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Sunday, 29 March 2015

कैल्शियम की अधिक मात्रा भी स्वास्थ्य को नहीं सुहाती



कैल्शियम को हड्डियों के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है, लेकिन शोधकर्ताओं ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि कैल्शियम की अत्यधिक मात्रा का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है । कैल्शियम के सप्लिमेंट्स का अधिक मात्रा में सेवन करने के कारण कैल्शियम अल्कली या मिल्क अल्कली नामक समस्या हो सकती है।
इन दिनों लोग छरहरा दिखने के लिए खाना छोड़ कर गोलियों का सहारा ले रहे हैं, जो खतरनाक है। ऐसा करके हम प्राकृतिक टाइम टेबल के विपरीत काम कर रहे हैं। आहार की पूर्ति गोलियों से कर लेना बहुत ही आसान है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी कुछ कम नहीं हैं । फल, सब्जी या भोजन के जरिये शरीर में विटामिन की क्षतिपूर्ति करना तो अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए गोली का सहारा लेना आपको रोगी बना सकता है। हालिया अध्ययन से पता चला है कि शरीर में विटामिन का स्तर पर्याप्त बनाए रखने के लिए ज्यादा गोलियां खाना प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ा देता है।

कैल्शियम की गोलियों के कुछ दुष्प्रभाव

  • कैल्शियम की गोलियों के अतिरिक्त सेवन से रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है और यहां तक कि किडनी भी खराब हो सकती है ।
  • जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त रोगी होने का पुराना इतिहास रहा है, उन्हें मल्टीविटामिन का सेवन करने से कैंसर के होने का खतरा रहता है ।
  • मिल्क एल्कली सिन्ड्रोम के कारण हाइपरग्लाइसीमिया हो सकता है और अगर समय रहते इसकी चिकित्सा नहीं की गयी तो रीनल फेल्योर भी हो सकता है।

स्वास्थ्य के लिए कुछ सावधानियां

  • अगर आप कैल्शियम की गोलियां ले रहे हैं, तो रक्त में कैल्शियम की मात्रा की जांच करा लें ।
  • आस्टीयोपोरोसिस के मरीज़ों के लिए कैल्शियम की गोलियों लेना आवश्यक होता है, लेकिन उन्हें भी कैल्शियम की मात्रा ध्यान में रखनी चाहिए ।
  • चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही विटामिन की गोलियां लें।

कैल्शियम से संबंधित भ्रम और तथ्य

कैल्शियम से सम्बन्धी चुनौती सदियों से चली आ रही है और यह स्थिति आज भी वैसी ही है। कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि कैल्शियम के पूरक लेने से हड्डियां  मजबूत और स्वस्थ होती हैं और आस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी के दूर रहने के साथ साथ हड्डियों के टूटने का भी खतरा कम होता है, लेकिन कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि कैल्शियम के रूपक लेने से इनके अतिरिक्त प्रभाव होते हैं। इसलिए कैल्शियम से सम्बन्धी भ्रम का समाधान निकालने के लिए यहां कई प्रकार के भ्रम का समाधान निकाला जा रहा है।
प्रतिदिन मुझे किस मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति (जिसकी उम्र 19 से 50 वर्ष हो) उसे दिनभर में लगभग 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए और 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा लेनी चाहिए।
यह मात्रा किसी भी प्रकार के कैल्शियम सा्रेत की हो सकती है जैसे डेयरी उत्पाद ,खाद्य पेय आदि  लेकिन कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि दिन में लगभग 600 मीलिग्राम से 1000 मिली ग्राम ही बहुत है।
अगर मैं कैल्शियम के पूरक पर नहीं निर्भर होना चाहता तो मुझे किस मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए?
एक स्वस्थ आहार का अर्थ है दिन में 200 से 300 मिलीग्राम कैल्शियम लेना। इसमें फल और सब्जिय़ां होनी चाहिए जैसे बीज ,अनाज और हरी पत्तेदार सब्जिय़ां, लेकिन 1 कप दूध से शरीर में 300 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा जुड़ जाती है और दही से 150 से 200 मिलाग्राम कैल्शियम।
सभी दूध के उत्पादों को अपने आहार में शामिल कर और कुछ मात्रा में फल और सब्जिय़ां लेने से शरीर में 600 से 800 मिलीग्राम कैल्शियम की आपूर्ति होती है।
अगर मैं कैल्शियम के पूरक लेना चाहूं तो इन्हें किस तरह से लेना चाहिए।
स्वास्थ्य चिकित्सकों का ऐसा मानना है कि कैल्शियम के पूरक कैल्शियम साइट्रेट या कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं।
कैल्शियम के पूरक जिनमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट होती है उन्हें खाने के बाद लेना चाहिए क्योंकि उन्हें पेट में मौजूद एसिड को अवशोषित करने की ज़रूरत होती है ा कैल्शियम साइट्रेट पेट में मौजूद एसिड पर निर्भर नहीं होता और इसलिए इसे दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है ा
क्या कैल्शियम लेकर फ्रैक्चर से बचा जा सकता है ?
विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम लेने का अर्थ यह नहीं है कि हमारे रक्त में अधिक मात्रा में कैल्शियम होगा ा अगर रक्त में कैल्शियम अधिक मात्रा में नहीं है हड्डियों के रिज़र्पशन से वो सामान्य स्थिति में आ जाती है और ऐसे में हड्डियां और कमज़ोर हो जाती हैं जिससे कि फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है

