। इन दर्दनाक मुंह के छालों का कारण जानकर हमें आसानी से इसे होने से रोक सकते हैं। यहां पर मुंह के छालों के आम कारण के बारे में जानकारी दी गई है।
नींबू, टमाटर, संतरा, स्ट्रॉबेरी और अंजीर जैसे खट्टे फल और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थ मुंह में छालों के लिए ट्रिगर के रूप में काम करते हैं। अन्य आहार स्रोत जैसे चॉकलेट, बादाम, मूंगफली, गेहूं का आटा और बादाम आदि मुंह के छालों के उच्च जोखिम में डाल सकते है।

ओरल हाइजीन से जुड़ी बातें

कठोर खाद्य पदार्थों को चबाना, अत्यधिक ब्रश करना और ब्रेसिज़ की सही प्रकार से फिटिंग आदि अधिकांश लोगों के भी मुंह में छालों का कारण होता है। कुछ लोगों में, सोडियम सल्फेट युक्त टूथपेस्ट का प्रयोग भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।

तनाव और चिंता

जब आप उदास या चिंतित होते हैं तो आपके शरीर के साथ मुंह के अल्सर को प्रभावित करने वाले केमिकल का स्राव होता है। इसलिए जो लोग हमेशा तनाव में रहते हैं उनमें मुंह में छालों से पीडि़त होना का उच्च जोखिम रहता है।

पोषक तत्वों की कमी

विटामिन बी 12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण बीमारी की स्थिति की एक विस्तृत श्रृंखला के उच्च जोखिम में डालने के अलावा मुंह के छालों का कारण भी बन सकता है। मुंह के छाले के खतरे को कम करने के लिए आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध आहार अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

पोषक तत्वों की कमी

विटामिन बी 12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण बीमारी की स्थिति की एक विस्तृत श्रृंखला के उच्च जोखिम में डालने के अलावा मुंह के छालों का कारण भी बन सकता है। मुंह के छाले के खतरे को कम करने के लिए आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध आहार अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

हार्मोनल परिवर्तन

शरीर में हार्मोंन के स्तर में परिवर्तन के कारण भी मुंह में छाले होते हैं। यह आमतौर पर मासिक धर्म चक्र के दौरान कुछ महिलाओं में देखने को मिलता है।

चिकित्सा की स्थिति

कुछ नैदानिक स्थितियां जैसे सीलिएक रोग, वायरल संक्रमण और प्रतिक्रियाशील गठिया आदि भी आपको मुंह के छालों के बार-बार होने के जोखिम में डाल सकती है। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और जठरांत्र रोगों से पीडि़त लोगों में भी मुंह में छालों की समस्या बार-बार होती है।

दवाएं

कभी कभी, रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाले दवाएं भी मरीजों में मुंह के छालों का कारण बनती है। सीने के दर्द के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दर्दनाशक दवाएं जैसे बीटा ब्लॉकर्स भी मुंह में छाले की वृद्धि करता है।

विटामिन डी की कमी दे सकती है यह बड़ा खतरा


न्यूरोलॉजी नाम की पत्रिका में छपे शोध में कहा गया है कि विटामिन डी की कमी से उम्रदराज़ लोगों में पागलपन का ख़तरा बढ़ जाता है। मछली, दालों और त्वचा के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने से विटामिन डी मिलता है। ब्रिटेन के शोधकर्ता 65 साल से अधिक की उम्र के 1,650 से अधिक लोगों पर किए अध्ययन के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। हालांकि इस नतीजे पर पहुंचने वाला यह पहला शोध नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन काफी विस्तृत था।

बढ़ेगा ख़तरा

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एकेस्टर मेडिकल स्कूल के डेविड लेवेलिन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय टीम ने लगभग छह साल तक उम्रदराज़ लोगों पर शोध किया। शोध से पहले इन सभी व्यक्तियों में पागलपन, दिल की बीमारियां और दिल का दौरा जैसी बीमारियां नहीं थीं। अध्ययन के अंत में पाया गया कि 1,169 लोगों में विटामिन डी का स्तर अच्छा था और उनमें 10 में से एक व्यक्ति में पागलपन का ख़तरा होने की संभावना थी। जिन 70 व्यक्तियों में विटामिन डी का स्तर बहुत कम था, उनमें से पाँच में से एक में पागलपन का ख़तरा होने की संभावना जताई गई।

