Saturday, 18 March 2023

केंद्र सरकार के 2047 तक एनीमिया मुक्त भारत के लक्ष्य को चरितार्थ करने के लिए इंदौर में 8 दिनों तक चलाया एनीमिया जागरूकता रथ

 8 दिनों में 200 किमी का भ्रमण कर 35 हजार लोगों से मिलकर उन्हें एनीमिया के लक्षण, होम्योपैथिक उपचार तथा खानपान की दी गई जानकारी

इंदौर। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023-24 के आम बजट में प्रावधान लाकर वर्ष 2047 तक भारत को एनीमिया मुक्त


करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसको चरितार्थ करने हेतु दिनांक 26 फरवरी 2023 से 5 मार्च 2023 तक 8 दिनों तक एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्रा.लि. और आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा एनीमिया जागरूकता रथ चलाया गया। जिसने इंदौर शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में 8 दिनों में लगभग 200 किलोमीटर का भ्रमण किया। इस दौरान रथ के साथ चलने वाली होम्योपैथिक चिकित्सकों की टीम द्वारा करीब 35 हजार लोगों से मिलकर एनीमिया के लक्षण, होम्योपैथिक उपचार तथा खानपान की जानकारी दी गई। तो बतौर इंदौर सासंद शंकर लालवानी कहते हैं कि जिस तरह से इंदौर स्वच्छता में नंबर-1 है उसी तरह से डॉ. एके द्विवेदी के अथक प्रयासों से एनीमिया मुक्त करने में भी नंबर-1 बनेगा।

शहर के प्रख्यात चिकित्सक और आयुष मंत्रालय की वैज्ञानिक सलाहकार समिति (केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद्) के अहम सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि इस एनीमिया जागरूकता रथ के माध्यम से न केवल लोगों को खून की कमी से होने वाली तरह-तरह की छोटी-बड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया गया बल्कि इनसे बचाव के अत्यंत सरल व घर में उपलब्ध खानपान के बारे में लोगों को बताया गया। इसके अलावा रक्त की कमी की वजह से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का सरल औषधीय उपचार भी किया गया। तो चुनिंदा जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। साथ ही पैपलेंट बांटे गए जिस पर रक्त की कमी को दूर करने और हिमोग्लोबीन को बढ़ाने के लिए उपयोगी खाद्य पदार्थों की जानकारी थी। रथ भ्रमण के साथ ही हमारे द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया। उल्लेखनीय है कि ढाई दशकों से एनीमिया के मरीज़ों का सफलतापूर्वक होम्योपैथी इलाज कर रहे डॉ. द्विवेदी पेशेंट्स अवेयरनेस के लिए पिछले कई सालों से एनीमिया रथ सप्ताह का आयोजन इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में कर रहे हैं। जिससे बड़ी संख्या में इंदौर और आसपास के मरीज लाभान्वित होते हैं। वहीं माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के जनवरी 2023 में इंदौर प्रवास के दौरान डॉ. द्विवेदी ने उनसे भेंटकर 2023 के बजट में एनीमिया के इलाज के लिए प्रावधान करने का आग्रह किया था। जिसे सहृदयता से स्वीकार कर लिया गया है। इसके लिए डॉ. एके द्विवेदी राष्ट्रपति एवं वित्तमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं हुए कहते हैं कि केंद्रीय बजट में 2047 तक देश को एनीमिया-मुक्त करने की घोषणा वाकई में एक बड़ा कदम है और भारत एनीमिया मुक्त होने की ओर अग्रसर होगा।

रेंडमली सीबीसी जांच के बाद आए आंकड़े चिंता का विषय


डॉ. एके द्विवेदी बताते हैं कि वे होम्योपैथिक चिकित्सा को लेकर लागातार कार्य करते हुए अनेक गंभीर बीमारियों का इलाज इसके माध्यम से कर रहे हैं। वे 25 वर्षों से अधिक समय से होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर रोगों का उपचार कर मरीजों को राहत दे रहे हैं।  उल्लेखनीय है कि उनके द्वारा समय-समय पर कैंप लगाकर लोगों में एनीमिया की जांच की जाती है। जिनकी रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसी वर्ष 2023 में जनवरी-फरवरी माह में स्कूल व गांव में की गई रेंडमली सीबीसी जांच के आधार पर देखा जाए तो 11 से 40 आयु वर्ग के महिला-पुरुष व बच्चों की रिपोर्ट में गांव में आंकड़ा 50 प्रतिशत तो स्कूल में यह प्रतिशत 78.52 रहा था। जो कि एक चिंता का विषय है।



नेशनल फेमेली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट में प्रदेश व इंदौर में एनीमिया की स्थिति


