Monday, 19 June 2017

आँखों के लिए बेहतरीन व्यायाम



त्वचा की तरह ही चमकती हुई स्वच्छ आखें भी अच्छे स्वास्थ्य की पहचान है। अगर आपकी सेहत खऱाब चल रही हो या आप भावनात्मक या शारीरिक रूप से दुखी महसूस कर रहे हों तो आपकी आंखें सुस्त और तनाव में नजऱ आने लगती हैं। कभी-न-कभी हर किसी की आंखों में तनाव होने की शिकायत होती है। इसके प्रमुख कारण प्रदूषण, कम रोशनी, देर तक कंप्यूटर पर काम करना, पोषण की कमी मानसिक तनाव आदि है। दूसरा है अपनी आंखों के बहुत नज़दीक लाकर किसी किताब या कागज़ को पढऩा। पढऩेवाली चीजें आखों से कम-से-कम दस इंच की दूरी पर रखें। खूबसूरत स्वस्थ आंखों की बुनियादी ज़रूरत है संतुलित खाना. खानपान और पोषण के अलावा आँखों की सेहत के लिए दूसरी जरुरी चीज है आँखों के लिए व्यायाम रोज़ाना सिर्फ कुछ मिनट हल्की फुलकी एक्सरसाइज करने से आँखों की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं और छोटी मोटी बीमारियाँ भी ठीक हो जाती है।
दूसरे महायुद्ध के ठीक बाद बेल्जियम के हज़ारों किसानों को एक अलग तरह की रतौंधी होने लगी। सर्दियां चल रही थीं इसलिए लोगो को भोजन में ताज़ा फल सब्जियां नहीं मिल रही थीं। डॉक्टर हैरान थे, क्योंकि उन पर न तो दवाइयों और न ही किसी इलाज का कोई असर हो रहा था। फिर बसंत ऋतु आई और भूखे किसानों को पेड़ो की हरी कलियां, हरी भरी फल सब्जियां और अन्य खाने पीने की वस्तुए भरपूर मात्रा में मिलने लगी जिससे उनकी रतौंधी गायब हो गई। यह पोषण की ज़बर्दस्त जीत थी।  विटामिन-ए आखों के लिए मुख्य विटामिन है। यह मक्खन, सलाद, टमाटर, पनीर, दूध, शलजम के पत्तों और गाजर के रस में पाया जाता है जो आंखों को सुस्ती व थकावट से बचाता है।

भुजांगासन

भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर के अगले भाग को कोबरा के फन के तरह उठाया जाता है। भुजंगासन की जितनी भी फायदे गिनाए जाएं कम है। भुजंगासन का महत्व कुछ ज्यादा ही है क्योंकि यह सिर से लेकर पैर की अंगुलियों तक फायदा पहुंचाता है। अगर आप इसके विधि को जान जाएं तो आप सोच भी नही सकते यह शरीर को कितना फायदा पहुँचा सकता है। लेकिन करते समय आपको इसकी सावधानियां के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।
भुजंगासन कैसे करें
आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं। दोनों पैरों के बीच की दुरी को कम करें और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें। अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं। ध्यान रहे की कमर पर ज्यादा खिंचाव न आये। अपने हिसाब से इस आसान को बनाए रखें। योगाभ्यास को धारण करते समय धीरे धीरे स्वाँस लें और धीरे धीरे स्वाँस छोड़े। जब अपनी पहली अवस्था में आना हो तो गहरी स्वाँस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं। इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ। शुरुवाती दौर में इसे 3 से 4 बार करें। धीरे धीरे योग का धारण समय एवं चक्र की नंबर को बढ़ाएं।

सर्वांगासन

सर्वांगासन व्यायाम करने के लिए सबसे पहले एक सहज पोजीशन में बैठ जाए, जिससे आपका दिमाग और शरीर रिलैक्स महसूस कर सके। फिटनेस एक्सपर्ट के अनुसार टांगो को सीधा रखते हुए मेट पर लेट जाए और रिलैक्स करें। इसके बाद अपनी दोनों टांगो को ऊपर कि तरफ नब्बे डिग्री तक ले जाए और फिर टांगो को स्ट्रेच करते हुए जितना हो सके हिप्स के सहारे ऊपर तक ले जाए। आँखें बंद कर ले और घुटनो को मोड़ते हुए नीचे लाये और थोड़ी देर आराम करें। इसके बाद धीरे-धीरे बैठ जाए।

पलकें झपकाना

योग में आँखों के लिए छोटी-छोटी एक्सरसाइज बताई गई है जो बहुत ही असरदार है। जिसको हम सूक्ष्म व्यायाम कहते है। इसमें सबसे पहले आँखों के लिए पलकें झपकाना होता है। धीरे-धीरे आँखें को झपकाना होता है। फिर इसके बाद मूवमेंट को तेज करते जाते है। इसके बाद अपनी आँखों को कुछ सेकंड के लिए बंद करते है और फिर धीरे-धीरे खोलते है। पंद्रह से बीस बार इसको करना है हर बार यह व्यायाम करने के बाद आँखों को कुछ देर के लिए बंद रखना है।