Wednesday, 10 September 2014

महिलाएं एवं हृदय रोग


हृदय रोग का खतरा आजकल काफी बढ़ गया है, और महिलाओं के लिए हालात पुरुषों की अपेक्षा अधिक चिंताजनक हैं। तनाव, खानपान में अनियमितता, अपनी सेहत के प्रति अनदेखी जैसे तमाम कारण हैं, जिनके चलते महिलायें दिल की बीमारी की अधिक शिकार हो रही हैं।
भारत में हृदय रोग से पीडि़त महिलाओं की तादाद और भी खराब हैं। दुनिया भर में हृदय रोगों के जितने मामले होते हैं उनमें से 15 प्रतिशत मामले अकेले भारतीय महिलाओं के होते हैं। दुनिया भर में 86 लाख महिलाओं की मौत हृदय संबंधी रोगों से होती है।
महिलाओं में पुरुषों से अधिक हृदय रोग का खतरा होता है, क्योंकि महिलाओं के मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे रोगों की चपेट में आने के खतरे ज्यादा होते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कोरोनरी धमनियां संकरी होती हैं। इसी वजह से उन्हें धमनियों में अवरोध आने की समस्या अधिक होती है।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एकमात्र लाभ एस्ट्रोजेन हार्मोन के रूप में मिलता है। जो महिलाओं के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ऊपर उठाता है तथा खराब कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करता है। लेकिन रजोनिवृति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर घट जाता है और इसलिए इससे मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो जाती है और रजोनिवृति के दस साल बाद महिलाओं को हृदय रोग का खतरा पुरुषों के बराबर और कई मामलों में अधिक होता है।
इस बीमारी की चपेट में आने वाली ज्यादातर महिलायें साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की होती हैं। इस आयु में आकर धमनियों में खून के थक्के यानी कोलेस्ट्रोल का जमाव, जिससे धमनियों के बंद हो जाने के कारण उचित रक्त का संचार नहीं होता है। इससे छाती में दर्द और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। सबसे पहले प्रत्येक महिला को अपनी ब्लड कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। महिलाओं में इस रोग के लक्षण पुरुषों से भिन्न होते हैं। महिलाओं में हृदय रोग के इलाज के उपायों के बारे में जानें-

सर्जरी

संभव है महिलाओं को हृदय रोग से बचने के लिए सर्जरी की मदद लेनी पड़े। इसके लिए एन्जियोप्लास्टी व सीएबीजी का प्रयोग किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों व शारीरिक जांच के बाद ही चिकित्सा की प्रक्रिया और प्रकार के बारे में कोई निर्णय लेगा।
एंजियोप्लास्टी- एंजियोप्लास्टी एक नॉनसर्जिकल प्रक्रिया है जिसे संकरी व ब्लॉक कोरोनरी धमनियों को खोलने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। एंजियोप्लास्टी हृदय में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।
ग्राफ्टिंग कोरोनरी धमनी बाईपास- यह एक प्रकार की सर्जरी है जिसमें ब्लॉक व संकरी धमनियों या नसों को शरीर से अलग कर दिया जाता है। इससे हृदय में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। इस सर्जरी के बाद हृदय रोग से निपटने में मदद मिलती है।

जीवनशैली में बदलाव 

व्यायाम करें- दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम की जरूरत है। इसके लिए एरोबिक गतिविधियां, जैसे टहलना, जॉगिंग, तैराकी, साइक्लिंग आपके हृदय के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक हफ्ते में 4 से 6 बार कार्डियो कसरत करना भी अच्छा रहता है।
मोटापा कम करें - मोटापा कई बीमारियों का कारण हो सकता है। वजन बढऩे से रक्तचाप व कोलेस्ट्रोल की समस्या हो सकती है। इसके अलावा डायबिटीज भी हो सकता है जिससे शरीर में इंसुलिन भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद नहीं करता है। टाइप-2 डायबिटीज से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान ना करें - धूम्रपान करने वाली महिला में हार्ट अटैक की संभावना धूम्रपान न करने वाली महिला से दोगुना अधिक होती है क्योंकि सिगरेट में मौजूद टॉक्सीन धमनियों को सीधा प्रभावित करते हैं। जिससे धमनियों में रक्त संचार के लिए बाधाएं पैदा हो जाती हैं। धूम्रपान से खून की नलियां चिपचिपी हो जाती हैं, जिससे रक्त संचार में अधिक कठिनाई के कारण स्ट्रोक की संभावना बनी रहती है। हृदय रोग से बचाव के लिए महिलाओं को अपना खास ख्याल रखना चाहिए साथ ही रजोनिवृत्ति के बाद कुछ जरूरी जांच अवश्य कराएं जिससे आप हृदय रोग के खतरों से बच सकती हैं।