नेशनल फेमेली हेल्थ सर्वे-5 (2019-21) की रिपोर्ट के अनुसार मप्र और इंदौर में एनीमिया की स्थिति भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया का प्रतिशत 72.7 है। 15 से 49 वर्ष की नॉन प्रेग्नेंट महिलाओं का प्रतिशत 54.7 है तो गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत 52.9 है। जबकि 15 से 49 आयु वर्ग की सभी महिलाओं का प्रतिशत 54.7 है और 15 से 19 वर्ष की सभी महिलाओं का प्रतिशत 58.1 है। वहीं मप्र में पुरुष की बात करे तो 15 से 49 आयु के सभी पुरुषों का प्रतिशत 22.4 और 15 से 19 वर्ष के सभी पुरुषों को प्रतिशत 30.5 है। इधर, इंदौर जिले की बात करें तो यहां 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया का प्रतिशत 78.8 है। 15 से 49 वर्ष की नॉन प्रेग्नेंट महिलाओं का प्रतिशत 47.9 है तो गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत 52.8 है। जबकि 15 से 49 आयु वर्ग की सभी महिलाओं का प्रतिशत 48.1 है और 15 से 19 वर्ष की सभी महिलाओं का प्रतिशत 55.9 है।

कैंसर अप्लास्टिक एनीमिया जैसी कई जानलेवा बीमारियों के उपचार में होम्योपैथी कारगर: डॉ. ए.के. द्विवेदी

 इंदौर । वर्तमान जीवनशैली की वजह से कैंसर तथा अप्लास्टिक एनीमिया जैसी कई घातक बीमारियों के मामले


तेजी से बढ़े हैं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कैंसर उन बीमारियों में से एक है, जो रोगी के जीवन को पटरी से उतार देती है और परिवार को गंभीर परेशानी एवं आर्थिक  रूप से प्रभावित करती है। इसलिए कैंसर के शुरूआती लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

प्रारंभिक अवस्था में कैंसर का इलाज आसान है। देश के प्रसिद्ध होम्योपैथी  चिकित्सक डॉ. ए. के. द्विवेदी के अनुसार कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए होम्योपैथी काफी कारगर साबित हो रही है। वे कहते हैं कि कैंसर की हर स्टेज में होम्योपैथिक दवाएं अच्छा परिणाम दे रही है।

कैंसर के कारण एवं  प्रकार, जिनका होम्योपैथी कर सकती है उपचार इन्दौर, मध्य प्रदेश स्थित एडवांस्ड होम्यो हैल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्रा.लि. के संचालक डॉ. ए.के. द्विवेदी युवाओं से आग्रह करते हैं कि वे अपनी जवानी को ड्रग्स, तम्बाकू, सिगरेट एवं शराब के सेवन से बर्बाद न करें, बल्कि अपनी क्षमता सकारात्मक कार्यों में लगाएं। वे कहते हैं कि होम्योपैथी ऐसा विकल्प है, जिसे आजकल बहुत लोग अपना रहे हैं जिसका प्रमुख कारण हैं कि इन दवायों का शरीर पर दुः परिणाम नहीं होता हैं । होम्योपैथी में कैंसर की विस्तृत शृंखला को ठीक करने की क्षमता है। । आइए, हम आपको कैंसर के कुछ ऐसे प्रकारों के बारे में बताते हैं, जिनका होम्योपैथी से  इलाज कर  सकते हैं।

 

कैंसर - मेटास्टेसिस में प्लेटलेट हीमोग्लोबिन या सभी सेल्स कम हो सकते हैं घबराने की ज़रूरत नहीं  होम्योपैथी इलाज से बढ़ सकते हैं

https://www.youtube.com/watch?v=U5iLpksK7Tg&t=8s

 

पित्त नली का कैंसर

पित्त नली हमारे पाचन तंत्र में अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यह लिवर को पित्ताशय और छोटी आंत से जोड़ती है। पित्त नली के कैंसर को चिकित्सकीय भाषा में कोलेंजियोकार्सिनोमा कहा जाता है। यह आमतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। बाइल डक्ट कैंसर की वहज की बात करें तो यह मुख्य रूप से अस्पष्ट है। खुशकिस्मती से, होम्योपैथी  पित्ताशय एवं  पित्त नली के कैंसर में रोगी को काफी राहत प्रदान करती रही हैं ।

स्तन कैंसर

वर्तमान समय में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर काफी आम है। स्तन कैंसर के मामलों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। यहां, संक्रमण दुग्ध मिल्कडक्ट  से शुरू होता है, विशेषकर भीतरी परतों में। इस तरह के मामलों में होम्योपैथी गांठ के आकार को कम करने में मदद करती है। यह दर्द और डिस्चार्ज को कम करने में भी फायदेमंद साबित हो रही हैं|  आपरेशन के बाद हाथों में सूजन कम करने में भी सहायक है|