Monday, 10 April 2017

असाध्य को साध्य बनाती होम्योपैथी



आजकल मॉडर्न मेडिसिन हर तरह की बीमारियों के लिए टेंशन को प्रमुख कारण बताती जा रही है जबकि होम्योपैथी में सभी प्रकार की बीमारियों के लिए शारीरिक के साथ-साथ मानसिक कारणों को पूर्व में ही प्रमुखता दी जा चुकी है। इसी प्रकार कैंसर के उत्पत्ति के वास्तविक कारणों की अगर चर्चा करें तो आज भी ज्ञात नहीं हो सका है। हो सकता है कि कैंसर की उत्पत्ति सिगरेट, शराब पीने, तम्बाकु, गुटके के सेवन या अनुवांशिक कारणों को माना जाता है परन्तु किसी को लगी गहरी चोट, शोक, दुख, चिंता, काम धंधे में आर्थिक हानि इत्यादि मानसिक कारणों को भी भुलाया नहीं जा सकता। होम्योपैथी में दो तरह के लक्षणों को प्रमुखता दी गई है एक तो सब्जेक्टिव लक्षण जिसे मरीज तथा उसके रिश्तेदार या उसकी शारीरिक जांच रिपोट्र्स बताते है तथा दूसरा ऑब्जेक्टिव लक्षण जिसे होम्योपैथी चिकित्सा स्वयं अनुभव करता है।
होम्योपैथिक इलाज केवल सर्दी-खंसी, बुखार अथवा त्वचा रोगों तक सीमित न रहकर निरंतर होते जा रहे अनुसंधान की बदौलत ऐसी कई असाध्य बीमारियों जैसे- कैंसर, डायबिटीज, गठिया, अस्थमा, सोरायसिस, स्पॉंइिडलाटिस्ट, टॉन्सिलाइटिस्ट, साइनोसाइटिस्ट, पथरी, प्रोस्टेट इत्यादि कई असाध्य बीमारियों के लिए साध्य बनती जा रही है। यदि यहां कैंसर के मरीजों की बात करें तो उनकी ही भाषा में कैंसर के मरीज को उसका चिकित्सक जैसा कहता है वैसा वे कराते जाते हैं। ऑपरेशन का बोलते है तो ऑपरेशन करा लेते हैं, कीमोथेरेपी का बोलते है तो कीमोथेरैपी करा लेते हैं, रेडियोथेरैपी का बोलते है तो रेडियोथेरैपी करा लेते है फिर भी कैंसर से छुटकारा मिलना असंभव सा प्रतीत होता है या शरीर के एक स्थान से दूसरे स्थान पर पुन: हो जाता है। ऐसे मरीज क्या करें, कहां जाएं? 
जब कोई राह नहीं सूझती, हर तरह के इंजेक्शन, ऑपरेशन नाकाम साबित हो जाते हैं तब लोगों को होम्योपैथी की याद आती है। जब सभी प्रकार की प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों से आशानुरूप परिणाम लोगों को नहीं मिलता है तब एक मात्र विकल्प होम्योपैथी शेष रह जाता है। आमतौर पर होम्योपैथी डॉक्टर के पास मरीज तब पहुंचता है जब कई बार रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी और ऑपरेशन करा चुका होता है, फिर भी उसे कोई फायदा नहीं होता। लेकिन जो मरीज ऑपरेशन नहीं कराना चाहते, उनके लिए भी होम्योपैथी जीने की राह को आसान बना देती है। होम्योपैथी में कैंसर की कई ऐसी दवाइयां मौजूद हैं, (कार्सिनोसिन, हाईड्रेस्टिस, फाइटोलैका, आर्सेनिक, आर्स आयोडाइड, लाइकोपोडियम, कोनियम, फॉस्फोरस, चेलिडोनियम, मर्कसॉल, एपिस-मेल, कंडुरंगो, कैप्सिकम, केमोमिला, स्टेफिसेग्रिया इत्यादि) जो मरीज के लक्षणों, रिपोट्र्स और बीमारी की स्टेज पर तय होती हैं। होम्योपैथी दवाइयों से सूजन, दर्द और जलन को भी कम किया जा सकता है। आमतौर पर लोगों का मानना है कि कैंसर में होम्योपैथिक ट्रीटमेंट काफी धीमा इलाज है, लेकिन ऐसा है नहीं। 50 मिलिसिमल पोटेंसी की होम्योपैथिक दवाइयां जल्द आराम पहुंचाती हैं। ये न सिर्फ बीमारी को फैलने से रोकती हैं बल्कि उसके बार-बार होने की संभावना भी खत्म करती हैं लेकिन मरीज जब तक होम्योपैथ डॉक्टर तक पहुंचता है उसकी बीमारी काफी बढ चुकी रहती है इसलिए कभी-कभी समय भी लगता है।
कैंसर पर एलोपैथी ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट जैसे कि कीमोथैरेपी से कैंसर सेल के साथ शरीर के नॉर्मल सेल्स भी मरते (टूटते) हैं। रेडियोथैरेपी से असहनीय जलन होती है साथ ही कमजोरी, बाल झडऩा, बार-बार उल्टी हो जाना, खून की कमी हो जाना, भूख नहीं लगना इत्यादि ऐसी समस्याएं है जो कैंसर मरीजों में आमतौर पर देखने को मिलती है। इस तरह की सभी समस्याओं के लिए होम्योपैथी उपचार एक सरल सामाधान हो सकता है क्योंकि होम्योपैथिक ट्रीटमेंट में साइड इफेक्ट नहीं है साथ ही दवाइयां भी लेना आसान है। होम्योपैथी दवा शुगर के मरीज भी आसानी से डिस्टिल या गर्म पानी से दवाइयां ले सकते हैं। होम्योपैथी दवाइयां रेडियोथैरेपी और कीमोथैरेपी के दुष्प्रभावों को भी कम करती हैं। 
यदि इलाज को तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो कैंसर में एलोपैथी ट्रीटमेंट का खर्च बहुत ज्यादा होता है साथ ही रिस्क भी कई गुना ज्यादा होती है जबकि होम्योपैथी इलाज, एलोपैथी के एक महंगे इंजेक्शन या बडे अस्पताल में एक दिन भर्ती होने के खर्च से भी कम में पूरे हफ्ते या महीने भर की दवा ली जा सकती है।
महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर स्तन कैंसर, ग्रीव कैंसर, ओवेरियन कैंसर, गालब्लैडर कैंसर इत्यादि के साथ-साथ पुरूषों में मुख कैंसर, गले का कैंसर तथा प्रोस्टेट कैंसर प्रमुख रूप से पाया जाता है।