उच्च रक्तचाप समय पर करें नियंत्रित


एक सर्वेक्षण के अनुसार, हर चार में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप से प्रभावित है। भारत में शहरी लोगों में उच्च रक्तचाप 25 प्रश व गाँवों में 10 प्रश पाया गया है।
हृ दय द्वारा सारे शरीर को रक्त वाहिनियों के माध्यम से दबाव की क्रिया से रक्त भेजने से पैदा हुए दबाव को रक्तचाप कहते हैं। एक स्वस्थ मनुष्य का रक्तचाप 120 एमएमएचजी सिस्टोलीक व 80 एमएमएचजी डाईस्टोलिक होता है। मोटापा, तनाव, धूम्रपान, मद्यपान, वंशानुगत आदि उच्च रक्तचाप के कारण हो सकते हैं। इसका पूर्ण निवारण नहीं है, परंतु इसको नियंत्रित किया जा सकता है।
संतुलित आहार जैसे गेहूँ, चावल, हरी सब्जियाँ, ताजे फल, मछली तथा संतुलित मात्रा में नमक का सेवन, व्यायाम तथा अपने चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाइयाँ लेकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ध्यान रहे, पंगु होकर दूसरों पर आश्रित न रहना पड़े, इसलिए यदि रक्त दाब सामान्य रखने के लिए दवा की जरूरत हो तो नियमित लें। उच्च रक्तचाप का इलाज आसान और संभव है।

निम्न रक्तचाप : कारण, बचाव और इलाज

हमारे गलत खान पान  और रहन सहन के कारण हम लोग लो ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं। आज हम इसी विषय पर विस्तृत चर्चा करते हैं। हमारे दिल से सारे शरीर को साफ खून की सप्लाई लगातार होती रहती है। अलग-अलग अंगों को होने वाली यह सप्लाई आर्टरीज (धमनियों) के जरिए होती है। ब्लड को प्रेशर से सारे शरीर तक पहुंचाने के लिए दिल लगातार सिकुड़ता और वापस नॉर्मल होता रहता है - एक मिनट में आमतौर पर 60 से 70 बार। जब दिल सिकुड़ता है तो खून अधिकतम दबाव के साथ आर्टरीज में जाता है। इसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। जब दिल सिकुडऩे के बाद वापस अपनी नॉर्मल स्थिति में आता है तो खून का दबाव आर्टरीज में तो बना रहता है, पर वह न्यूनतम होता है। इसे डायस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। इन दोनों मापों-डायस्टोलिक और सिस्टोलिक को ब्लड प्रेशर कहते हैं। ब्लड प्रेशर दिन भर एक-सा नहीं रहता। जब हम सोकर उठते हैं तो अमूमन यह कम होता है। जब हम शारीरिक मेहनत का कुछ काम करते हैं जैसे तेज चलना, दौडऩा या टेंशन, तो यह बढ़ जाता है। बीपी मिलीमीटर्स ऑफ मरकरी (एमएमएचजी) में नापा जाता है।
दरअसल निम्न रक्तचाप में रक्त का प्रवाह बहुत धीमा पड़ जाता है अर्थात् ऊपर का रक्तचाप सामान्य से घटकर 90 अथवा 100 रह जाए तथा नीचे का रक्तचाप 80 से घटकर 60 रह जाए, ऐसी स्थिति को निम्न रक्तचाप कहते है। दौर्बल्य, उपवास, भोजन तथा जल की कमी, अधिक शारीरिक तथा मानसिक परिश्रम, मानसिक आघात तथा अधिक रक्त बहने की दशा में यह रोग हो जाता है। निम्न रक्तचाप में नब्ज धीमी पड़ जाती है, थोड़ा सा परिश्रम करने पर रोगी थक जाता है। शरीर का दुर्बल होना, आलस्य, अनुत्साह, शक्ति का घटते जाना, बातें भूल जाना, मस्तिष्क अवसाद, विस्मृति, थोड़ी सी मेहनत में ही चिड़चिड़ाहट, सिर दर्द, सिर चकराना आदि इसके लक्षण होते है।

