Thursday, 7 May 2015

स्थानानुसार एलर्जी के लक्षण


नाक की  एलर्जी - नाक  में  खुजली होना, छीकें आना, नाक  बहना, नाक  बंद होना  या  बार  बार जुकाम होना आदि
आँख की एलर्जी - आखों में लालिमा, पानी आना, जलन होना, खुजली आदि
श्वसन संस्थान की एलर्जी - इसमें खांसी, साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती  है
त्वचा की एलर्जी - त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा मुफीद है त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना, दाने निकलना, एक्जिमा, पित्ती  उछलना आदि होता है
खान पान से एलर्जी - बहुत से लोगों को खाने पीने  की चीजों जैसे दूध, अंडे, मछली, चॉकलेट आदि से एलर्जी होती है
सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी - कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्थिति में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए
अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी - कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं जैसे पेनिसिलिन का  इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मौत हो जाती है इसके अलावा दर्द की गोलियां, सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं
 मधु मक्खी ततैया आदि का काटना - इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की  परेशानी होती है जबकि कुछ लोगों को  इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है

एलर्जी  से  बचाव

एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए
  • य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन किन चीजों से एलर्जी है इसके लिए आप ध्यान से अपने खान पान और रहन सहन को वाच करें
  • घर के आस पास गंदगी ना होने दें
  • घर में अधिक से  अधिक  खुली और ताजा हवा आने का मार्ग  प्रशस्त करें
  • जिन खाद्य  पदार्थों  से एलर्जी है उन्हें न खाएं
  • एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं
  • बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे, आँखों पर धूप का अच्छी क्वालिटी का चश्मा  लगायें
  • गद्दे, रजाई,तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय समय पर गरम पानी से धोते रहे।