महिलाओं में स्तन कैंसर 

महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे सामान्य होता है। और अधिकतर महिलायें इसके लक्षणों को अनदेखा करती हैं। लेकिन, ऐसा करना कई बार उनकी जान भी ले सकता है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि वे इसके लक्षण नजर आते ही फौरन चिकित्सीय सहायता लें।

स्तन में गांठ

अगर कोई महिला अपने किसी भी एक स्तन में कोई गांठ महसूस करती है (जिसमें भले हीं कोई दर्द न हो) तो यह उस महिला में स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है। स्तन के अलावा अजीब तरह की गांठ स्तन के आस पास यानी बगल वगैरह में भी पाई जा सकती है। 

श्रोणि दर्द (पेल्विक पेन)

नाभि के नीचे होने वाले दर्द को श्रोणि दर्द कहते है। यह दर्द एंडोमेट्रियल कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, फैलोपियन ट्यूब के कैंसर और योनि के कैंसर के लक्षण को दर्शा सकता है। अत: इसकी जांच करवाएं।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द 

अगर किसी महिला की पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता हो तो इसे हल्के से नहीं लेना चाहिए और उचित जांच करवानी चाहिए। कई मामलों में यह डिम्बग्रंथि के कैंसर का एक लक्षण भी हो सकता है। 

पेट की सूजन और पेट फूला रहना

पेट की सूजन और पेट फूला फूला रहना डिम्बग्रंथि के कैंसर के आम लक्षणों में से एक है। यह एक ऐसा लक्षण है जिसे आमतौर पर महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। 

असामान्य रूप से योनि से खून का स्राव

जब महिलाओं में गाईनेकोलिक कैंसर होता है तो उनकी योनी से असामान्य रूप से खून का स्राव होता है। ये गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, गर्भाशय के कैंसर अथवा डिम्बग्रंथि के कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं।

अक्सर बुखार का रहना

बुखार जो जल्दी जाने का नाम नहीं लेता या जो लगभग 7 दिनों तक रहता हो या किसी को बार बार बुखार लगता हो और उसका कारण समझ  में नहीं आता हो तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। हालांकि अक्सर रहने वाला बुखार और भी कई दूसरी बीमारियां होने का संकेत देता है इसलिए घबराएं नहीं और अपनी जांच करवाएं।

लगातार पेट खराब रहना

यदि आपका पेट अक्सर खराब रहता है या आप अक्सर दस्त, गैस, पतले दस्त, या कब्ज के शिकार रहते हैं या आपके मल में रक्त का अंश रहता हो तो आपको किसी योग्य डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि ये कोलोन कैंसर या गाईनेकोलिक कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

योनि में उत्पन्न असामान्य बातें

अगर आपकी योनी में किसी तरह का घाव, छाला रह रहा हो या वहां की त्वचा के रंग में असामान्य परिवर्तन हो रहा हो या असामान्य स्राव होता है तो आपको योनि की किसी योग्य डॉक्टर से परिक्षण करवाना चाहिए क्योंकि ये कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

थकान

थकान कैंसर का एक आम लक्षण है। यह आमतौर पर तब होता है जब कैंसर उन्नत अवस्था में पहुंच जाता है। लेकिन यह लक्षण प्रारंभिक अवस्था में भी उभर सकता है। अगर आपको बिना काम किये या बिना परिश्रम किये बहुत ज्यादा थकान लगे या थकान जो आपको सामान्य दैनिक गतिविधियों को करने से रोके, कैंसर का लक्षण हो सकता है। कैंसर से बचने के लिए जरूरी है कि आप नियमित जांच करवाती रहें। लक्षण नजर आते ही फौरन चिकित्सीय सलाह लें। देर से आपको काफी नुकसान हो सकता है।

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर 

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर बहुत खतरनाक बीमारी है। कैंसर के 5 मरीजों में से लगभग 3 की मौत प्रोस्टेट कैंसर के कारण ही होती है। अगर प्रोस्टेट कैंसर का पता शुरुआती चरणों में ही चल जाए तो इसके उपचार में आसानी होती है। बढती उम्र, आनुवांशिक और हार्मोन से संबंधित कारणों के कारण प्रोस्टेट कैंसर होता है, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण सामान्य बीमारी या फिर मधुमेह के करीब नजर आते है। इसी वजह से आदमी को इसका पता देर से लगता है, जिसके कारण प्रोस्टेट कैंसर मौत का कारण बनता है। 
पेशाब में जलन, इन्फेक्शन/ दर्द के बाद सबसे आम समस्या है पेशाब का रूक जाना (रूकावट) या पेशाब की धार का पतली हो जाना, जिसके कई सारे कारण हो सकते है परन्तु पुरूषों में पाई जाने वाली प्रोस्टेट ग्रंथी जब बढऩे लगती है तो मूत्र मार्ग पर दबाव डालती है जिसके कारण पेशाब करने में परेशानी होने लगती है जिसके परिणाम स्वरूप बार-बार पेशाब जाने की आदत हो जाती है क्योंकि एक बार में पेशाब की थैली पूरी तरह खाली नहीं होती है और पुन: थोड़ी पेशाब बनने पर वापस थैली भरी हुई सी महसूस होने लगती है फिर से पेशाब करने पर पुन: थैली, पूरी तरह से खाली नहीं होती है, बची हुई पेशाब को पोस्ट वाइड यूरिन कहा जाता है।
प्रोस्टेट का साईज बढऩे के कारण धीरे-धीरे प्रोस्टेट कैंसर या प्रोस्टेट का एडिनोकार्सिनोमा हो सकता है। इसलिए समय रहते बीमारी को बढऩे से रोकने की आवश्यकता है। कई लोगों की यह सोच है कि पेशाब की समस्या सिर्फ प्रोस्टेट के कारण और केवल पुरुषों में ही होती है जबकि यदि आंकड़े देखें तो यह समस्या पुरुषों से ज्यादा स्त्रियों (महिलाओं) में अधिक होती है जिसका कारण महिलाओं में नीचे के भाग की बनावट प्रमुखता से जिम्मेदार है जिसके कारण उन्हें बार-बार इंफेक्शन होता रहता है।
कई बार कोई ऑपरेशन या इंफेक्शन के बाद या दवाईयों के अत्याधिक प्रयोग के कारण भी पेशाब में जलन/दर्द अथवा रूकावट जैसी समस्या हो सकती है। प्रोस्टेट होने के असली कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है लेकिन कुछ कारण हैं जो कैंसर के इस प्रकार के लिए जोखिम कारक हैं जैसे धूम्रपान, मोटापा, सेक्स के दौरान फैला वायरस या फिर शारीरिक शिथिलता यानी की व्यायाम न करना प्रोस्टेट कैंसर का कारण हो सकता है। यदि परिवार में किसी को पहले भी प्रोस्टेट कैंसर हुआ है तो भी इस कैंसर के होने का जोखिम बना रहता है। ज्यादा वसायुक्त मांस खाना भी प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकता है। 