थायराइड कैंसर

इस प्रकार का कैंसर पैराफोलिकुलर थायरॉयड कोशिकाओं से शुरू होता है। इन कोशिकाओं पैपिलरी थायरॉयड कैंसर, कूपिक थायरॉयड कैंसर और एनाप्लास्टिक थायरॉयड कैंसर भी विकसित हो सकते हैं। इस तरह के कैंसर से महिलाओं को ज्यादा खतरा होता है। होम्योपैथी चिकित्सा द्वारा थायराइड कैंसर के मरीजों को भी राहत मिल सकती है, लेकिन इसका असर थायराइड कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।

ओवेरियन या अंडाशयी कैंसर

ब्रेस्ट कैंसर के अलावा महिलाएं ओवेरियन कैंसर का भी काफी शिकार होती हैं। यह कैंसर अंडाशय को भी प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में होम्योपैथी दवाएं बिना किसी दुष्प्रभाव के डिम्बग्रंथि के कैंसर में आराम दिलाने में मदद कर सकती हैं।

फेफड़े का कैंसर

अमेरिका सहित प्रमुख देशों में कैंसर से संबंधित अधिकांश मौतों का कारण फेफड़ों का कैंसर ही है। इस तरह के कैंसर धूम्रपान और अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में रहने से हो सकते हैं। होम्योपैथी फेफड़ों के कैंसर में भी काफी प्रभावी है | इस तरह के कैंसर के अलावा और भी कई रूप हैं, जिनका होम्योपैथी से इलाज किया जा सकता है। जैसे- मुँह (मुख) का कैंसर, गर्भाशय कैंसर, पेट का कैंसर, अग्नाशय का कैंसर, गुर्दे का कैंसर और मूत्राशय तथा प्रोस्टेट का कैंसर।

इन्दौर में एडवांस्ड होम्यो हैल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्रा.लि. के संचालक डॉ. ए.के. द्विवेदी बताते हैं कि आजकल कैंसर से भी भयानक बीमारी के रूप में अप्लास्टिक एनीमिया दिखने को मिल रहा है र। इस बीमारी में तकलीफ यदि बढ़ी हुई है तो मरीज को ब्लड व प्लेटलेट्स बार-बार चढ़वाना पड़ता है। इस तकलीफ को भी होम्योपैथिक इलाज से काफी  कम किया जा रहा  है। कैंसर के मामलों में ऑपरेशन, कीमोथैरेपी तथा रेडियोथैरेपी के साथ भी होम्योपैथिक दवाइयां ली जा सकती हैं।जिससे खून (रक्त) और ब्लड सेल्स को भी बढ़ाया जा सकता है।

होम्योपैथिक दवाओं से हुआ प्लेटलेट्स में सुधार

कैंसर में ऑपरेशन, कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी के बाद भी जब स्वास्थ्य समस्याएं कम नहीं होती, तो होम्योपैथी इस स्थिति में काफी  सहायक हो सकती है। ऐसी ही एक मरीज वीणा त्रिवेदी बताती हैं कि उन्हें कैंसर के कारण मेटास्टेसिस भी हो गया था। इलाज के दौरान वे कई बार अस्पताल में भर्ती भी रहीं। उन्होंने कई बार कीमोथैरेपी भी करवाई। बाद में पता चला कि प्लेटलेट्स काउंट तीन हजार ही रह गया। रिकवरी के लिए उन्होंने अस्पताल में भर्ती होकर काफी संख्या में प्लेटलेट्स भी चढ़वाए, लेकिन प्लेटलेट्स काउंट नहीं बढ़ा। डॉ. ए.के. द्विवेदी के होम्योपैथिक इलाज के बारे में जानकारी मिलने पर वे उनसे मिलीं। डॉ. द्विवेदी ने कुछ दिनों तक  होम्योपैथिक दवा दी। उनके सेवन से वे कुछ ही दिनों में मैं ठीक हो गईं और प्लेटलेट्स काउंट बढ़कर 2 लाख से अधिक  हो गया। वे अपने उपचार के लिए डॉ. द्विवेदी का आभार प्रकट करती हैं।

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अधिक जानकारी के लिए एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर; होम्योपैथिक

मेडिकल रिसर्च सेंटर प्रा. लि. , मनोरमा गंज, गीता भवन रोड इंदौर,

मध्यप्रदेश पर संपर्क कर सकते हैं।

9993700880, ,0731-4064471, 

drakdindore@gmail.com

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एनीमिया को ना समझे एक साधारण सी बीमारी इससे खुद को बचाएं

 नीमिया एक साधरण-सी लगने वाली बीमारी है। बॉडी में आयरन की कमी को हम आम बात समझकर इस पर