प्रमुख कारण

  • अधिक मानसिक चिंतन
  • अधिक शोक
  • अधिक क्रोध
  • आहार का असंतुलन होना
  • बहुत अधिक मोटापा
  • पानी या खून की कमी
  • उलटियां, डेंगू-मलेरिया, हार्ट प्रॉब्लम, सदमे, इन्फेक्शन, ज्यादा मोशन आदि
  • अचानक सदमा लगना, कोई भयावह दृश्य देखने या सुनने से भी लो बीपी हो सकता है।

प्रमुख लक्षण

  • चेहरे पर फीकापन।
  • आंखों का लाल हो जाना।
  • नाड़ी की गति धीमी होना।
  • प्यास लगना और तेज रफ्तार से आधी-अधूरी सांसें आना।
  • निराशा या डिप्रेशन
  • धुंधला दिखाई देना
  • थकान, कमजोरी, चक्कर आना

खानपान

  • पालक, मेथी, घीया, टिंडा व हरी सब्जियां लें
  • अनार, अमरूद, सेब, केला व अंगूर खाएं
  • कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ न हो तो थोड़ा-बहुत घी, मक्खन व मलाई खाएं
  • केसर, दही, दूध और दूध से बने पदार्थ खाएं
  • सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। 
  • सेब, गाजर या बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाएं।
  • अधिक पानी पीना चाहिए। कम से कम डेढ़ से दो लीटर पानी जरूर पीएं
  • तुलसी, काली मिर्च, लौग और इलायची की चाय बनाकर पीएं। मात्रा सबकी एक-एक ग्राम
  • राई तथा सौठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर पानी में मिलाएं और पैर के तलवों पर लगाएं। 
  • प्रतिदिन सब्जी में लहसून का छौक (तड़का) लेने से निम्न रक्तचाप में तत्काल लाभ होता है।
  • देशी गुड़ हर रोज 50 ग्राम की मात्रा में खाएं।
  • सेब, पपीता, अंजीर, आम आदि का अधिक सेवन करें।
  • प्रतिदिन गाजर के एक गिलास रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीएं। इसे 30 दिनों तक करें।
  • पुदीने की चटनी या रस में सेंधा नमक, काली मिर्च, किशमिश डालकर सेवन करें।