Tuesday, 21 June 2016

रोज करें योग


योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है।
व्य क्ति आजकल मानसिक तनावों से परेशान रहता है जिसकी वजह से वो अपना आनंद और संतोष खो देता है और इधर उधर भटकता रहता है. ऐसे व्यक्ति शांति को महसूस करने के लिए उतावले रहते है, साथ ही ऐसे व्यक्ति अपने जीवन से स्वार्थ, क्रोध, कटुता, इष्र्या और घृणा आदि के कांटो को दूर कर देना चाहते है। इसके लिए उनके पास सबसे अच्छा माध्यम है, योग। ये मार्ग व्यक्ति को दृढ़, बुद्धि में प्रखर और पुरुषार्थ को उत्तम बनता है। साथ ही ये उसे वो सुख देता है जिसकी तलाश में वो भटकता फिरता है. योगा एक ऐसी वैज्ञानिक प्रमाणिक व्यायाम पद्धति है। जिसके लिए न तो ज्यादा साधनों की जरुरत होती हैं और न ही अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए पिछले कुछ सालों से योगा की लोकप्रियता और इसके नियमित अभ्यास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि योगा करने के क्या लाभ है...
  • योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं।
  • आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोडऩे और ऐंठने वाली क्रियाएं करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियाएं भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्व है।
  • योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है।
  • योगासनों द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बडिय़ां उत्पन्न नहीं होतीं।
  • योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं।
  • योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है।
  • योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं। वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं।
  • योगासनों से बुद्धि की वृद्धि होती है और धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी मिलती है। ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्म-सुधार के प्रयत्न बढ़ जाते हैं।
  • योगासन स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है।
  • योगासन श्वास- क्रिया का नियमन करते हैं, दिल और फेफड़ों को बल देते हैं, रक्त को शुद्ध करते हैं और मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को बढ़ाते हैं।
  • योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान स्वरूप हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है, और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं।
  • आसन रोग विकारों को नष्ट करते हैं, रोगों से रक्षा करते हैं, शरीर को निरोग, स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए रखते हैं।
  • आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
  • इससे शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, जिससे शरीर स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है।

Saturday, 18 June 2016

जीवन जीने की कला है योग



आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अनेक ऐसे पल हैं जो हमारी स्पीड पर ब्रेक लगा देते हैं। हमारे आस-पास ऐसे अनेक कारण विद्यमान हैं जो तनाव, थकान तथा चिड़चिड़ाहट को जन्म देते हैं, जिससे हमारी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो जाती है। ऐसे में जिंदगी को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बनाये रखने के लिये योग एक ऐसी रामबाण दवा है जो, माइंड को कूल तथा बॉडी को फिट रखता है। योग से जीवन की गति को एक संगीतमय रफ्तार मिल जाती है।

योग हमारी भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम पहचान है। संसार की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद में कई स्थानों पर यौगिक क्रियाओं के विषय में उल्लेख मिलता है। भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारम्भ माना जाता है। बाद में कृष्ण, महावीर और बुद्ध ने इसे अपनी तरह से विस्तार दिया। इसके पश्चात पतंजली ने इसे सुव्यवस्थित रूप दिया।
पतंजली योग दर्शन के अनुसार-  योगश्चित्तवृत्त निरोध:
अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।
योग धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक सीधा विज्ञान है जीवन जीने की एक कला है योग। योग शब्द के दो अर्थ हैं और दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
पहला है- जोड़ और दूसरा है- समाधि।
जब तक हम स्वयं से नहीं जुड़ते, समाधि तक पहुँचना कठिन होगा अर्थात जीवन में सफलता की समाधि पर परचम लहराने के लिये तन, मन और आत्मा का स्वस्थ होना अति आवश्यक है और ये मार्ग और भी सुगम हो सकता है, यदि हम योग को अपने जीवन का हिस्सा बना लें। योग विश्वास करना नहीं सिखाता और न ही संदेह करना और विश्वास तथा संदेह के बीच की अवस्था संशय के तो योग बिलकुल ही खिलाफ है। योग कहता है कि आपमें जानने की क्षमता है, इसका उपयोग करो।
अनेक सकारात्मक ऊर्जा लिये योग का गीता में भी विशेष स्थान है। भगवद्गीता के अनुसार -
सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते
अर्थात् दु:ख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है।
महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग का व्यवहार किया है। योगाभ्यास का प्रामाणिक चित्रण लगभग 3000 ई.पू. सिन्धु घाटी सभ्यता के समय की मोहरों और मूर्तियों में मिलता है। योग का प्रामाणिक ग्रंथ 'योग सूत्रÓ 200 ई.पू. योग पर लिखा गया पहला सुव्यवस्थित ग्रंथ है।