Wednesday, 6 May 2015

कहीं जीना दूभर न कर दे एलर्जी


एलर्जी एक ऐसी बीमारी है, जिसका कारण आमतौर पर समझ में नहीं आता। लेकिन कुछ ऐसे लक्षण तो हैं ही, जो ये बता देते हैं कि आप एलर्जी से पीडि़त हैं। इसके बाद एक ब्लड टेस्ट आपकी मुश्किलें आसान कर सकता है। आइए जानें, क्या है एलर्जी, कैसे पाएं राहत।
रश्मि शर्मा आजकल ऑफिस में बड़े आराम से काम करती हैं और समय पर घर भी चली जाती हैं। लेकिन 10-15 दिन पहले तक ऑफिस में आते ही न केवल वह, बल्कि उनके साथी भी उनसे परेशान होने लगे थे। कभी छींक तो कभी नाक पर रुमाल रखना और फिर बार-बार टॉयलेट जाना। उनकी एक सीनियर ने उन्हें सलाह दी कि तुम्हें एलर्जी हो गई है, डॉक्टर से मिल लो। रश्मि को लगा कि भला इसमें डॉक्टर क्या करेगा, जुकाम लगता है, खुद ही ठीक हो जाएगा। लेकिन आखिरकार उसे अपनी सीनियर की बात माननी पड़ी थी और डॉक्टर के पास जाना पड़ा था। डॉक्टर ने एक ब्लड टेस्ट के बाद कुछ दवाएं दीं, जिसके एक सप्ताह सेवन के बाद ही रश्मि की तबीयत तेजी से ठीक होने लगी।
प्रशांक को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि उन्हें क्या हुआ। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी और अक्सर दम फूलने लगता था। उन्होंने तो एक बार डॉक्टर को भी अपनी समस्या दिखा ली थी, लेकिन कोई खास लाभ नहीं हो रहा था। एक दिन उनके घर एक अतिथि आए, जिन्हें उनकी समस्या का कारण उनके घर में धमा-चौकड़ी मचा रहे दो पालतू कुत्ते लगे। प्रशांक अपने अतिथि की बात मानने को तैयार नहीं थे, क्योंकि वे लगभग तीन महीने ही पहले घर लाए उन कुत्तों से काफी प्यार करने लगे थे। फिर जब वे डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि उन्हें कुत्तों की वजह से ही एलर्जी है।
एलर्जी बीमारी ही ऐसी है, जो बीमारी लगती नहीं, लेकिन एक बार लग जाए तो परेशान कर देती है। हर व्यक्ति के शरीर की अपनी क्षमता होती है और उसी के अनुरूप वह बाहरी चीजों के साथ तालमेल बिठा पाता है। लेकिन कुछ तत्व ऐसे होते हैं, जिसके साथ शरीर तालमेल नहीं बिठा पाता। ऐसे तत्वों को एलर्जेट कहते हैं, जो एलर्जी का कारण बनते हैं। अगर आपको खुशबू पसंद नहीं है तो फूल से भी एलर्जी हो सकती है। धूल-मिट्टी पसंद नहीं है तो धूल-मिट्टी भी आपकी एलर्जी का कारण बन सकती है। यहां तक कि आपका पालतू जानवर भी आपको एलर्जी की तकलीफ देकर सता सकता है। लेकिन समय पर इसकी पहचान हो जाए तो आप इससे राहत पा सकते हैं।
अगर एलर्जी की पहचान समय पर हो जाए तो इसका इलाज संभव है। वे कहते हैं कि अब तो इसकी पहचान भी काफी आसान हो गई है। केवल एक ब्लड टेस्ट से यह पता लग जाता है कि एलर्जी से पीडि़त व्यक्ति को किस कारण से एलर्जी है। यह पता लग जाने के बाद इलाज काफी आसान हो जाता है। इस इलाज के तहत पीडि़त व्यक्ति को कुछ समय के लिए दवा खानी पड़ती है, जिससे उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है और रोगी की एलर्जी की समस्या भी ठीक हो जाती है। एलर्जी के रोगी को लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए।
एक शोध कहता है कि अपने देश में सबसे अधिक लोग डस्ट एलर्जी से परेशान हैं। यानी उन्हें डस्ट से एलर्जी होती है। आखिर रश्मि के साथ भी ऐसा ही तो था। एलर्जी से परेशान कुल लोगों में ऐसे लोग 80 प्रतिशत हैं। इसके बाद पालतू जानवरों से लोगों को काफी एलर्जी होती है। ऐसे लोग लगभग 15 प्रतिशत बताए जाते हैं। खाने-पीने की चीजों से बच्चों को एलर्जी की समस्या अधिक होती है। फूड एलर्जी से 6 से 8 प्रतिशत बच्चों परेशान रहते हैं। इसके अलावा हेयर डाई से भी एलर्जी होती है। मौसमी एलर्जी भी किसी व्यक्ति को खास मौसम में परेशान कर सकती है। इसलिए आपको एलर्जी हो तो उसके कारणों को पहचानने की कोशिश करें और समय रहते डॉक्टर से मिलें, ताकि आप इस बीमारी से राहत पा सकें।

इनसे हो सकती है एलर्जी


  • खाद्य पदार्थ - डेयरी उत्पाद, मूंगफली, मक्का, अंडा, मछली, सोयाबीन, नट्स आदि।
  • दवाएं - टेट्रा साइक्लीन, पेनिसिलिन, डिलानटिन, सल्फोनामाइड्स।
  • पर्यावरणीय कारण - पराग कण, फफूंद, धूल, आर्द्रता आदि।
  • पालतू जानवर - कुत्ते, बिल्ली आदि।
  • रसायन - कोबाल्ट, निकिल, क्रोमियम आदि।

क्या करें

  • जिन लोगों को धूल से एलर्जी है, वे कार में सफर के समय खिड़कियां बंद रखें और एयर कंडीशन का उपयोग करें। यह हवा को फिल्टर कर ठंडी और सूखी बनाता है।
  • बरसात में घर में और उसके आसपास गंदगी न पनपने दें।
  • ताजा और स्वच्छ भोजन करें।
  • घर में हवा आने दें।
  • अगर एयर कंडीशन का प्रयोग करें तो यह सुनिश्चित करें कि कमरे में आद्र्रता कम हो। फिल्टर थोड़े-थोड़े समय बाद बदलते रहें।
  • सफाई का विशेष ख्याल रखें। घर में कहीं भी धूल इक_ी न होने दें।
  • किताबों की आलमारियों की समय-समय पर सफाई करते रहें।
  • घर में लकड़ी का फर्नीचर हो तो उसकी सफाई का विशेष ख्याल रखें। उसमें दीमक न लगने दें।
  • घर में कूड़ा-कचरा न इक_ा करें।
  • घर के अंदर नमी न पनपने दें।

Tuesday, 28 April 2015

शर्म के कारण नहीं कह पाती महिलाएं...