खास ध्यान नहीं देते। हमारी यही लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार हमारे शरीर के सेल्स को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन रेड ब्लड सेल्स (आरबीसी) में मौजूद हीमोग्लोबिन पहुंचाता है। आयरन की कमी और दूसरी वजहों से रेड ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबिन की मात्रा जब शरीर में कम हो जाती है, तो उस स्थिति को एनीमिया कहते हैं। आरबीसी और हीमोग्लोबिन की कमी से सेल्स को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। कार्बोहाइड्रेट और फैट को जलाकर एनर्जी पैदा करने के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। ऑक्सीजन की कमी से हमारे शरीर और दिमाग के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है।

कितनी तरह का एनीमिया

एनीमिया खून की सबसे सामान्य समस्या है। हमारे देश में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे ज्यादा पाया जाता है। करीब 90% लोगों में यही एनीमिया होता है, खासकर महिलाओं और बच्चों में।

1. माइल्ड- अगर बॉडी में हीमोग्लोबिन 10 से 11 g/dL के आसपास हो तो इसे माइल्ड एनीमिया कहते हैं। इसमें हेल्थी और बैलेंस्ड डाइट खाने की सलाह के अलावा आयरन सप्लिमेंट्स दिए जाते हैं।

2. मॉडरेट- अगर हीमोग्लोबिन 8 से 9 g/dL होगा तो इसे मॉडरेट एनीमिया कहेंगे। इसमें डाइट के साथ-साथ इंजेक्शंस भी देने पड़ सकते हैं।

3. सीवियर - हीमोग्लोबिन अगर 8 g/dL से कम हो तो सीवियर एनीमिया कहलाता है, जो एक गंभीर स्थिति होती है। इसमें मरीज की हालत की गंभीरता को देखते हुए ब्लड भी चढ़ाना पड़ सकता है।

क्या हैं कारण

  • आयरन, विटामिन सी, विटामिन बी 12, प्रोटीन या फॉलिक एसिड की कमी
  • हेमरेज या लगातार खून बहने से खून की मात्रा कम हो जाना
  • ब्लड सेल्स का बहुत ज्यादा मात्रा में नष्ट हो जाना या बनने में कमी आ जाना
  • पेट में कीड़े (राउंड वॉर्म और हुक वॉर्म) होना
  • लंबी बीमारी जैसे कि पाइल्स आदि, जिनमें खून की कमी होती हो
  • पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग
  • ल्यूकिमिया, थैलीसीमिया आदि की फैमिली हिस्ट्री है, तो 50% तक चांस बढ़ जाते हैं
  • जंक फूड ज्यादा खाने से
  • एक्सर्साइज़ न करने से
  • प्रेगनेंट महिलाओं का हेल्दी डाइट न लेना

 

किन्हें खतरा ज्यादा

किडनी, डायबीटीज, बवासीर, हर्निया और दिल के मरीजों को, शाकाहारी लोगों को, प्रेगनेंट या स्मोकिंग करनेवाली महिलाओं को।

नोट: पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि इससे शरीर में आयरन तेजी से कम हो जाता है।

लक्षण

  • कमजोरी, थकान और चिड़चिड़ापन
  • किसी भी काम में मन या ध्यान न लगना
  • दिल की धड़कन नॉर्मल न होना
  • सांस उखडऩा और चक्कर आना
  • छोटे-छोटे कामों में भी थकान महसूस होना
  • आंखें, जीभ, स्किन और होंठ पीले पडऩा

नोट: ये सामान्य लक्षण हैं, लेकिन यह स्थिति लगातार बनी रहे तो कई गंभीर लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। ऐसे ही लक्षण किसी दूसरी बीमारी के भी हो सकते हैं।

गंभीर लक्षण

  • सिर, छाती या पैरों में दर्द होना
  • जीभ में जलन होना, मुंह और गला सूखना
  • मुंह के कोनों पर छाले हो जाना
  • बालों का कमजोर होकर टूटना
  • निगलने में तकलीफ होना
  • स्किन, नाखून और मसूड़ों का पीला पड़ जाना
  • एनीमिया लगातार बना रहे तो डिप्रेशन का रूप ले लेता है

नोट : महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में एनीमिया के लक्षण एक जैसे ही होते हैं।

कितना हो हीमोग्लोबिन

महिला - 11 से 15  g/dL के बीच

पुरुष - 11.5 से 17 g/dL के बीच

 

खानपान पर ध्यान जरूरी

आयरन की डिमांड पूरी करने के लिए हमें हेल्थी और बैलेंस्ड डाइट खानी चाहिए। तीनों मील्स के अलावा दो स्नैस भी खाएं और खाने में अंडे, साबुत अनाज, सूखे मेवे, फल और हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा मात्रा में हों।

आयरन से भरपूर चीजें खाएं। जिन चीजों में ज्यादा आयरन होता है, उन्हें नीचे घटते क्रम में दिया गया है। यानि सबसे ज्यादा आयरन वाली चीजें पहले और कम वाली उसके बाद...