ओशो के अनुसार, 'योग धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक सीधा प्रायोगिक विज्ञान है। योग जीवन जीने की कला है। योग एक पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। एक पूर्ण मार्ग है-राजपथ। दरअसल धर्म लोगों को खूँटे से बाँधता है और योग सभी तरह के खूँटों से मुक्ति का मार्ग बताता है।

प्राचीन जीवन पद्धति लिये योग, आज के परिवेश में हमारे जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना सकते हैं। आज के प्रदूषित वातावरण में योग एक ऐसी औषधि है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, बल्कि योग के अनेक आसन जैसे कि, शवासन हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है, जीवन के लिये संजीवनी है कपालभाति प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करता है, वक्रासन हमें अनेक बीमारियों से बचाता है। आज कंप्यूटर की दुनिया में दिनभर उसके सामने बैठ-बैठे काम करने से अनेक लोगों को कमर दर्द एवं गर्दन दर्द की शिकायत एक आम बात हो गई है, ऐसे में शलभासन तथा तङासन हमें दर्द निवारक दवा से मुक्ति दिलाता है। पवनमुक्तासन अपने नाम के अनुरूप पेट से गैस की समस्या को दूर करता है। गठिया की समस्या को मेरूदंडासन दूर करता है। योग में ऐसे अनेक आसन हैं जिनको जीवन में अपनाने से कई बीमारियां समाप्त हो जाती हैं और खतरनाक बीमारियों का असर भी कम हो जाता है। 24 घंटे में से महज कुछ मिनट का ही प्रयोग यदि योग में उपयोग करते हैं तो अपनी सेहत को हम चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं। फिट रहने के साथ ही योग हमें पॉजिटिव एर्नजी भी देता है। योग से शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास होता है।
ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, योग हमारे लिये हर तरह से आवश्यक है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है। योग के माध्यम से आत्मिक संतुष्टि, शांति और ऊर्जावान चेतना की अनुभूति प्राप्त होती है, जिससे हमारा जीवन तनाव मुक्त तथा हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढता है। हमारे देश की ऋषि परंपरा योग को आज विश्व भी अपना रहा है।

आज जिस तरह का खान-पान और रहन-सहन हो गया है, ऐसे में हम सब योग को अपनायें और अपने भारतीय गौरव को एक स्वस्थ पैगाम से गौरवान्वित करें।
गीता में लिखा है, 'योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है।

Thursday, 2 June 2016

नशे का करें नाश


नशा कैसा भी हो, बुरा ही होता है। बर्बादी का दूसरा नाम है नशा, इसलिए जरूरी है कि इंसान नशे से दूर रहे और अगर लत लग ही जाए तो पूरी कोशिश कर इसके चंगुल से आजाद हो जाए। ऐसा करना मुश्किल जरूर है।
मानसिक स्थिति को बदल देनेवाले रसायन, जो किसी को नींद या नशे की हालत में ला दे, उन्हें नारकॉटिक्स या ड्रग्स कहा जाता है। मॉर्फिन, कोडेन, मेथाडोन, फेंटाइनाइल आदि इस कैटिगरी में आते हैं। नारकॉटिक्स पाउडर, टैबलेट और इंजेक्शन के रूप में आते हैं। ये दिमाग और आसपास के टिशू को उत्तेजित करते हैं। डॉक्टर कुछ नारकॉटिक्स का इस्तेमाल किसी मरीज को दर्द से राहत दिलाने के लिए करते हैं। लेकिन कुछ लोग इसे मजे के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो लत का रूप ले लेता है। नशा करने के लिए लोग आमतौर पर शुरुआत में कफ सिरप और भांग आदि का इस्तेमाल करते हैं और धीरे-धीरे चरस, गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर आदि लेने लगते हैं।

कैसे बनते हैं ड्रग्स

नैचरल नारकॉटिक्स ओपियम पॉपी (अफीम) के कच्चे दानों से तैयार होते हैं। मॉर्फिन, कोडेन और मेथाडोन नैचरल नारकॉटिक्स हैं। मॉर्फिन सल्फेट जैसे सिंथेटिक नारकॉटिक्स का इस्तेमाल डॉक्टर दवा के रूप में करते हैं। मांसपेशियों में असहनीय दर्द होने पर डॉक्टर इसका इंजेक्शन लगाता है। कोडेन में ओपियम पॉपी की मात्रा कम होती है। मेथाडोन में पेन किलर का गुण होता है, इसलिए हेरोइन के अडिक्ट को विकल्प के रूप में इसे दिया जाता है। यह हेरोइन लेने की इच्छा और उसे छोडऩे के बाद होने वाले बुरे असर को खत्म कर देता है।