स्त्री-पुरुष के बीच शारीरिक संबंधों को लेकर कई शोध हो चुके हैं। भारत में संभोग सिर्फ शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि काम कला का एक रूप भी है, लेकिन पुरुष प्रधान समाज में औरतों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। यही वजह है कि कई बार भारतीय महिलाएं अपने मन की बात जुबां पर नहीं ला पातीं। झिझक की वजह से अधिकांश औरतें सेक्स संबंधी बातें जल्दी किसी से शेयर नहीं कर पातीं।
महिलाएं सेक्स के लिए खुद शुरुआत नहीं करतीं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे शारीरिक संबंध नहीं चाहतीं। दरअसल, शर्मीली स्वभाव की महिलाएं दिल के अरमानों को जाहिर करने से कतराती हैं।

पूर्ण संतुष्टि का एहसास नहीं होना

महिलाओं में यह शिकायत आम है कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट किए बिना ही छोड़ देता है। दरअसल, इस समस्या की वजह महिला और पार्टनर, दोनों हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि पार्टनर को संतुष्ट करना ही उनकी जिम्मेदारी है। इस सोच की वजह से वह अपनी इच्छा नहीं बता पाती। दूसरी तरफ, पुरुष भी कई बार खुद संतुष्ट होने के बाद महिला साथी के बारे में नहीं सोचते है।

सेक्स की चाहत नहीं होना

डिप्रेशन, थकान और कुछ दूसरी वजहों से यह दिक्कत हो सकती है। कई बार बचपन की किसी बुरी याद की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है। इसके अलावा, कई महिलाओं को अपने पार्टनर के छूने का तरीका भी पसंद नहीं आता।

काम कला की जानकारी न होना

भारतीय महिलाएं सामान्यत: पोर्न के बारे में जानती ही नहीं हैं। वहीं, पुरुष अश्लील साहित्य पढ़कर या एडल्ट मूवी देखकर जब वैसा ही कुछ शारीरिक संबंधों के दौरान दोहराने की कोशिश करते हैं तो महिलाओं को बहुत शॉक लगता है। इसलिए, संबंधों के दौरान साधारण पोजिशन ही अपनाएं।

माहवारी के दौरान सेक्स

एक धारण बनी हुई है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए। अगर दोनों की इच्छा हो तो पीरियड्स के दौरान भी सेक्स कर सकते हैं, बल्कि कुछ लोग तो इसे ज्यादा सेफ मानते हैं, क्योंकि इस दौरान प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। साथ ही, कुछ लोग इसे हाइजिनिक नहीं मानते। ऐसे में कन्डोम का इस्तेमाल बेहतर है।

पारिवारिक माहौल

कई बार संयुक्त परिवार में रहने वाले कपल्स को एकांत आसानी से नहीं मिल पाता। किसी भी संबंध से जुड़े दोनों पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि सभी कार्य सुचारु रूप से चलें। संबंधों में भी मिठास बनी रहे। इस मामले में पुरुषों की अपेक्षाएं महिलाओं से कुछ ज्यादा ही होती हैं। इसे एक कामकाजी महिला के लिए निभा पाना मुश्किल होता है।

महिलाओं में सेक्स इच्छा कम

महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सेक्स की इच्छा होती है। बच्चे होने के बाद भी यह इच्छा कम नहीं होती। हालांकि, कई बार परफॉर्मेंस में कमी आ जाती है। इसकी शारीरिक और मानसिक दोनों वजहें होती हैं।

Sunday, 26 April 2015

सेक्स करें स्वस्थ रहें


सेक्स सिर्फ रति निष्पत्ति से मिलने वाले वाले आनंद का माध्यम मात्र नहीं हैं वरन सेक्स बेहतर स्वास्थ्य का कारण भी बन सकता है। चिकित्सकीय अनुसंधान से भी यह साबित हो चुका है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिये सेक्स महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। सेक्स से जहां शारीरिक स्फूर्ति बनी रहती है बल्कि कई बीमारियों को भी ठीक करने में सहायक है। इसके अलावा मानसिक तनाव दूर करने का भी बेहतर साधन है सेक्स । कुल मिलाकर सेक्स स्वास्थ्य के लिये काफी लाभदायक है।