Sunday, 7 September 2014

हृदय के रोगों का कुदरती, घरेलू पदार्थों से ईलाज


माडर्न मेडीसिन में हृदय रोगों के लिये अनेकों दवाएं अविष्कृत हो चुकी हैं। लेकिन कुदरती घरेलू पदार्थों का उपयोग कर हम दिल संबधी रोगों का सरलता से समाधान कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात है कि ये उपचार आधुनिक चिकित्सा के साथ लेने में भी कोई हानि नहीं है।
  • लहसुन में एन्टिआक्सीडेन्ट तत्व होते है और हृदय रोगों में आशातीत लाभकारी घरेलू पदार्थ है।लहसुन में खून को पतला रखने का गुण होता है । इसके नियमित उपयोग से  खून की नलियों में कोलेस्टरोल नहीं जमता है। हृदय रोगों से निजात पाने में लहसुन की उपयोगिता कई वैज्ञानिक शोधों में प्रमाणित हो चुकी है। लहसुन की 4 कली चाकू से बारीक काटें,इसे 75 ग्राम दूध में उबालें। मामूली गरम हालत में पी जाएं। भोजन पदार्थों में भी लहसून प्रचुरता से इस्तेमाल करें।
  • अंगूर हृदय रोगों में उपकारी है। जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक का दौरा पड चुका हो उसे कुछ दिनों तक केवल अंगूर के रस  के आहार पर रखने के अच्छे परिणाम आते हैं।इसका उपयोग हृदय की बढी हुई धडकन को नियंत्रित करने में सफ़लतापूर्वक किया जा सकता है। हृदयशूल में भी लाभकारी है।
  • शकरकंद भूनकर खाना हृदय को सुरक्षित रखने में उपयोगी है। इसमें हृदय को पोषण देने वाले तत्व पाये जाते हैं। जब तक बाजार में शकरकंद उपलब्ध रहें उचित मात्रा में उपयोग करते रहना चाहिये।
  • आंवला विटामिन सी का कुदरती स्रोत है। अत: यह सभी प्रकार के दिल के रोगों में प्रयोजनीय है।
  • सेवफ़ल कमजोर हृदय वालों के लिये बेहद लाभकारी फ़ल है। सीजन में सेवफ़ल  प्रचुरता से उपयोग करें।
  • प्याज हृदय रोगों में हितकारी है। रोज सुबह 5 मिली. प्याज का रस खाली पेट सेवन करना चाहिये। इससे खून में बढे हुए कोलेस्टरोल को नियंत्रित करने भी मदद मिलती है।
  • हृदय रोगियों के लिये धूम्रपान बेहद नुकसानदेह साबित हुआ है। धूम्र पान करने वालों को हृदय रोग होने की दूगनी संभावना रहती है।
  • जेतून का तैल हृदय रोगियों में परम हितकारी सिद्ध हुआ है। भोजन बनाने में अन्य तैलों की बजाय ओलिव आईल का ही इस्तेमाल करना चाहिये। ओलिव आईल के प्रयोग से खून में अच्छी क्वालिटी का कोलेस्टरोल(हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) बढता है।
  • निंबू हृदय रोगों में उपकारी फ़ल है। यह नलिकाओं में कोलेस्टरोल नहीं जमने देता है। एक गिलास मामूली गरम जल में एक निंबू निचोडें, इसमें दो चम्मच शहद भी मिलाएं और पी जाएं। यह प्रयोग सुबह के वक्त  करना चाहिये।
  • रात को सोने से पहिले मामूली गरम जल के टब में गले तक डूबना  हृदय रोगियों के लिये हितकारी बताया गया है। 10-15 मिनिट टब में बैठना चाहिये। यह प्रयोग हफ़्ते में दो बार करना कर्तव्य है।
  • विटामिन ई हृदय रोगों में उपकारी है। यह हार्ट अटैक से बचाने वाला विटामिन है। इससे हमारे शरीर की रक्त कोषिकाओं में पर्याप्त आक्सीजन का संचार होता है।

खाद्य पदार्थ जो बचाए हृदय रोग से


दिल की बीमारी एक ऐसी खतरनाक समस्या है जो लोगों में एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। आजकल प्रोफेशनल लाइफ में इतनी टेंशन है कि कम उम्र वाले लोगो को भी हृदय संबधी रोग हो रहे हैं। तनावग्रस्त होकर काम करते रहना और अपनी डाइट पर ध्यान न देने की वजह से यह रोग आम हो गया है।
वसा मुक्त भोजन का उपभोग करने का निर्णय ही दिल के रोगों को रोकने का एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कई फूड हैं जिनका सेवन करने से आप हृदय रोग से मुक्त हो सकते हैं। रेड वाइन,कॉफी, चाय, ओटमील, अलसी का बीज, अखरोट, बादाम, टोफू और ना जाने ही कितने सारे खाघ पदार्थ हैं, जिसे खा कर आप हृदय रोग से मुक्त हो सकते हैं। यह तो हम जानते ही हैं कि शराब पीना हमारे लिए अस्वास्थकर है, पर क्या आप जानते हैं कि यह एक पुराना मिथक है। जिसे 1992 का फ्रेंच विरोधाभास सिद्धांत माना गया है। इसमें इस बात को गलत साबित किया गया है कि रेड वाइन का प्रयोग स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है। बल्कि इसमें तो यह बताया गया है कि यह भोजन के माध्यम से सेवन किए गए वसा को पूरी तरह से विसर्जित करने में लाभदायक होता है। आइये जानते हैं कि कौन से ऐसे फूड हैं जो आपको हृदय रोग से बचा सकते हैं। तो जऱा गौर कीजियेगा-

ब्लैक बींस

इनमें फोलेट, एंटीऑक्सीडेंट, मैगनीशियम और खूब सारा फाइबर होता है जो कि दोनों ही कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है।

रेड वाइन

कई हृदय रोग तभी होते हैं जब हृदय तक जाने वाली धमनियों को वसा और बुरा कोलेस्ट्रॉल मिल कर उसके रक्त प्रवाह को ब्लॉक कर देते हैं। यह रक्त वाहिकाओं को साफ करने और शरीर में वसा जमने की वजह से होने वाले नुकसान को रोकने में लाभदायक होता है। महिलाओं को रोज एक गिलास और पुरुषों को दो गिलास से ज्यादा नहीं पीना चाहिये।

टोफू

पनीर की जगह पर टोफू खाना शुरु करें क्योंकि इसमें मिनरल, फाइबर और पॉलीसैच्युरेटेड फैट्स होते हैं जिससे धमनियां खराब वसा के कारण ब्लॉक नहीं होती। टोफू को सूप में डाल कर बनाएं, इससे आपको प्रोटीन भी मिलेगा।

कॉफी

जो लोग दिन में 2 से 4 बार कॉफी या चाय पीते हैं उनको हृदय रोग घटने का चांस होता है, पर जिन्हें मधुमेह है, उनको इसका सेवन कम करना चाहिये। ब्लैक कॉफी ज्यादा फायदेमंद होती है। चाहे ब्लैक टी हो या फिर ग्रीन टी हृदय रोग में सहायक होती हैं।

साल्मन

यह एक खाने योग्य मछली है जिसमें ओमेगा-3 ईपीए और डीएचके भरा पड़ा होता है। ओमेगा 3 ब्लड प्रेशर को कम करता है। यह ब्लड ट्राईग्लीसराइड और सूजन को कम करता है। हृदय रोग से पीडित इंसान को हफ्ते में 2 बार मछली खानी ही चाहिये।

ऑलिव ऑयल

जैतून के तेल में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जिसे पॉलीफिनॉल तथा स्वास्थ्य वर्धक मोनोसैच्युरेडेट फैट होता है। इस तेल को खाने से खून की धमनियों से अच्छी तरह से खून पास होता है।

अखरोट

रोजाना मुठ्ठी भर अखरोट खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और हृदय की धमनियों में सूजन कम होती है। इसमें ओमेगा-3, मोनोसैच्युरेटेड फैट और रेशा पाया जाता है। आप अखरोट का तेल भी प्रयोग कर सकते हैं क्योंकि उसमें ओमेगा-3 होता है।

बादाम

रोजाना एक मुठ्ठी बादाम खाने से आपको फाइबर और दिल को हेल्दी फैट मिलेगा। यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम कर के मधुमेह का रिस्क भी कम करते हैं।

ओटमील

एक गरम ओटमील का बाउल सुबह नाश्ते में खाने से कई घंटो तक पेट भरा रहता है और यह ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन कर के रखता है। इसे खाने से मधुमेह की बीमारी भी दूर रहती है।

अलसी

इसमें फाइबर, फोटोकैमिकल और एएलए जो कि ओमेगा- 3 फैटी एसिड होता है, पाया जाता है। यह दिल के लिये बहुत ही अच्छा है। इसे भून कर खा सकते हैं।

जौ

चावल की जगह पर जौ की रोटी खाना शुरु कर दें। इसमें मौजूद फाइबर, कोलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड ग्लूकोज लेवल को सामान्य बनाए रखता है।

संतरा

इसमें पोटैशियम होने की वजह से यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। साथ ही इसमें फाइबर भी होता है।

कॉफी

जो लोग दिन में 2 से 4 बार कॉफी या चाय पीते हैं उनको हृदय रोग घटने का चांस होता है, पर जिन्हें मधुमेह है, उनको इसका सेवन कम करना चाहिये। ब्लैक कॉफी ज्यादा फायदेमंद होती है। चाहे ब्लैक टी हो या फिर ग्रीन टी हृदय रोग में सहायक होती हैं।

गाजर

रिसर्च के मुताबिक यह आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है तथा मधुमेह के रिस्क को भी कम करता है। इसमें घुलन शील रेशा होने के नाते इसको कोलेस्ट्रॉल से लडऩे वाला टॉप का फूड बताया गया है।

चैरी

चैरी में लाल रंग डालता है वही मानव शरीर में यूरिक एसिड को कम करने में सहायक भी होता है। खून में बढा हुआ यूरिक एसिड हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मुठ्ठी भर चैरी, चाहे सूखी हो या फिर ताजी खाने से दिल मजबूत रहेगा।

शकरकन्द

इसमें फाइबर, विटामिन ए और लाइकोपीन होता है जो कि दिल के लिये पूरी तरह से सेफ है। शकरकंद खाने से ब्लड शुगर नहीं बढता साथ में इसे सफेद आलू की जगह पर खा सकते हैं।