फल- खुबानी, अंजीर, केला, अनार, अन्नास, सेब, अमरूद, अंगूर आदि

सब्जियां- पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, धनिया, पुदीना, चुकंदर, बीन्स, गाजर, टमाटर आदि

ड्राई फ्रूट्स- बादाम, मुनक्का, खजूर, किशमिश आदि दूसरी चीजें- गुड़, सोयाबीन, मोठ, अंकुरित दालें, दूसरी दालें खासकर मसूर दाल, चना, गेंहू, मूंग आदि।

होम्योपैथी से इलाज

रिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार सभी प्रकार की एनीमिया के रोकथाम व इलाज में होम्योपैथी काफी हद तक सहायक है, यदि हम एनीमिया के कारण जैसे खुनी बवासीर, मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव, पेट के कीड़े तथा आयरन व प्रोटीन का न पचना इत्यादि के आधार पर होम्योपैथिक दवाइयों का चयन करेंगे तो हिमोग्लोबिन सहित सेल्स को भी बढ़ाया जा सकता है।

Monday, 6 March 2023

खून की जांच को कुंडली मिलान से ज्यादा महत्व देंगे तभी हम रोक सकेंगे अगली पीढ़ी में जाने से बीमारी को : सांसद लालवानी

 नेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस-2023 का हुआ आयोजन

 


इंदौर। "एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी" एवं "आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन" द्वारा आज शनिवार को इंदौर में "होम्योपैथिक ट्रीटमेंट फ़ॉर इंक्यूरबल डीसीसेस"  विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सांसद श्री शंकर लालवानी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय भारत सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य और प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी ने की।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सांसद लालवानी ने कहा व्यक्ति स्वस्थ होगा तो समाज स्वस्थ होगा और ये दोनों स्वस्थ होंगे तो देश  स्वस्थ होगा। लेकिन आज की लाइफस्टाइल के चलते युवा ज्यादा अस्वस्थ हो रहा है। 30 से 50 वर्ष की आयु वर्ग के लोग के बीच किए गए सर्वे में ये बात सामने आई है। जिसमें देखने को मिला कि वैसे तो व्यक्ति स्वस्थ है और देखने पर उसे कोई बीमारी नजर नहीं आती लेकिन जांच रिपोर्ट में कुछ कॉमन बीमारियों के शुरुवाती लक्षण दिखाई दिए। ऐसे में  युवा पीढ़ी को चाहिए कि वो अपनी लाइफस्टाइल में व्यायाम को शामिल करें। इसके अलावा एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है वो है रक्त की बीमारियों को लेकर जिसके लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए हम शादी से पहले जैसे जन्मपत्री का मिलान करते है वैसे ही अब हमें खून की जांच करने को भी प्राथमिकता पर रखना होगा। तभी हम आने वाली पीढ़ी में जाने से इन बीमारियों को रोक सकेंगे।  सांसद ने आगे कहा कि शादी से पहले  खून की बीमारियों की जांच जरूरी की जाए ये बात मैं, लोकसभा पटल पर रखूंगा।  

कोरोना काल के बाद ब्रिटेन में बढ़ा, होम्योपैथी पर विश्वास


नेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य वक्ता ऑनलाइन जुड़े  ब्रिटेन के मशहूर डॉ. शशिमोहन शर्मा ने कहा इंग्लैंड में कोरोना काल के बाद वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में होम्योपैथी पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। अब आम से लेकर खास वर्ग तक इसकी सहज स्वीकार्यता है। जिसके चलते मैंने खुद 900 से ज्यादा कोरोना मरीजों का इलाज किया और अधिकाँश स्वस्थ होकर नॉर्मल लाइफ एंजॉय कर रहे हैं।  डॉ. शर्मा ने कहा कि जब असाध्य रोग से ग्रस्त कोई मरीज स्वस्थ होता है तो इसका जिक्र उसके पूरे सर्कल में होता है। इस तरह की माउथ पल्बिसिटी ने इंग्लैंड में होम्योपैथी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इंग्लैंड की ही डॉ. पद्मप्रिया नायर ने कहा कि होम्योपैथी ट्रीटमेंट से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे मरीज बड़ी से बड़ी बीमारी को भी सफलतापूर्वक मात देने के योग्य बन जाता है।