बुरा होता है असर

  • ड्रग्स नर्वस सिस्टम को सुस्त कर देते हैं। इनके इस्तेमाल से दर्द और दूसरी समस्याएं जड़ से खत्म नहीं होतीं। बस थोड़े समय के लिए इनसे राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोग इनके आदी हो जाते हैं और उन्हें नशे की लत लग जाती है।
  • नशे के शिकार आदमी के काम करने की क्षमता कम होती जाती है। नशे के चक्कर में लोग घर-बार बेच डालते हैं और समाज से उनका नाता टूट जाता है। नशे के लिए लोग गैरकानूनी काम कर डालते हैं और जेल भी चले जाते हैं।
  • नशे के लिए कई ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जिससे उन्हें कई तरह के इन्फेक्शन हो जाते हैं। इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्शन लगाने से एचआईवी, हेपटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • नारकॉटिक्स एनोनिमस
नारकॉटिक्स एनोनिमस एक सेल्फ हेल्प ग्रुप है। ड्रग्स पर काम करने वाली सभी संस्थाओं की सलाह है कि ड्रग्स के शिकार लोगों के लिए इलाज और पुनर्वास के साथ-साथ एनए की मीटिंग अटैंड करना जरूरी है। इसके लिए कोई फीस नहीं वसूली जाती और नशे के शिकार शख्स की पहचान छुपाकर रखी जाती है। मीटिंग के दौरान पुराने मेंबर अपने अनुभवों के आधार पर नए मेंबरों का विश्वास बंधाते हैं। सदस्यों को हमेशा 12 स्टेप्स याद रखने और कई सावधानियां बरतने को कहा जाता है, जैसे उस जगह से कभी न गुजरें, जहां नशा किया हो। उस शख्स से कभी न मिलें, जो आपके साथ नशा करता था। अगर नशे की तलब महसूस हो और आपके कदम फिसल रहे हों तो फौरन एनए के किसी मेंबर से बात करें।


नशा करने वाले को कैसे पहचानें?

अगर आपका बेटा, बेटी, परिवार का कोई सदस्य या दोस्त नशीली दवाओं सेवन कर रहा हो तो नीचे दिए गए लक्षणों से आप उसकी आदत को पहचान सकते है।
  • खाने के तौर तरीकों में बदलाव, खासकर भूख ना लगना
  • अस्वस्थ्य लगना, लाल आंखें, त्वचा का रंग फीका पडऩा
  • सफाई ना रखना - स्नान नहीं करना, बाल नहीं, धोना, दांत साफ नहीं करना
  • याददाश्त की कमज़ोरी
  • एकाग्रता में कमी
  • एक ही जगह पर मन ना लगना
  • आक्रामक, हिंसक और चिंतित होना
  • धोखा देना, झूठ बोलना, चोरी या जालसाजी करना
  • पुराने दोस्तों के साथ वक्त ना बिताना
  • दिशा विहीन होना
  • आत्मविश्वास की कमी, स्वास्थ्य की फिक्र ना करना
  • शरीर की उर्जा की कमी
  • नींद में बदलाव
ड्रग का सेवन करने वाले ड्रग्स से जुड़ा सामान अपने बैग, बाथरूम, बैडरूम, दराज या कार में रखते है। इस सामान में कई चीज़े शामिल होती है, जैसे -
  • सिगरेट रोलिंग पेपरऔर रोलिंग व्हील
  • बबली या टूटी बोतल का उपरी हिस्सा
  • पावडर, गोलियां व पौधे
  • ऐश ट्रे या पॉकेट में पाउडर, पत्तियां या बीज
  • फ्लेवर्ड तंबाकू
अगर आपको ये शंका है कि आपका बच्चा नशीली दवाओं का सेवन कर रहा है, तो सबसे पहले अपने बच्चे को ड्रग्स से दूर रखने के लिए आप उसके साथ ईमानदारी और अच्छा रवैया अपनाएं। जब आप दूर हों, तो उसके दोस्त, दोस्तों के रहन सहन और आदतों की जानकारी लें और लगातार उनसे संपर्क में रहें। जिन बच्चों पर दिन भर किसी का ध्यान नहीं रहता, वो कब घर में आते और जाते है, इसका कोई ध्यान नहीं रखता, तो ऐसे बच्चों में नशीली दवाओं के सेवन का ज़्यादा ख़तरा होता है।

कैसे होता है इलाज

कराते हैं खास थेरपी

ड्रग्स की लत से पीडि़त शख्स में कई बुरी आदतें भी आ जाती हैं, जिस वजह से लत छोडऩे में दिक्कत आती है। ऐसे में उन्हें कुछ थेरपी कराई जाती हैं, जैसे कि आर्ट, डांस, ड्रामा, म्यूजिक, राइटिंग थेरपी आदि। इनके जरिए मरीज का मन बुरी आदतों से दूर होता है। मरीज को पार्कों में बच्चों की तरह खिलाया जाता है और पिकनिक आदि कराई जाती है। इससे उनमें नजदीकियां बढऩे लगती हैं और समाज के प्रति उनकी नाराजगी खत्म होने लगती है।

बांटते हैं अनुभव 

मरीजों की एक-दूसरे से बातचीत कराई जाती है ताकि उन्हें अपने बारे में दूसरों से चर्चा करने का मौका मिले। वे बताते हैं कि नशे की वजह से उन्होंने क्या गंवाया। इससे उनके मन का बोझ दूर होता है।

दवा का रोल सीमित 

नशे के शिकार के इलाज के लिए दवा की भूमिका सीमित है। किसी-किसी रिहैबिलिटेशन सेंटर पर दवा के बिना (ठंडे पानी से स्नान और विश्राम) से इलाज किया जाता है। इसके बाद क्रोध करना, उलटी आना, अनिद्रा, व्याकुलता आदि लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। कहीं-कहीं विकल्प के रूप में अवैध ड्रग्स की जगह मान्यता प्राप्त दवाएं दी जाती हैं। ऐसी दवाएं किसी डॉक्टर की देख-रेख में ही दी जाती हैं।

कितना समय लगता है

रिहैबिलिटेशन सेंटर्स में 3 से 9 महीने के कोर्स हैं। इसके बाद मरीज को एक से डेढ़ साल तक लगातार संपर्क बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