Wednesday, 8 October 2014

महिलाओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण


जब बात महिलाओं की होती है, तब वह आराम से हर बीमारी को नजरअंदाज कर देती हैं। यही कारण है कि आज दुनियाभर में महिलाओं को ही सबसे ज्यादा भयंकर बीमारी का समाना करना पड़ रहा है। अधिकतर महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देती। कई बार इसी वजह से कोई बड़ी बीमारी बाद में या लाइलाज स्टेज पर पता चल जाती है। ऐसी कुछ बीमारियां हैं, जो अगर जल्द पहचान में न आयी तो उनसे जान को खतरा पैदा हो जाता है। इसलिये अच्छा होगा कि कोई भी बीमारी का अंदेशा होने पर जल्द से जल्द उसकी समस्या का समाधान कर लें।
ऑस्टियोपोरोसिस का नाम तो आपने सुना ही होगा, अगर नहीं तो यह हड्डी की एक अवस्था होती है जिसमें हड्डियाँ उम्र के साथ मुलायम हो कर चिटकने लगती हैं। इसका ट्रीटमेंट थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योंकि जब तक किसी महिला को इस बीमारी के बारे में पता चला है, तब तक बहुत देर हो जाती है। इसकी समस्या कैल्शियम की कमी से होती है।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप की उम्र क्या है क्योंकि अवस्था कोई भी हो अपनी हड्डी को मजबूत रखना बहुत जरुरी है। कई लोगों का यह मानना है कि हड्डी तो वैसे भी शरीर का सबसे मजबूत अंग होता है तो भला इसकी देखभाल करने से क्या फायदा। यह बीमारी जयादातर महिलाओं और लडकियों में देखने को मिलती है। यह ज्यादातर 50 की उम्र की महिलाओं को होती है। चलिए देखते हैं कि इस बीमारी को दूर करने के लिए और अपनी हड्डी को मजबूत बनाने के लिए क्या आहार ले सकते हैं-
दूध : आपकी मां आपको हर वक्त दूध पीने को हमेशा कहती हैं क्योंकि इसके पीछे एक कारण है। दूध कैल्शियम और विटामिन डी का सबसे बडा स्रोत होता है। रिसर्च के मुताबिक कुछ डेयरी प्रोडक्ट जैसे कि चीज़ और आइस्क्रीम भी कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं पर उनमें विटामिन डी नहीं पाया जाता।
व्यायाम : व्यायाम न करना बहुत ही गलत आदत है। अगर आपको अपनी हड्डी को मजबूत बनाना है तो अभी से ही टहलना, जौगिंग करना, वेट लिफ्टिंग, पुश अप और सीढियां चढना शुरु कर दें। आप को हफ्ते में छह दिन 30 मिनट तक के लिए तो व्यायाम करना ही चाहिएये।
मेवा-बीज : अगर आपको किसी भी प्रकार का मेवा पसंद है तो उसे जरुर खाएं। कद्दू के बीज में मैगनीश्यिम होता है। बादाम और पिस्ता जैसे मेवे भी आप खा सकती हैं। इसमें ढेर सारे पोषक तत्व आपकी हड्डी को मजबूती देगें। अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा बहुत अधिक पायी जाती है। साथ ही इसमें अल्फालिनोलिक एसिड होता है जो हड्डी को मजबूती प्रदान करता है।
गाजर : इस सब्जी में अल्फा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन और बीटाक्रप्टोएक्सथिन पाया जाता है। गाजर को आप सलाद के रुप में कच्चा खा सकते हैं।
विटामिन डी : यह पोषक तत्व कैल्शियम को सोखने और बनाये रखने में काम आता है। सूरज की धूप शरीर में विटामिन डी भरती है और इसे पाने के लिए आपको संतरे का जूस, दूध, मछली आदि खाना चाहिये।

महिलाओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण

कैल्शियम एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी शरीर को काफी जरूरत होती है। दूसरे पोषक तत्व की तरह ही हमारे डाइट में कैल्शियम की बड़ी भूमिका होती है। मजबूत हड्डी और दांत के निर्माण में कैल्शियम आवश्यक होता है। इतना ही नहीं, कैल्शियम हमारे स्वास्थ को भी बेहतर बनाता है। बेहतर स्वास्थय के लिए नि:संदेह कैल्शियम एक जरूरी पोषक तत्व है। पोषक तत्व का सेवन और इसका स्तर महिला और पुरुष में अलग-अलग हो सकता है। कई बार महिलाओं को अपने स्वास्थय को बनाए रखने के लिए कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व की जरूरत होती है। महिलाएं अपने करियर और फैमिली का ध्यान रखते-रखते कई बार अपने आहार और फिटनेस को लेकर लापरवाह हो जाती है। वह भूल जाती है कि उनकी अपनी भी जिंदगी है और उन्हें अपना भी ख्याल रखना चाहिए। रोज कीजिये एक्सरसाइज नहीं तो हो जाएंगी हड्डियां कमजोर बुनियादी बातें इससे पहले कि आप महिलाओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण और उसके उपचार के बारे में जानें, आपके लिए कैल्शियम के बारे में जानना अच्छा होगा।
  • यह ऐसा पौष्टिक तत्व है जो आपकी हड्डियों और दांतों को संरचना प्रदान करता है।
  • तंदुरुस्त दिल के लिए यह जरूरी होता है।
  • आपके मसल्स की कार्यप्रणाली इस पोषक तत्व पर निर्भर करती है और इसी से आपकी हड्डी भी मजबूत होती है।
  • अपने औषधीय गुण के कारण यह सबसे ज्यादा बिकने वाला सप्लीमेंट्स है।

लक्षण

अब आप जान गए हैं कि कैल्शियम कितना महत्वपूर्ण है। आइए अब कुछ और बातें जानते हैं। यहां हम आपको महिलाओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण के बारे में बता रहे हैं।
  • महिलाओं के शरीर में 1000 से 1200 मिली ग्राम कैल्शियम होनी चाहिए। इससे कम मात्रा को कैल्शियम की कमी माना जाता है और आपको फिजिशियन से इस बारे में जरूर बात करनी चाहिए जो आपको बेहतर आहार की सलाह देंगे। महिलाओं में कैल्सिय की कमी के लक्षण साफ दिखाई नहीं देते हैं। पर अगर आप नियमित रूप से फ्रेक्चर से जूझ रही हैं और आपकी हड्डी काफी कमजोर हो गई है तो आपको ध्यान देने की जरूरत है। यह भी जरूरी है कि उम्रदराज महिलाएं भी कैल्शियम की कमी को गंभीरता से लें।
  • अगर महिलाओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण को नजरअंदाज कर दिया जाए तो इससे आस्टिओपरोसिस का खतरा भी पैदा हो जाता है। कैल्शियम की कमी का जल्दी पता लगाने के लिए आपको ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए।
  • महिलाओं में कैल्शियम की कमी का लक्षण संवदेनशून्यता और मसल में अकड़ आना भी है। अगर इस स्थिति का उपचार न कराया जाए तो इस बात का खतरा रहता है कि नर्व ठीक तरह से सिग्नल भेजना बंद कर दे।
  • महिलाओं में कैल्शियम की कमी को बेहतर तरह से जानने के लिए आपको हृदय के आवर्तन पर ध्यान देना चाहिए। कैल्शियम की कमी होने पर हृदय आवर्तन प्रभावित होता है।
  • कई बार महिलाओं में कैल्शियम की कमी से कंफ्यूजन, साइकोसिस और थकान भी होती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि दिमाग को भी कैल्शियम चाहिए होता है। हालांकि उम्रदराज महिलाओं में कैल्शियम की कमी का ध्यान बेहतर तरीके से रखना पड़ता है।