नाउम्मीदी में रोशन, उम्मीद की किरण


"महिला एवं बाल विकास विभाग इंदौर संभाग" तथा मासिक पत्रिका "सेहत एवं सूरत" के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का मुख्य आकर्षण भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी थे। उन्होंने होम्योपैथी के जरिए जानलेवा बीमारी एप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद की रोशन किरण साबित हो रही है। वही अप्लास्टिक एनीमिया, सिकल सेल, थेलेसिमिया जैसी बीमारियों का स्थायी इलाज भी होम्योपैथी में संभव है। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर होम्योपैथी से जुड़ी जानकारियाँ वो राष्ट्रपति, राज्यपाल और वित्तमंत्री समेत देश की अनेक महत्वपूर्ण हस्तियों से भी साझा कर चुके हैं और हालिया केंद्रीय बजट में सिकलसेल, एप्लास्टिक एनीमिया समेत अनेक गंभीर बीमारियों को आने वाले 25 सालों में पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है। 

 

असाध्य रोगों के इलाज में कारगर, होम्योपैथी


कार्यक्रम में कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल इंदौर के कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. वैभव चतुर्वेदी ने कहा कि जब लोग जटिल असाध्य बीमारी से पीड़ित होते हैं तो मरीज के साथ-साथ उसके घर वाले भी आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान होते हैं इसलिए इस तरह के मरीजों व उनके परिजनों को मनोचिकित्सा से मिलकर उनकी सलाह लेनी चाहिए। डॉ. चतुर्वेदी ने साइकिएट्रिक ट्रीटमेंट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं गुजरात के डॉ. जयेश पटेल, लखनऊ की डॉ. लुम्बा कमाल, प्रयागराज के डॉ. प्रिंस कुमार मिश्रा और दिल्ली की डॉ. नीरज गुप्ता ने असाध्य रोगों पर कारगर साबित हुए होम्योपैथी ट्रीटमेंट के अपने रोचक एवं उपयोगी अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा जिन बीमारियों पर कोई एक चिकित्सा पद्धति प्रभावी सिद्ध नहीं हो रही है उनके समग्र निदान के लिए तमाम चिकित्सा पद्धतियों को एक मंच पर लाया जाना आवश्यक है। बीजेपी प्रवक्ता दीपक जैन भी प्रोग्राम में शामिल हुए।

 

Watch National Homeopathic Confrence-2023 on Dr. AK Dwivedi youtube channel...

https://youtube.com/live/03ZNihCVOxg

Tuesday, 28 February 2023

लोगों को गुड़-चना बांटा और रक्त की कमी को नजरअंदाज न करने की दी सलाह

      एडवांस होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी तथा आयुष मेडिकल वेलफेयर के तत्वावधान में किया जा रहा है आठ दिवसीय आयोजन

-     तीसरे दिन राजमोहल्ला क्षेत्र में किया भ्रमण, डॉ. एके द्विवेदी के नेतृत्व में डॉक्टर्स की टीम भी साथ रही


इंदौर। एडवांस होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी तथा आयुष मेडिकल वेलफेयर के तत्वावधान में आज केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसन्धान परिषद्, आयुष मंत्रालय भारत सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा एनीमिया जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत प्रतिदिन शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में एनीमिया जागरूकता रथ भ्रमण करता है। इस दौरान डॉ. द्विवेदी के साथ उनके डॉक्टर्स की टीम रहती है जो लोगों को रक्त की कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में बताती है और रक्त की कमी को नजरअंदाज न करने की सलाह देती है।


एनीमिया जागरूकता सप्ताह के तहत मंगलवार को एनीमिया जागरूक रथ राजमोहल्ला क्षेत्र में पहुंचा। यहां अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूसिंह रघुवंशी,  भाजपा महिला मोर्चा इंदौर की अध्यक्ष शैलजा मिश्रा व भाजपा महिला मोर्चा इंदौर की महामंत्री व पार्षद कंचन गिदवानी थे। प्रारंभ में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि खानपान के महत्व को नहीं समझने और फास्ट फूड के अधिक सेवन से व्यक्ति  को जरूरी पौष्टिक आहार नहीं मिल पाते हैं। जिससे रक्त की कमी (एनीमिया) के  चलते मरीजों को