जब भी नशे की तलब लगे और आप काबू खोने लगें, किसी-न-किसी बहाने खुद को दो मिनट के लिए दूसरे कामों में लगा लें। इससे आपके इरादे बदल जाएंगे।

Friday, 8 April 2016

होम्योपैथी दवाएं कितनी असरदार

 

होम्योपैथी दवाएं कितनी असरदार

ऑस्ट्रेलिया में पिछले कुछ महीनों से होम्योपैथी दवाओं को लेकर चर्चा चल रही है कि क्या ये दवाएं प्रभावी हैं। ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार ऐसी कोई भी बीमारी नहीं है जिसके ईलाज में होम्योपैथी दवाएं कारगर नहीं हैं। वैसे पिछले वर्षों के आकड़ों के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में 1.1 करोड़ लोग बीमारियों के ईलाज के लिए होम्योपैथीदवाओं को अपनाते हैं। छोटी-छोटी स्वास्थ्य परेशानियां जैसे खांसी, सर्दी, जूकाम, कान व नाक में दर्द आदि के इलाज के लिए एक बड़ी आबादी इन दवाओं पर निर्भर है।
भारत देश में भी होम्योपैथी दवाएं काफी प्रचलित है और खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इन दवाओं की काफी मांग है। फ्रांस, भारत और जर्मनी जैसे देश होम्योपैथी के फायदे से वाकिफ हैं और इसे अपना पूर्ण समर्थन देते है। होम्योपैथी दवाओं की महत्वपूर्णता चिकित्सा क्षेत्र और समाज द्वारा उठाए जा रहे कदमों को देखकर परखा जा सकता है।वैसे काफी लोग अन्य औषधि को अपनाने के बाद होम्योपैथी दवाओं के प्रति अपना रुख करते हैं। ऑस्ट्रेलिया होम्योपैथीक एसोसिएशन की वक्ता ने कहा कि अन्य चिकित्सा प्रणालियों में चिकित्सक काफी कम समय में परामर्श कर मरीज को दवा दे दिया करते हैं किन्तु होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली इन सब से थोड़ा अलग है। इसमें चिकित्सक मरीज के साथ कम से कम 1 घंटे तक परामर्श करता है और बीमारी से जुडी हर एक जानकारी एकत्रित करता है।उन्होंने कहा कि ऐसा कर बिमारी को जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है। साथ ही मरीज भी खुलकर अपनी परेशानियों को बता पाते हैं।इन दवाओं का असर रातो-रात नहीं होता किन्तु मरीजों का कहना है कि दवाओं के असर में कई बार महीनों लग जाते हैं।

इमर्जेंसी में होम्योपैथी का महत्व

आमतौर पर लोगो की धारणा है कि होम्योपैथी इमरजेन्सी में काम नहीं करती है क्योकि इसका असर बहुत धीरे-धीरे होता है, और जब तक दवा असर करेगी तब तक रोगी का बहुत नुकसान हो जायेगा लेकिन ऐसा नहीं है, यदि किसी भी इमरजेन्सी केस में सही समय में सही दवा तुंरत दी जाए तो न केवल रोगी की जान बच जायेगी बल्कि उसे कोई गंभीर नुकसान भी नहीं होगा। एक प्रचलित धारणा यह भी है कि होम्योपैथी दवा सिर्फ बच्चो कि मामूली चोट के लिए ही उपयोगी है किन्तु यहाँ तथ्य पूरी तरह से सही नहीं है । होम्योपैथिक दवा न केवल साधारण चोट में उपयोगी है बल्कि यह हार्ट अटेक, कोमा आदि गंभीर इमरजेन्सी में भी अति उपयोगी है।

सामान्य चोट

बच्चो को खेलते वक्त चोट लगना ,और काम करते समय मामूली चोट या कट लगना अथवा वाहन से मामूली दुर्घटना होना ।ये सभी सामान्य चोट के अन्र्तगत आते है ।ऐसे समय में कुछ उपयोगी होम्योपैथिक दवाए न केवल कटे हुए घाव भरने , रक्तस्त्राव रोकने में उपयोगी है बल्कि ये दर्द को भी कम कर देती है।

रक्तस्राव

यद्यपि रक्तस्राव किसी भी प्रकार की बाह्य या आन्तरिक चोट का परिणाम होता है लेकिन रक्तस्राव को कई प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है - सामान्य चोट लगने पर होनेवाला रक्तस्राव, नाक से रक्तस्राव (नकसीर), महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होनेवाला अतिस्राव आदि। कभी-2 किडनी मे पथरी की समस्या होनेपर भी मूत्र के साथ रक्तस्राव संभव है। होम्योपैथी मैं रक्तस्राव फ़ौरन रोकने के लिए भी पर्याप्त दावा उपलब्ध हैं।

संक्रमण

किसी भी प्रकार के संक्रमण को नियंत्रित करने मैं होम्योपैथिक दवाए सक्षम हैं।मौसमी संक्रमण, फोडे, मुहांसे, खुजली, एक्सिमा, एलर्जी आदि के लिए होम्योपैथिक दवाए कारगर हैं।

मोच

सामान्य कार्य के दौरान,भारी वजन उठाने से, गलत तरीके से कसरत करने जैसे आदि अनेक कारण हैं जो मोच के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं। प्राय: मोच शरीर के लचीले भागों जैसे कलाई, कमर, पैर, आदि को प्रभावित करती है। लोगों का सोचना है के मालिश ही इसका सर्वोत्तम उपचार है लेकिन मोच के लिए भी होम्योपैथिक दवाए उपलब्ध हैं जो ना केवल मोच के दर्द से राहत देती हैं बल्कि सुजन को दूर करने मे भी सहायक हैं।

