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Wednesday, 15 July 2015

क्या आपको मालूम है कैसे होता है कब्ज


अक्सर आपकी सुबह कब्ज की समस्या से गुजरती है क्या आप सुबह देर तक वॉशरूम में बैठे रहते हैं अगर हां, तो अब देर ना करें और अपनी इस दशा का तुरंत निदान करें। कब्ज होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसके बारे में कई लोग अंजान हैं। कब्ज से छुटकारा पाने के  घरेलू उपचार आपको कब्ज, शरीर में कमजोरी, हाईपोथायराइड या सही मात्रा में पानी ना पीने, आदि के कारण सकता है। कब्ज की समस्या दवाइयां खाने के कारण भी हो सकती है। एक बार अगर कब्ज होने का कारण पता चल जाए, तो आप इसका सही से निदान करना भी सीख जाएंगे।
आइये जानते हैं कि कब्ज की समस्या के पीछे आखिर कौन-कौन से कारण छिपे हुए हैं कब्ज के पीछे छिपे हैं ये अजीब कारण पेनकिलर एस्पिरिन और आइब्रूफेन दो ऐसी पेनकिलर्स हैं, जो व्यस्कों में कब्ज पैदा करने के लिये जानी जाती हैं। ऐसे रोगी जो किसी कारणवश इन दवाओं का सेवन कर रहे हैं, उन्हें दिनभर में खूब सारा पानी पीना चाहिये।
  • हाइपोथायराइडिज्म जिनकी थायराइड ग्रंथी ठीक से काम नहीं करती, उनका मेटाबॉलिज्म कमज़ोर हो जाता है। यह पेट पर भी लागू होता है। इस तरह से खाया गया खाना बडी ही देरी से पचता है और कब्ज हो जाता है।
  • एलर्जी कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दूध, दही और दूध से बनने वाले प्रोडक्ट हजम नहीं होते। इससे उन्हें कब्ज हो जाता है और कई बार तो उन्हें डायरिया भी हो जाता है।
  • व्यायाम में कमी व्यायाम करने से शरीर में मल को निकालने वाला पदार्थ जिसे हम म्यूकस कहते हैं, वह बनता है। लेकिन जब हम व्यायाम नहीं करते हैं या फिर हमारी लाइफस्टाइल में किसी भी प्रकार की दौड भाग नहीं रहती, तो यह बनना बंद हो जाता है, जिससे कब्ज हो जाता है।
  • विटामिन अच्छी सेहत के लिये हम सभी विटामिन का सेवन करते हैं। पर जब यह विटामिन हमारे शरीर में रिएक्ट करने लगे तो कब्ज जैसी समस्या पैदा हो जाती है। हर विटामिन रिएक्शन नहीं पैदा करते। लेकिन कैल्शियम और आयरन कभी-कभी सूट नहीं करते।
  • टॉयलेट को कंट्रोल करने से कई लोगों की आदत होती है कि वह पब्लिक टॉयलेट में जाना पसंद नहीं करते। ऐसा कई बार करने से कब्ज की समस्या पैदा होती है।
  • डिप्रेशन लेने से भी कब्ज होता, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। जब तनावपूर्ण फीलिंग पैदा होती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म कमजोर पड़ जाता है।
  • एंटासिड सीने में जलन पैदा होने पर अगर आप एंटासिड खाते हैं, तो भी कब्ज हो सकता है। क्योंकि इस दवाई में कैल्शियम और एल्यूमीनियम के घटक होते हैं।
  • पानी की कमी पानी ना पीना भी कब्ज की बीमारी पैदा करता है। अगर आपकी समस्या बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है, तो आप गरम पानी का सेवन करें।
  • गर्भावस्था अगर आप गर्भवती हैं तो आप को कई दिनों तक कब्ज की समस्या रह सकती है। आप को इसका इलाज चिकित्सक की देखरेख करवाना चाहिए।

Monday, 13 July 2015

बच्चों में बढ़ती कब्ज़ की समस्या कारण और निवारण


स्वस्थ शरीर भगवान की अनुपम भेंट हे स्वस्थ पाचन तत्रं हमारे स्वास्थ का अभिन्न् भाग है। पाचन तंत्र की समस्याओं से अनेक रोगों का जन्म होता है वर्तमान में बदलती जीवन शैली और खान-पान से हमारा स्वास्थय बहुत प्रभावीत हुआ है । विषेषकर बच्चों में इस करण से बहुत सी समस्याएंॅ जन्म ले रही है। खराब पाचन और कब्ज की समस्या बच्चों में विकराल रूप धारण करती जा रही है । प्रस्तुत है इस समस्या से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य तथा मुख्य कारण एवं निवारण ।
बच्चों में कब्ज की उम्र क्या होती है।