सिकल सेल, थैलेसेमिया, अप्लास्टिक एनीमिया सहित तरह-तरह की गंभीर बीमारियों के साथ ब्लीडिंग डिस्सोर्डर्स आदि अनेक प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसीलिए लोगों में खानपान के महत्व को समझाने के उद्देश्य से एनीमिया जागरूक रथ चलाया जा रहा है। अतिथियों ने भी अपने उद्बोधन में रक्त की कमी और एनीमिया के प्रति लोगों को जागरूक होने की बात कही। साथ ही डॉ. द्विवेदी द्वारा शहर में चलाए जा रहे एनीमिया जागरूक रथ की प्रशंसा की। रथ के भ्रमण के दौरान डॉ. द्विवेदी यहां मार्निंग वॉक कर रहे बुजुर्गों से मिले और उन्हें अच्छे और पौष्टिक आहार लेने के बारे में 
जानकारी दी। साथ ही उम्र के इस दौर में खून की कमी ना हो इसके लिए जरूरी आहार रोजना के खानपान में शामिल करने की सलाह दी। इसके बाद एनीमिया जागरूकता रथ बड़ा गणपति, पिलियाखाल, रामचंद्रनगर, कालानीनगर, एयरपोर्ट रोड, अंजनीनगर, 60 फीट रोड, वैंकटेशनगर सहित आसपास बस्तियों व क्षेत्रों में पहुंचा। जहां लोगों को रक्त की कमी (एनीमिया), सिकल सेल, अप्लास्टिक एनीमिया आदि से बचाव के बारे में बताते हुए खून की कमी को दूर करने के लिए गुड़-चना,  गरम दूध (हल्दी के साथ), गाजर, चुकुंदर इत्यादि का सेवन करने की सलाह दी और जरूरी खाद्य पदार्थों की सूची का पैम्पलेट भी लोगों में वितरित किया गया। लोगों को गुड़-चुना भी बांटा गया। रथ के साथ डॉ. एके द्विवेदी के नेतृत्व में डॉ. विवेक शर्मा व मेडिकल स्टूडेंट्स आदि भी भ्रमण कर रहे हैं। एनीमिया जागरूकता रथ 5 मार्च तक शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचेगा।

Monday, 27 February 2023

जन सहयोग एवं जन जागरूकता से जीत हासिल होगी एनीमिया परः शंकर लालवानी

 


- एनीमिया रथ का इन्दौर नगर में आठ दिवसीय भ्रमण की शुरुआत

- गुड़, चना, मूँगफली, किशमिश का निःशुल्क  वितरण,  रथ में रक्त के निःशुल्क जांच की व्यवस्था

इन्दौर।  देश में घातक रोग एनीमिया के प्रति जन जागरूकता और रोग की रोकथाम के लिए एडवांस होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी तथा आयुष मेडिकल वेलफेयर के तत्वावधान में आज केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसन्धान परिषद्, आयुष मंत्रालय भारत सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा इन्दौर नगर में जन जागरूकता रथ निकाला गया। रथ को सांसद शंकर लालवानी ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। विधायक महेंद्र हार्डिया, नगर निगम इन्दौर के पार्षद एवं महापौर परिषद् के सदस्य तथा क्षेत्रीय पार्षद विजयलक्ष्मी गोहर अतिथि के रूप में कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद थीं। यह रथ नगर के विभिन्न क्षेत्रों के 25 हजार घरों तक पहुँचकर एनीमिया बीमारी में होम्योपैथी की उपयोगिता तथा घरों में उपलब्ध सामग्री से एनीमिया दूर करने के तरीके बताएगा।


कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि एनीमिया जैसे घातक रोग को दूर करने के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों द्वारा संयुक्त प्रयास करने की जरूरत है। एनीमिया का होम्योपैथी में बेहतर इलाज है, पर जरूरत इस बात की है कि, रोग के बारे में आम जनजीवन में जानकारी हो। उन्होंने बताया कि, हमारा उद्देश्य लोगों को समझाइश देना, सर्वे करना और समाधान देना है। इसके लिए जन सहयोग और जन जागरूकता आवश्यक है। घर में उपलब्ध गुड़-चना जैसी सामग्री भी एनीमिया की बीमारी कम करने में लाभप्रद होती है। आज से इन्दौर नगर में भेजे जा रहे इस रथ का उद्देश्य एनीमिया के इलाज और उसकी रोकथाम के बारे में जानकारी देने के साथ जनजागरुकता फैलाना भी है।

सांसद लालवानी ने डॉ. द्विवेदी द्वारा एनीमिया के बारे में वर्षों से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि, इस वर्ष भारत सरकार ने एनीमिया इलाज के लिए बजट में भी प्रावधान किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि, देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के इन्दौर प्रवास के दौरान डॉ. द्विवेदी ने मेरे साथ भेंट कर एनीमिया के बारे में चर्चा की थी। राष्ट्रपतिजी ने डॉ. द्विवेदी द्वारा दिए गए प्रतिवेदन को केन्द्र सरकार को प्रेषित किया था। बजट में इस प्रतिवेदन का प्रभाव परिलक्षित है। विधायक हार्डिया ने कहा कि, बीमारी के इलाज के लिए जागरूकता आवश्यक है। महापौर परिषद् के सदस्य राजेश उदावत तथा पार्षद विजयलक्ष्मी गोहर ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया तथा डॉ. द्विवेदी द्वारा किए जा रहे इस जन जागरूकता अभियान के  प्रयासों की सराहना की।


5 मार्च तक प्रतिदिन नगर के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करेगा रथ



जन जागरूकता रथ 5 मार्च तक प्रतिदिन नगर के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करेगा। रक्त की कमी या एनीमिया के लक्षण वाले चिन्हित व्यक्तियों के रक्त का सेम्पल लेने की  निःशुल्क  व्यवस्था एनीमिया रथ द्वारा की जाएगी। लक्षण वाले लोगों को गुड़-चना, मूँगफली दाना तथा किशमिश  का  निःशुल्क  वितरण किया जाएगा। आवश्यकतानुसार होम्योपैथी औषधियां भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। 

डॉ. द्विवेदी तथा उनकी टीम के सदस्यों ने खुद भी रथ के साथ नगर का भ्रमण किया। कार्यक्रम में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल, इन्दौर के मनोचिकित्सक डॉ. वैभव चतुर्वेदी, भोपाल शिवांगी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डी.एन. मिश्रा, जबलपुर के चिकित्सक डॉ. राजकुमार कुशवाहा, जनसम्पर्क विभाग के पूर्व अपर सचिव डॉ. भूपेन्द्र गौतम तथा आयुष चिकित्सक एवं विद्यार्थी तथा नगर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राकेश यादव ने किया, आभार दीपक उपाध्याय ने व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. जितेन्द्र पुरी तथा विनय पाण्डेय द्वारा किया गया। इस आठ दिवसीय रथ का संचालन डॉ. विवेक शर्मा एवं डॉ. जितेन्द्र पुरी व उनके सहयोगियों द्वारा किया जाएगा। एनीमिया सम्बन्धित रक्त जाँच डॉ. द्विवेदी के आग्रह पर एप्पल पैथोलॉजी द्वारा निःशुल्क की जा रही है।




Wednesday, 22 February 2023

26 फरवरी से 4 मार्च तक शहर में चलेगा एनीमिया जागरूकता रथ

-  4 मार्च को समापन आयोजित किया जाएगा अप्लास्टिक एनीमिया जागरूकता पर नेशनल सेमिनार

इंदौर। एनीमया जागरूकता के लिए हर वर्ष एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्रा.लि. और आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा शहर में एनीमिया जागरूकता रथ निकाला जाता है। इस वर्ष पर शहर में एनीमिया जागरूकता के लिए एनिमिया जागरूकता रथ चलाया जाएगा। इस रथ में होम्योपैथी चिकित्सक मौजूद होंगे, जो लोगों को एनीमिया के लक्षण बताकर सीबीसी जांच भी करेंगे। इस रथ से लोगों को घर में मौजूद और आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों से शरीर में खून की कमी को पूरा करने वाली चीजों की जानकारी दी जाएगी।

शहर के वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक और केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य और वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि ये एनीमिया जागरूकता रथ शहर में 26 फरवरी से 4 मार्च तक चलाया जाएगा। इसी रथ से लोगों को गुड़-चना बांटा जाएगा, जो शरीर में खून में कमी को पूरा करने में तेजी से सहायक होता है और स्वास्थ्य के लिए अच्छा भी होता है। एनीमिया के लक्षण नजर आने पर इसी रथ से सीबीसी जांच भी मुफ्त की जाएगी। साथ ही इसे दूर करने के लिए गुड़-चना के साथ सत्तू, दलिया-गुड़ खाने की सलाह भी दी जाएगी और होम्योपैथी इलाज भी दिया जाएगा। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि कल इस जागरूकता रथ को लेकर चर्चा की गई। कोशिश की जाएगी कि मंहगे इला की बजाय लोग घरों में मौजूद खाद्य सामग्री से ही शरीर में इसकी कमी को दूर कर सकने वाले इलाज बताए जाए। रथ में चिकित्सक मौजूद रहेंगे, जो कि शहरवासियों को जागरूक करेंगे। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि एनीमिया जागरूकता रथ के समापन पर 4 मार्च को अप्लास्टिक एनीमिया जागरूकता पर नेशनल सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा।

2047 तक एनीमिया मुक्त भारत करने की बात

पिछले दिनों डॉ. द्विवेदी ने राष्ट्रपति और वित्त मंत्री से मुलाकात कर निवेदन किया था कि देश में एनीमिया और सिकलसेल जैसी बीमारियों के इलाज के लिए विशेष प्रयास कर व्यवस्था की जाए, क्योंकि ये ऐसी बीमारी है, जो एक चिकित्सा पद्धति से ठीक नहीं हो सकती है। इस साल के बजट में एनीमिया और सिकलसेल के लिए बजट प्रावधान किया गया है और 2047 तक भारत को एनीमिया मुक्त करने की बात भी कही गई है, जिसके लिए प्रयास तेज किए जाएंगे।