तनाव से मुक्ति

आज की भागमभाग जिंदगी में स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सबसे बड़ी समस्या तनाव की है। अक्सर मानसिक तनाव के अतिरेक में कई बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं या फिर गलत कदम उठा लेते हैं। चिकित्सा शास्त्रियों का मानना है कि सेक्स क्रिया के दौरान एंड्रोफस नामक हार्मोन का स्त्राव होता है जो तनावमुक्ति में सहायक होता है। ठीक इसी तरह सेक्स क्रिया के दौरान फिनीलेथलमाइन नामक रसायन भी निकलता है। यह रसायन दिमाग को स्वस्थ होने का भाव भेजता है जिससे मानव में स्वस्थ होने की भावना उत्पन्न होती है, जिससे शरीर स्वस्थ व तनाव मुक्त महसूस करता है।

हड्डियां होती हैं मजबूत

नियमित रूप से सहवास करने पर शरीर की हड्डियां भी मजबूत होती है। सेक्सॉलाजिस्ट व चिकित्सकों की माने तो नियमित सेक्स से हार्मोन एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। इस बजह से महिलाओं की हड्डियों में आने वाली कमजोरी ऑस्टियोपॉरिसिस रोग में लगाम लगने लगती है, साथ ही इस रोग के होने की संभावना कम होने लगती है।

आयु बढ़ती है

नियमित सेक्स करने वाले लंबी आयु के मालिक होते है ऐसा कई परीक्षणों और सर्वे से सिद्ध हो चुका है। जो लोग नियमित तौर से संभोग करते हैं और जिनके मन में सेक्स को लेकर किसी तरह की शंका नहीं होती और सेक्स का अंदाज बेफ्रिक होता है वे उन लोगों की अपेक्षा ज्यादा लंबी आयु पाते हैं जो महीने में एक बार सेक्स करते हैं।

दर्द निवारक है सेक्स

सेक्स क्रिया एक बेहतरीन प्राकृतिक दर्द निवारक का भी काम करती है। चूंकि सेक्स क्रिया के दौरान एंड्रोफिंस हार्मोन निकलता है जो दर्द कम करने का कार्य करता है। इसी तरह सेक्स के दौरान बढऩे वाली एस्ट्रोजन की मात्रा भी प्री मेन्सुट्रुअल सिन्ड्रोम और मासिक स्त्राव के समय होने वाली परेशानियों से बचाती है। कई बार अनियमित मासिक चक्र भी नियमित हो जाता है। सेक्सोलॉजिस्ट बताते हैं कि सेक्स करने से आर्थराइटिस से पीडि़त महिलाओं को काफी आराम मिलता है। सेक्स से सिरदर्द और माइग्रेन तक दूर हो जाता है। वहीं कुछ चिकित्सक तो यहां तक कहते हैं कि सेक्स करने से सर्दी जुकाम तक नहीं होता हां यह अलग है सर्दी जुकाम में सेक्स न करने की भी सलाह दी जाती है।

निद्रारोग से बचाता है

सेक्स के दौरान ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिसका शरीर को काफी बेहतर अहसास होता है और चैन की नींद आती है। दूसरा सेक्स के बाद चिंता व तनाव न होने से भी नींद बेहतर ही आती है। दूसरी ओर सेक्स का प्रभाव इस मामले में पुरुषों में ज्यादा पड़ता है इसलिये ज्यादातर पुरुष सेक्स के बाद सोना पसंद करते हैं।

यौवन बरकरार

एक चिकित्सकीय सर्वेक्षण से सिद्ध हुआ है कि वे दंपति जो सप्ताह में तीन बार सहवास करते हैं वे उन लोगों की अपेक्षा ज्यादा युवा दिखते हैं जो कभी-कभी सेक्स करते हैं या नहीं करते हैं। इसके कारणों के बारे में बताया गया है कि सेक्स क्रिया में जो ऊर्जा लगती है उससे ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है तथा रक्त प्रवाह तीव्र होने के साथ रक्त का संचार त्वचा में भी तेजी से होने लगता है जिससे त्वचा में नई कोशिकाएं बनती हैं। इस वजह से त्वचा में एक नहीं कांति या चमक पैदा होती है। वहीं दूसरी और वे महिलाएं जिनको रजोनिवृत्ति हो चुकी है अगर सहवास क्रिया करती रहती हैं तो उन्हें गर्मी या पसीना आने की शिकायत नहीं रहती है। ऐसी महिलाओं पर आयु का ज्यादा प्रभाव भी नहीं पड़ता है।

शक्तिवर्धक है सेक्स

सेक्स उत्तेजना के दौरान ताजा खून सारे शरीर में तेजी से दौडऩे लगता है। यहां तक कि यह प्रवाह दिमाग में भी होता है। इससे उस क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ जाता है। इस वजह से धमनियां मजबूत होती हैं साथ ही मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढऩे से वह ज्यादा कठिन काम कर सकता है। रक्त संचार में वृद्धि विभिन्न शारीरिक दुर्बलताओं को दूर करती है।

हार्ट अटैक से बचाता है

चिकित्सकीय अनुसंधानों से स्पष्ट हो चुका है और हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताह में तीन बार कम से कम 20 मिनट तक सेक्स क्रिया करने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है, साथ ही हृदय गति में भी सुधार होता है। चिकित्सको की माने तो उनका कहना है कि सेक्स के दौरान हृदय के स्पंदन की गति सेक्स के दौरान तेज हो जाती है और पूरे शरीर में खून की गति बढ़ जाने से जहां तहां थोड़ा बहुत अवरोध होता है वह साफ हो जाता है।

व्यायाम भी है सेक्स

एक तरफ जहां व्यायाम करने से आपके सेक्स जीवन में सुधार आता है वहीं यह खुद एक प्रभावशाली व्यायाम है। सेक्स मांसपेशियों की टोनिंग करने में मदद करता है। तीस मिनट की सेक्स प्रक्रिया के दौरान एक आम व्यक्ति की करीब दो सौ कैलोरी खर्च होती हैं, यानी अगर आप प्रतिदिन इसे करते हैं तो हर दो हफ्ते बाद आपका आधा किलो वजन घट सकता है। अगर आप एक साल तक हफ्ते में तीन बार इसे करते हैं तो यह दो सौ किलोमीटर दौडऩे के बराबर होता है।

Friday, 24 April 2015

गर्मियों में कैसे रखें बालों को खुबसूरत


गर्मियों में बाल बेजान हो जाते हैं, रूसी और बाल झडऩे की परेशानी भी बढ़ जाती है। दरअसल गर्मी में तेज धूप से बहुत पसीना बनता है और त्वचा की नमी बढ़ जाती है। त्वचा के छिद्र अधिक खुल जाते हैं, जिनसे पसीना निकलता है, लेकिन इससे त्वचा की जड़ कमज़ोर पड़ जाती है।
चूंकि सिर की ऊपरी त्वचा पर नमी रहती है, इसलिए बालों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। नमी के कारण खुजली होती है। बार-बार खुजलाने से समस्या बिगड़ती जाती है और बाल गिरने लगते हैं।
बेशक बाल गिरने की समस्या गर्मियों में बढ़ती है, पर यह पूरे साल सताने वाली एक आम समस्या है। बालों की समस्या के कई कारण हैं। हालांकि मुख्यत: दो कारण देखे जाते हैं- आनुवांशिक और खान-पान की समस्या। बाल बढऩे में भी इन कारणों की खास अहमियत है। बाल गिरने के कुछ अन्य कारण भी हैं, जैसे खाने में अधिक मीठा लेना, हानिकारक रसायन युक्त शैम्पू और कंडीशनर का उपयोग, चिंता, तनाव आदि।
कंघी करते हुए दो-चार बाल हाथ आ जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हर दिन 45 से 60 बालों का गिरना स्वाभाविक है। इनकी जगह नए बाल उग आते हैं, लेकिन हर दिन औसत 60 से अधिक बाल गिरने लगे तो चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है।
सबसे पहले तो आप बालों को नियमित रूप से धोएं। गर्मियों के दिनों में तो बार-बार धोना चाहिए, क्योंकि विलंब करने से सिर की त्वचा तैलीय रह जाती है, बहुत अधिक बाल गिरने लगते हैं, रूसी की समस्या घेर लेती है और बाल रुखे हो जाते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण बात है शैम्पू का चयन, माइल्ड शैंपू का उपयोग करें। बेबी शैम्पू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
यूं तो बाल गिरना बुढ़ापे की निशानी है, पर आज युवाओं में भी यह आम समस्या है। कम उम्र में बाल गिरने से कभी-कभी निराशा घेर लेती है। कई लोग बाल गिरने के बाद खुद को यार-दोस्तों के बीच जाने के काबिल नहीं मानते हैं। इससे उनमें इतनी हीन भावना आ जाती है कि वे स्वाभिमान खो बैठते हैं और खुद को कम आंकने लगते हैं।

Wednesday, 22 April 2015

ड्राय स्किन की घर पर ही करें फेशियल


त्वचा को स्वस्थ रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। फेशियल और क्लीनअप त्वचा को तरोताजा रखने के सर्वश्रेष्ठ उपाय के रूप में सामने आए हैं। फेशियल त्वचा की सतह से रोमकूपों की गहराईयों तक में जाकर उसे साफ और स्वच्छ करता है साथ ही त्वचा का पोषण भी करता है। क्लीनअप से चेहरे की त्वचा की सफाई होती है, मृत त्वचा निकल जाती है और नमी लौट आती है।

कैसे करें घर पर चेहरे की सफाई

क्लीन्जिंग- इससे त्वचा की गहराईयों से धूल मिट्टी के अंश पूरी तरह निकल जाते हैं। इसे करने से पहले मेकअप पूरी तरह हटा दें. ठंडा दूध, क्रीम , या बेबी ऑइल के प्रयोग से सूखी त्वचा की क्लीन्जिंग की जा सकती है।
ब्लीचिंग- जब भी माईल्ड ब्लीचिंग की जाती है तो चेहरे की त्वचा पर मौजूद डेड सेल्स हट जाते हैं साथ ही चेहरे पर महीन बाल भी ब्लीच हो जाते हैं। याद रखें की सुखी त्वचा को ब्लीच करने से हालात और खराब हो सकते हैं।
एक्सफोलिएट- घर पर बने स्क्रब से हल्का एक्सफोलिएशन होता है जिससे धूल, मिट्टी, और मृत सेल्स त्वचा से हट जाते हैं। आप इन्हें आजमा सकती हैं-
स्टीमिंग- इसे घर पर ही कर सकते हैं लेकिन यह ध्यान रहे कि इसे अधिक समय तक और बार-बार नहीं करना है। स्टीमिंग से फायदा यह है कि चेहरे की त्वचा की रक्त नलिकाएं चौड़ी होकर फूल जाती हैं। इससे रक्तचाप अधिक तेजी से होने लगता है। इससे चेहरे का मैल, तेल, और रोमकूपों के अवरोध निकल जाते हैं। ब्लेक हैड्स को निकालना आसान हो जाता है। चूंकि चेहरे की त्वचा से मृत त्वचाकण निकल जाते हैं इसलिए इस पर लगाई गई कोई औषधी क्रीम भी अच्छा असर करती है।
मसाज- अपने चेहरे को 10 मिनट तक हल्के हाथ से मसाज दीजिए। स्ट्रोक्स लय में होना चाहिए। इससे चेहरे की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं और रक्त की आपूर्ति अच्छी होने लगती है। इससे एजिंग प्रोसेस धीमी पड़ जाती है और झुर्रियां कम हो जाती हैं।
चेहरे के मसाज के बाद ये फेसमॉस्क इस्तेमाल करें। यूं तो बाजार में हर तरह के फेसमॉस्क मिलते हैं लेकिन घर पर आसानी से बनाया जा सकता है।

घर पर बनाएं ये क्लीन्जर

  • खोपरे का दूध न सिर्फ त्वचा का सूखापन कम करेगा बल्कि डॉर्क स्पाट्स और झाइयों से भी मुकाबला करेगा। 
  • दूध की क्रीम या वेजिटेबल कुकिंग ऑइल से चेहरे की सफाई कर सकते है।
  • एक चौथाई खीरा ककड़ी, 2 चम्मच दही, और 2 चम्मच पका हुआ ओटमील मिलाकर सफाई की जा सकती है।

घरेलू मॉइस्चराईजर कैसे बनाएं

  • दूध की मलाई एक बहुत अच्छा मॉइस्चराईजर है। इसमें नींबू के रस की चंद बूंदें मिला लें। इससे त्वचा में नमी लौट आएगी। 
  • दही चेहरे की त्वचा की देखभाल करने वाला एक प्रमुख रसायन है। यह त्वचा की नमी लौटाता है, इसकी एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लामेटरी प्रॉपर्टीज त्वचा को चिकनी बनाने में प्रमुख भूमिका निभाती है। 
  • शहद एक लाजवाब स्किन मॉइस्चराईजर है। इसे लगाकर थोड़ी देर चेहरे पर रहने दें, बाद में धो लें। त्वचा निखर उठेगी।
  • गवांरपाठे का पल्प चेहरे पर 20 मिनट तक लगाकर रखें बाद में धो लें। 
  • नींबू की चंद बूंदों में ग्लीसरीन मिलाकर लगा लें। यह भी एक अच्छा एक्सफोलिएटिव है। 
  • पका हुआ ओटमील, शहद और केले का पल्प मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह सूखी त्वचा के लिए वरदान है।

घरेलू स्क्रब्स से कैसे करें चेहरे की सफाई

  • थोड़ा गेहूं का आटा लें अंदाज से और इसमें दूध की मलाई तथा गुलाबजल मिला लें। इसे घोंटकर पैक की तरह कर लें. इसे चेहरे की त्वचा पर रगड़कर लगाएं। इससे चेहरे की त्वचा से मृत त्वचा बाहर निकल जाएगी।
  •  मूली को किस लें और चेहरे पर थोड़ी देर के लिए फैला कर रख लें। यह एक माइल्ड ब्लीचिंग एजेंट है। इससे त्वचा निखर उठेगी।

Tuesday, 21 April 2015

तरबूज का शरबत


तरबूज का शरबत बहुत ही स्वादिष्ट होता है। यह हमें चिपचिपी गर्मी, धूप, लू, उमस, आदि में ठंडक देने का काम करता है। उत्तर भारत में तो लोग इसके बारे में कम ही जानते हैं, लेकिन मुंबई में यह हर जगह मिलता है और लोग इसे बहुत पसंद भी करते हैं। तो आइये आज हम भी मुंबई का मशहूर तरबूज का शरबत बनाते हैं।

सामग्री

तरबूज - 2- 2.1/2 कि.ग्रा.
नींबू - 1
बर्फ के क्यूब्स - 1 कप

विधि

तरबूज का शरबत बनाने के लिये सबसे पहले तरबूज को धोकर काटिये और फिर इसके मोटे हरे भाग को काट कर अलग कर दीजिये। अब लाल वाले भाग को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर मिक्सी में पीस लीजिये। थोड़ी देर बाद जब तरबूज का गूदा और रस बिल्कुल घुल जाए तब इस जूस को छलनी में छान लीजिये।
अब इस जूस में नींबू निचोड़ कर अच्छे से मिलाइये और फिर इसे गिलासों में डाल दीजिये। ठंडा करने के लिये इसमें अपने अनुसार बर्फ डाल दीजिये और चाहें तो गिलास में शरबत के ऊपर 1-2 पोदीने की पत्तियाँ भी सजा दीजिये (यदि आप को इसमें मीठा कम लग रहा हो तो आप अपने स्वादानुसार इसमें चीनी मिला कर इसे और अधिक मीठा भी कर सकते हैं, लेकिन चीनी मिलाने के बाद यह जूस अपना वास्तविक स्वाद खो देता है)।
ठंडा ठंडा तरबूज का शरबत तैयार है। अब इसे जितना मर्जी पीजिये और घर में सभी को पिलाइये।
यकीन मानिये इस शरबत को पीने के बाद आप बाजार में बिकने वाले बनाबटी रंग और स्वाद वाली रंगीन पानी की बोतलों को छुएंगे भी नहीं।