बच्चों में कब्ज़ दो उम्र में ज्यादा पाया जाता है

1- जन्मजात
2- ऊपर का आहर शुरू करनें के पश्चात अर्थात जब बच्चा मॉं के दूध के अतिरिक्त ऊपरी आहार लेना शुरू कर दे इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों में अव्यवस्थित शौच की आदतों के कारण भी अधिकांश बच्चों में यह समस्या जन्म लेती है ।
बच्चों कब्ज़ के मुख्य कारण क्या है।
बच्चों में कब्ज़ के मुख्य कारण इस प्रकार है ।
1- जन्म से कब्ज़/ शौच न करना: ऑतों में नसों की चाल न  होने से/ ऐसी समस्या के लिए तुरन्त शिशु शल्य चिकित्सक (अतिविशेषज्ञ) से परामर्श लेना चाहिए ।
2- जन्म के बाद बढ़ती उम्र में कब्ज़ का होना भोजन की अनियमितताओं को इंगित करता है । यह समस्या नियमित भोजन और व्यवस्थित दिनचर्या  एवं दवाईयों से ठीक हो सकती है
3- कुछ बच्चों में रीढ की हड्डी, स्नायु तंत्र एवं नसों से संबंधित रोगो के कारण भी यह समस्यां  हो सकती है ।
4- उपर्युक्त तीनों ही स्थितीयों में पीडियाट्रिक सर्जन (बच्चों के सुपरस्पेशिलिस्ट सर्जन) का परामर्श लेना नितांत आवश्यक है। जन्मजात एवं स्नायु रोग संबंधित समस्याओं को इस लेख में शामिल नहीं किया गया है।

बच्चों में कब्ज़ के क्या-क्या- लक्षण होते है ।

बच्चों में कब्ज़ की बीमारी भिन्न-2 रूप से प्रस्तुत होती है। इसका मुख्य कारण प्रतिदिन शौच न करना या 2-3 दिन के अंतर पर ही शौच क्रिया करना है। अधिकांष बच्चों में यह समस्या समय के साथ बढ़ती जाती है। और उनमें कड़ा एवं सूखा मल होना तथा शौच के दौरान रोग इत्यादि लक्षण प्राय: पाये जाते है । ये बच्चें शौच क्रिया के लिए बैठने के बजाय खडे खडे मल-त्याग करते है । कुछ बच्चेे जो कि  प्रतिदिन शौचालय जाते है परन्तु उनका कोई निश्चित समय नहीं होता वे भी कब्ज़ की श्रेणी में ही आते हैं और इनमें यह समस्या बढ़ती जाती है। अधिक समस्या होने पर शौच का रास्ता/मलद्वार बाहर भी निकलता है

वीनिंग क्या है और इसका सही तरीका क्या है।

प्रारंभिक लगभग 6 माह तक मां का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है । इसके बाद उसको मां के दूध के अतिरिक्त भी पोषण की आवष्यकता होती है  जो कि उपरी भेाजन द्वारा पूरा किया जाना चाहिए । मॉं के दूध से उपरी आहार के परिवर्तन की प्रक्रिया को वीनिंग कहते है । इसके लिए बच्चे को मॉ के दूध के अतिरिक्त दाल का पानी, उबला चावल का पानी, दलिया, खिचड़ी, आलू इत्यादी शुरू किया जाता है और धीरे- धीरे उपरी आहार की मात्रा बढ़ाते हुए मां के दूध की मात्रा को घटाया जाता है।

बच्चों को कब्ज से दूर रखने हेतु कैसा भोजन लें!

बच्चों में कब्ज से बचने के लिए भोजन का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। इसके लिए निम्नलिखित भोजन का सेवन करें।
क्या खाएं- हरी पत्तेदार सब्जी, सलाद, फल, खिचडी, दलिया, दाल-चावल, /रोटी, अंडा, केला, दूध, (उपयूक्त मात्रा में ) और पानी अच्छी मात्रा में पिएं ।
क्या न खाएं- टॉफी, चॉकलेट, बिस्किट, चिप्स इत्यादी , मैदा का सामान तली चीज़े (समोसा, कचौरी) अधिक मिर्च एवं चिकनाई,  नमकीन/मिक्चर और अत्यअधिक दूध का सेवन बिल्कुल न करें ।
कब्ज़ से बचने के लिए दिनचर्या में क्या परिवर्तन होने चाहिए ।
कब्ज़ आदि समस्याओं से बचने के लिए दिनचर्या व्यस्थित होना आवश्यक है । इसके लिए प्रतिदिन बच्चों को प्रात: एक कप गुनगुना (हल्का गर्म) दूध देकर 10 मिनट शौच के लिए अवश्य बैठायें। शौच न होने पर भी इसे छोड़ें नहीं और कम से कम 1 माह तक इसका पालन करें और भोजन में लिए परहेज़ का पालन करें । इसके अतिरिक्त बच्चों को साफ़ पानी अच्छी मात्रा में पिलाएंॅ और प्रति 2-3 घंटे में मूत्र-त्याग करनें कों कहें । बाहरी भेाजन से बचें और शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखें । बच्चें के शौच का समय प्रात: काल निश्चित करने का प्रयास करें ।

बच्चों में कब्ज़ की समस्या क्या पूर्ण रूप से ठीक हो सकती है ।

हॉ. बच्चों में कब्ज़ की समस्या  का निवारण पूर्ण रूप  से किया जा सकता है परन्तु उसके लिए उचित चिकित्सकीय परामर्श की महती विशेषता है। योग्य शिशु शल्य चिकित्सक का परामर्श लें। भोजन में आवश्यक परिवर्तन और बच्चों की दिनचर्या को नियंमित करें तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। यदि इसका सही समय पर उपचार न हो तो समय के साथ यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है और बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर इसका विपरीत प्रभाप पड़ता है। कुछ बच्चों में इसके कारण सर्जरी भी करनी पड़ सकती है ।
नोट: जन्मजात एवं स्नायुरोग संबंधित पाचन तंत्र समस्याओं को इस आलेख में शामिल नहीं किया गया है। इसके लिए पीडियाट्रिक सर्जन से मिल कर परार्मश लेना उचित है ।