जलना

जलना एक दर्दनाक प्रक्रिया है जो कई कारणों से हो सकती है - महिलाओं का किचन में कार्य करते वक्त जल जाना, आग या भाप से जलना, सनबर्न आदि। जलने पर होम्योपैथिक दवाएं प्रयोग में लायी जा सकती हैं।

हड्डी  टूटना

हड्डी टूटना एक आम इमर्जेंसी है जो प्राय: वृद्ध लोगो में, बच्चों में अथवा दुर्घटना आदि के कारण हो सकती है। लोगो के एक आम सोच है के भला होम्योपैथिक दवाए कैसे इसे ठीक कर सकती हैं? लेकिन होम्योपैथी के खजाने में कुछ ऐसे दवाएं भी हैं जो दर्द को दूर करके टूटी हड्डी को पुन: जोडऩे मैं सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

लू लगना

गर्मी के मौसम में बरती गयी लापरवाही या कुछ मामूली गलतियाँ लू लगने के लिए जिम्मेदार होती हैं जैसे - धूप में घूमना, धूप से आते ही ठंडा पानी पीना, तेज़ गर्मी से आते ही कूलर या एसी में बैठना इन सब कारणों से शरीर तथा बाहरी वातावरण के बीच संयोजन गडबडा जाता है और व्यक्ति लू का शिकार हो जाता है। प्राय: लोग नहीं समझ पाते कि उनको लू का आघात लगा है। इसके मुख्य लक्षण- तेज़ बुखार, वमन, तेज़ सिरदर्द आदि हैं। लक्षण गंभीर होनेपर रोगी की मृत्यु भी संभव है। लू से बचाव के लिए होम्योपैथिक दवाए उपयोगी हैं। लू लगने पर तुरन्त दी गई 1 या 2 खुराक रोगी की जान बचाने के लिए पर्याप्त हैं।

टिटनेस

लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लगने पर या वाहन से दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा पैदा हो जाता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है। होम्योपैथी में टिटनेस के लिए दोनों ही विकल्प मौजूद हैं -
1) चोट लगने पर फ़ौरन ली जानेवाली दवाई ताकि भविष्य में टिटनेस की सम्भावना न रहे।
2) टिटनेस हो जानेपर उसे आगे बढऩे से रोकने तथा उसके उपचार हेतु ली जानेवाली दवाई।

सदमा

यह एक अत्यधिक गंभीर इमर्जेंसी है जो व्यक्ति पर अस्थायी अथवा दूरगामी दोनों प्रकार के प्रभाव छोड़ सकती है। अचानक कोई ख़ुशी या गम का समाचार, प्रियजनों के मृत्यु, किसी भयानक दुर्घटना या खून आदि के घटना को साक्षात देखना आदि सदमे के मुख्य कारण हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाता है, उसकी आँखें चढ़ जाती हैं, दांत बांध जाते हैं तथा कभी कभी आवाज़ या याददाश्त भी चली जाती है। ऐसी अवस्था में प्रति 5-5 मिनट के अन्तराल पर कुछ विशिष्ट होम्योपैथिक दवाओं के खुराक दे कर व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

हार्टअटैक

यह बड़ा प्रचलित तथ्य है कि हार्ट अटैक जैसी अति गंभीर इमर्जेंसी और होम्योपैथिक दवाओं के बीच कोई सम्बन्ध नहीं है क्यूंकि ऐसी हालत में हॉस्पिटल ही अंतिम विकल्प है जबकि अनेक बार ऐसा भी होता है कि रोगी हॉस्पिटल पहुँचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ देता है क्योंकि हार्टअटैक के रोगी को फौरन देखभाल तथा उपचार की ज़रूरत होती है। होम्योपैथिक दवाओं मैं केवल हार्टअटैक से बचाव करने के ही शक्ति नहीं है बल्कि यह रक्त संचार को नियमित बनाकर भविष्य मे हार्ट अटैक से बचाव प्रदान करती है, हार्ट के नलियों में खून का थक्का बनने पर उसको तरल करके समाप्त कर देती है तथा हार्ट की पेशियों को ताकत प्रदान करती हैं। सर्वोत्तम बात यह है कि इन दवाओं को जीवनभर प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होती किन्तु इनका प्रभाव स्थाई होता है।

Tuesday, 11 August 2015

तीन आसन जो घटाए पेट की चर्बी


अगर आप अपने पेट की बढ़ती चर्बी से परेशान हैं और इसे कम करने के लिए किसी कारगर उपाय की तलाश में हैं तो योगासन आपके लिए बहुत मददगार हो सकते हैं। योगासनों न सिर्फ आपको पेट से फैट्स कम करने में मदद मिलेगी बल्कि आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और शरीर लचीला होगा। आइए जानें ऐसे तीन आसनों के बारे में जिनसे आपको पेट की चर्बी कम करने में आसानी होगी।

भुजंगासन

इस आसन से न सिर्फ पेट की चर्बी कम होती है बल्कि बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर लचीला बनता है। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं।
  • दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें।
  • अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े।
  • अब शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं।
  • शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन पेट बी चर्बी कम करने के लिए बेहद आसान और प्रभावी आसन है। इसकी आसान विधि इसप्रकार है-
  • सबसे पहले सीधा बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सटाकर सीधा फैलाएं।
  • दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें।
  • फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकडऩे की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

बलासन

बलासन उन लोगों के लिए परफेक्ट आसन है जिन्होंने योगासन की शुरुआत की हो। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीडि़त लोग इसे न करें। इसकी विधि इसप्रकार है -
  • घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एडिय़ों पर हो।
  • गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें।
  • आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं।