Wednesday, 31 December 2014

एक वर्ष में मनते हैं कई नववर्ष


हमारा देश अनेकता में एकता की परंपरा को सहेज रहा है। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन, पारसी के साथ अनेक धर्म और समुदायों के लोग अपनी-अपनी संस्कृति को निभाते हुए नया साल मनाते हैं। इन सबके अपने अलग-अलग त्योहार और रीति-रिवाज हैं। जिस प्रकार सभी समुदायों के कुछ विशेष पर्व हैं जिन्हें सभी एक साथ मिलकर मनाते हैं। उसी प्रकार प्रत्येक समुदाय के नए वर्ष भी अलग-अलग हैं और सभी एक-दूसरे के पर्वों का सम्मान करते हैं। अन्य पर्वों की तरह हर समुदाय के नववर्ष भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में।

चैत्र प्रतिपदा 

हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ हिन्दी पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है। इसी दिन से वासंतेय नवरात्र का भी प्रारंभ होता है। हिन्दू नववर्ष का पंचांग विक्रम संवत से माना जाता है। एक साल में बारह महीने और सात दिन का सप्ताह विक्रम संवत से ही प्रारंभ हुआ है।

हिजरी सन 

मुस्लिम समुदाय में नया वर्ष मोहर्रम की पहली तारीख से मनाया जाता है। मुस्लिम पंचांग की गणना चांद के अनुसार होती है।

ओणम 

मलयाली समाज में नया वर्ष ओणम से मनाया जाता है। इस दिन प्रतिवर्ष विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। ओणम मलयाली माह छिंगम यानी अगस्त और सितंबर के मध्य मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन राजा बली अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आते हैं। राजा बली के स्वागत के लिए घरों में फूलों की रंगोली सजाई जाती है और स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।

पोंगल : सूर्य देव को अर्पित होता है प्रसाद 

तमिल नववर्ष पोंगल से प्रारंभ होता है। पोंगल से ही तमिल माह की पहली तारीख मानी गई है। पोंगल प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी को मनाया जाने वाला बड़ा त्योहार है। चार दिनों का यह त्योहार भी नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है।

महाराष्ट्रीयन समाज का नववर्ष 

महाराष्ट्रीयन परिवारों में चैत्र माह की प्रतिपदा को ही नववर्ष की शुरुआत होना माना जाता है। इस दिन बांस में नई साड़ी पहनाकर उस पर तांबे या पीतल के लोटे को रखकर गुड़ी बनाई जाती है और उसकी पूजा की जाती है। गुड़ी को घरों के बाहर लगाया जाता है और सुख संपन्नता की कामना की जाती है।

नववर्ष बैसाखी 

गीत-संगीत की अनोखी परंपरा और खुशदिल लोगों से सजी है पंजाबियों की संस्कृति। पंजाबी समुदाय अपना नववर्ष बैसाखी में मनाते हैं। यह त्योहार नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है। बैसाखी के अवसर पर नए कपड़े पहने जाने के साथ ही भांगड़ा और गिद्दा करके खुशियां मनाई जाती हैं।

नवरोज का प्रारंभ 

पारसियों द्वारा मनाए जाने वाले नववर्ष नवरोज का प्रारंभ तीन हजार साल पहले हुआ। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन फारस के राजा जमशेद ने सिंहासन ग्रहण किया था। उसी दिन से इसे नवरोज कहा जाने लगा। राजा जमशेद ने ही पारसी कैलेंडर की स्थापना की थी। नवरोज को जमशेदी नवरोज भी कहा जाता है।
दीपावली है नया साल : जैन समुदाय का नया साल दीपावली के दिन से माना जाता है। इसे वीर निर्वाण संवत कहा जाता है।

पड़वा से नया साल 

सभी समुदायों की तरह गुजराती बंधुओं का नववर्ष भी दीपावली के दूसरे दिन पडऩे वाली पड़वा के दिन खुशी के साथ मनाया जाता है। गुजराती पंचांग भी विक्रम संवत पर आधारित है। इस दिन तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं और एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दी जाती हैं।

बंगाली समुदाय का नया वर्ष 

अपनी विशेष संस्कृति से जाने-पहचाने जाने वाले बंग समुदाय का नया वर्ष बैसाख की पहली तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल की कटाई और नया बही-खाता प्रारंभ करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। एक ओर व्यापारी लोग जहां नया बही-खाता बंगाली में कहें तो हाल-खाता करते हैं तो दूसरी तरफ अन्य लोग नई फसल के आने की खुशियां मनाते हैं। इस दिन कई सांस्कृतिक आयोजन होते हैं और मिठाइयां बांटी जाती हैं।

सभी कहते हैं नया वर्ष मुबारक हो 

सभी समुदायों के साथ ही एक ऐसा नया साल है जिसे सभी वर्गों, समुदायों द्वारा मान लिया गया है। वह है अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाने वाला नया साल। जिसकी शुरुआत जनवरी में होती है। जनवरी में नए वर्ष 201५ का प्रारंभ हो गया है। आजकल इसी पंचांग को सर्वमान्य रूप से नए वर्ष की शुरुआत मान लिया गया है। सारे सरकारी कार्य और लेखा-जोखा इसी के अनुसार संचालित किए जाते हैं।

Thursday, 25 December 2014

किस तरह मिलेगी जीवन में 'शांतिÓ


ज्यादातर लोग भागदौड़ से भरा जीवन जीते हैं मगर उनमें से कुछ के चेहरे पर शांति झलकती है तो कुछ पर नहीं। कुछ के चेहरों पर तो हमेशा ही अशांति तैरती रहती है। आखिर ऐसा क्यूं?
जब हम मानसिक या शारीरिक रूप से थक जाते हैं तो शरीर और मन निढाल हो जाता है। कई दफे शरीर थका होता है, लेकिन मन नहीं, ठीक इसके विपरीत भी होता है। ऐसे में चेहरे पर शांति कहां से झलकेगी?
क्या वह अशांत था? रोग या शोक में भी प्रकृति हमें शांत कर देती है। फिर प्रकृति मुकम्मल तौर पर भी 'शांतÓ कर देती है। जब कोई मर जाता है तो हम कहते हैं कि वह 'शांतÓ हो गया। आखिर ऐसा क्यूं? इसका मतलब कि वह अशांत था? अरे भई शांत लोग भी तो मरते हैं।

क्या होती है अशांति 

बेचैनी या अशांति का कारण व्यक्ति का 'मनÓ होता है। मन का कारण विचार है, विचार का कारण जो हम देख-सुन रहे हैं वह है, अर्थात अशांति बाहर से भीतर मन में प्रवेश करती है। मन की व्यापकता को 'चित्तÓ कहते हैं।

चित्त की गति 

पागल के चित्त की गति तेज होती है। जो लोग ज्यादा बेचैन हैं उनके चित्त की गति भी तेज होती है, उनमें वाचलता और चालाकी के अलावा कुछ नहीं होता। इन चित्त वृत्तियों के निरोध को ही योग कहते हैं। नशा आदि करने के बाद भी चित्त की गति तेज हो जाती है। किसी भी प्रकार की चिंता से भी गति बढ़ जाती है। गति का बढऩा शारीरिक और मानसिक क्षरण का कारण बनता है।

क्या है चित्त 

पांचों इंद्रियों से जो भी ग्रहण किया गया है, उसका मन और मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। उस प्रभाव से ही 'चित्तÓ निर्मित होता है जो निरंतर परिवर्तित होने वाला होता है। जैसे कि एक स्थान पर कई कोण से प्रकाश डाला जाए और तब उस स्थान पर जो चीज पैदा होगी, उसे हम 'चित्तÓ मान लें।
कैसे हों शांत - जब हम चुप होते हैं तो उसे हम अपनी उदासी न समझें। चुप्पी स्वत: ही घटित होती है, उसका आनंद लें। आंखें मूंदकर गहरी सांस लें। सुबह और शाम पांच मिनट का ध्यान करें। हर तरह की बहस व्यर्थ होती है यह जान लें। क्रोध करने की आदत बन जाती है, इसे समझें। इसी तरह अशांत और बेचैन रहने की भी आदत होती है।

शारीरिक शांति 

स्वयं के शरीर का सम्मान करें। उस पर मन की बुरी आदतें न थोपें। उसकी सेहत का ध्यान रखें। पवित्रता बनाए रखने से शरीर शांत रहता है। यम, नियम, आसन और प्राणायाम के हलके से प्रयास से ही शरीर को शांति मिलती है।

मन की शांति 

मन को शांत रखने के लिए प्राणायम और ध्यान का अभ्यास करें। मानसिक द्वंद्व मन को अशांत करते हैं। मन की अशांति के कारण शरीर की सेहत खराब होना भी है। अंतत: अंग संचालन, शवासन, भ्रामरी प्राणायाम और विपश्यना ध्यान करें।

Tuesday, 23 December 2014

वजन कम करना है तो कीजिए सेक्स...


सेक्स एक प्रकार का व्यायाम है। इसके लिए खास किस्म के सूट, शू या महंगी एक्सरसाइज सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है बस बेडरूम का दरवाजा बंद करने की। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार का हेल्दी सेक्स किसी थका देने वाले एक्सरसाइज या स्विमिंग के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होता है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा दूर करने के लिए सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है।

 390 बार चुंबन लेने से आधा किलो वजन कम

सेक्स से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे चर्बी घटती है। एक बार के सेक्स में 500 से 1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिए गए चुंबन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से 1/2 किलो वजन घट सकता है।

क्योंकि स्वास्थ्य ही सेक्स का आधार है

विशेषज्ञों का कहना है कि वजन कम करने के लिए खाना छोडऩा तो दूर की बात है, एक सीमा से अधिक खाना कम कर देना भी स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य ही स्वस्थ सेक्स का आधार होता है। परफेक्ट फिगर की चाह  को हम एक बीमारी कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जो दुबले हैं वे वजन बढ़ाने के लिए फैट्स आदि ज्यादा मात्रा में खाने लगते हैं और जो मोटे हैं वे वजन घटाने के लिए खाना-पीना छोड़कर डाइट व ड्रग्स लेने लगते हैं। दोनों ही बातें सेहत की दृष्टि से गलत है।
मधुमेह, अस्थमा व हृदयरोग इन जानलेवा रोगों के मूल में हैं अधिक स्टार्चयुक्त व फैट्स वाला भोजन व शारीरिक श्रम का अभाव। आज हम अपने पाचनतंत्र की डाइजेस्टिव कैपेसिटी से कई गुना अधिक खा रहे हैं। यह अतिरिक्त भोजन हमारे शरीर में तरह-तरह के विकार पैदा करता है। आधुनिक जीवनशैली के तहत वक्त-बेवक्त खाना मधुमेह, अस्थमा व हृदयरोग जैसी बीमारियों को जन्म देता है।
सुबह व शाम की सैर के साथ खुली हवा में व्यायाम से पाचनतंत्र के सभी विकार दूर होते हैं जिससे संपूर्ण शरीर हलका-फुलका, स्वस्थ व स्फूर्तिदायक बन जाता है। सुबह जल्दी उठकर खुली हवा में सांस लेने से फेफड़ों में स्वस्थ वायु का प्रवेश होता है। फेफड़े स्वस्थ रहने से न केवल हृदय को बल मिलता है बल्कि खांसी, दमा, श्वास रोग व एलर्जी आदि से भी छुटकारा मिलता है।
बदलती जीवनशैली में काम के प्रेशर के चलते स्त्री-पुरुष अपनी रूटीन लाइफ में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि सेक्स जैसी महत्वपूर्ण क्रिया से दूर होते जाते हैं। उनकी सेक्सुअल इच्छा कम होती जाती है। पति-पत्नी में आकर्षण का अभाव अनेक पारिवारिक और सेक्स संबंधी समस्याओं को जन्म देता है।

Monday, 22 December 2014

बालों को बनाता है काला करी पत्ता और आंवले का तेल



असमय ही बाल सफेद होना आजकल आम बात है, जानना जरूरी यह है कि बालों का सफेद होने का कारण क्या है। क्यों मात्र 20 या 30 की उम्र में ही बाल सफेद होना शुरु हो जाते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब लाइफस्टाइल या फिर भोजन में सही प्रकार का पोषण न मिलना। अगर आप अपने सफेद बालों को काला करने के लिए हेयर डाई का प्रयोग करते हैं, तो उसे तुरंत ही बंद कर दें और प्राकृतिक नुस्खे आजमाएं। बालों में अगर साधारण तेल लगाते हैं तो उसकी जगह पर करी पत्ते और आंवले के तेल का प्रयोग करें। करी पत्ते वाला तेल बालों को काला करने में मददगार साबित होता है। इन तेलों का नियमित प्रयोग करने से आपके बालों में जान आ जाएगी और वह काले बनने लगेंगे।

करी पत्ता तेल

करी पत्ते का एक गुच्छा ले कर उसे साफ पानी से धो लें और सूरज की धूप में तब तक सुखा लें, जब तक कि यह सूख कर कड़ा न हो जाए। फिर इसे पाउडर के रूप में पीस लें अब 200 एम एल नारियल के तेल में या फिर जैतून के तेल में लगभग 4 से 5 चम्मच कड़ी पत्ती मिक्स कर के उबाल लें। दो मिनट के बाद आंच बंद कर के तेल को ठंडा होने के लिए रख दें। तेल को छान कर किसी एयर टाइट शीशी में भर कर रख लें। सोने से पहले रोज रात को यह तेल लगाएं और इससे अपने सिर की अच्छे से मसाज करें। अगर इस तेल को हल्की आंच पर गरम कर के लगाया जाए तो जल्दी असर दिखेगा। अगली सुबह सिर को नैचुरल शैंपू से धो लें। इसके आंवला ट्रीटमेंट को आप रोज या फिर हर दूसरे दिन आजमां सकते हैं। इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा।

आंवला तेल बनाने की विधि

ताजा आंवला ले कर उसे छोटे टुकड़ों में काट लें और उसका बारीक पेस्ट बना लें। पेस्ट बनाते वक्त उसमें रोज वॉटर का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस पेस्ट को अपने हेयर ऑयल के साथ मिक्स कर के किसी कपड़े या फिर ढक्कन से बिल्कुल कस के बांध दीजिए। अब आंवला को तेल के साथ बिल्कुल मिक्स हो जाने दीजिए, ऐसा होने में लगभग एक हफ्ता लगेगा। एक हफ्ते के बाद तेल को छान कर किसी साफ शीशी में भर लीजिए।
हफ्ते में दो बार जरूर लगाएं असमय सफेद होते हुए बालों को रोकने का आयुर्वेदिक उपचार प्रयोग करने का सही तरीका है कि आप इस तेल को हफ्ते में एक या दो बार जरूर लगाएं। अपनी उंगलियों को सिर पर हल्के-हल्के घुमाते हुए सिर पर तेल फैलाएं। सिर धोने से 40 मिनट पहले यह तेल लगाएं। इस विधि से यह तेल सफेद हो रहे बालों को काला करने में मदद करेगा। आंवला एक प्राकृतिक डाई के रूप में पुराने जमाने की महिलाओं द्वारा प्रयोग किया जाता था।

भोजन में शामिल करें करी पत्ता

यदि आप अपने भोजन में नियमित रूप से करी पत्ता शामिल करेंगे और जितना हो सके तनाव से दूर रहेंगे, तब इससे आपके बालों को काला होने में मदद मिलेगी।
आंवला अन्य अंगों के लिए भी फायदेमंद: आंवला बालों को ही नहीं आपके अन्य अंगों को भी काफी फायदा देता है। यदि आप आंवले का मुरब्बा या आंवले का अचार या अन्य कोई भी विधि से आंवला गृहण यानी खाते हैं तो आपके बालों के साथ-साथ आपकी आंखों और अन्य अंगों को भी काफी फायदा मिलेगा, इसे किसी भी रूप में जरूर खाएं।
असमय ही बाल सफेद होना आजकल आम बात है, जानना जरूरी यह है कि बालों का सफेद होने का कारण क्या है। क्यों मात्र 20 या 30 की उम्र में ही बाल सफेद होना शुरु हो जाते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब लाइफस्टाइल या फिर भोजन में सही प्रकार का पोषण न मिलना। अगर आप अपने सफेद बालों को काला करने के लिए हेयर डाई का प्रयोग करते हैं, तो उसे तुरंत ही बंद कर दें और प्राकृतिक नुस्खे आजमाएं। बालों में अगर साधारण तेल लगाते हैं तो उसकी जगह पर करी पत्ते और आंवले के तेल का प्रयोग करें। करी पत्ते वाला तेल बालों को काला करने में मददगार साबित होता है। इन तेलों का नियमित प्रयोग करने से आपके बालों में जान आ जाएगी और वह काले बनने लगेंगे।

Sunday, 21 December 2014

केले के पत्ते पर भोजन फायदे अनेक


केला हमारे पेट के लिए अच्छा माना जाता है, क्योकि यह पेट की आंतों को साफ करता है आंतों में मल या गंदगी चिपक नहीं पाती। केला खाने से पेट हमेशा साफ रहता है।
केले के साथ-साथ इसका पत्ता भी काफी लाभप्रद सिद्ध हुआ है।
केले का पेड़ भगवान विष्णु को अति प्रिय है इसी लिए हिंदु केले के पेड़ की पूजा भी करते हैं।
केले का पेड़ बड़ा और लम्बा होता है जो कि एक पवित्र पेड़ माना जाता है और इसके बीच में लम्बी धारी भी होती है। इसके अलावा भारत में लोग केले के पत्तों पर भोजन भी करते हैं।
यह एक ऐसा पेड़ है जो कि शादी, विवाह, मंदिर और अन्य उत्सवों पर भी इस्तेमाल किया जाता है। केले के पेड़ को घर के सामने और बगीचे में उगाना अच्छा माना जाता है। केले के पत्ते सही रूप में किचन में इस्तेमाल योग्य होता है। आप केले के पत्ते को नीचे रखकर इसमें प्लेट की भांति खाना परोस सकते हैं और बाद में इसे कंटेनर में डालने के लिए फोल्ड भी कर सकते हैं। यह नॉन स्टिकी लाइनर स्टीमर ट्रे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और बायो-डीग्रैडएबल भी है। केले के पेड़ का हर हिस्सा किसी न किसी रूप में उपयोगी है।
इसके उगते हुए तने के बीच का भाग खाने योग्य है। इसके फूल उबली सब्जी की भांति खाए जाते हैं। दक्षिण भारत में केले की पत्तियों और तने को पशुओं के चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे प्राप्त फाइबर का इस्तेमाल चटाई, दरियां, मोटे पेपर और पेपर पल्प बनाने के काम आता है।

प्लास्टिक के बर्तन सेहत के लिए हानिकारक


प्लास्टिक निर्मित माइक्रोवेव बर्तनों के इस्तेमाल से मोटापा, प्रजनन क्षमता में गिरावट और कैंसर जैसे खतरनाक बीमारियों को बल मिल रहा है। एक रिपोर्ट के हवाले से यह खुलासा किया। रिसर्च यह स्पष्ट करती है कि प्लास्टिक के बहुत सारे बर्तनों को गर्म करने से उनमें से ऐसे रसायन निकलते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।
ये रसायन कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने का काम करते हैं जैसे कि मोटापा, पेट में संक्रमण, आईवीएफ, कैंसर, त्वचा विकार आदि. ऐसे में जहां तक हो सके हमें माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल से बचना चाहिए क्योंकि अधिकतर लोगों को प्लास्टिक के ग्रेड के बारे में जानकारी नहीं होती है जो कि सेहत के लिए सुरक्षित हो। यहां तक कि जिन प्लास्किट के बर्तनों पर यह लिखा होता है कि वे माइक्रोवेव में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित हैं उनकी सुरक्षा की जांच भी सिर्फ बर्तनों के लिए होती है उसमें गर्म किए जाने वाले खाने की नहीं। यानी प्लास्टिक के बर्तन पर सिर्फ माइक्रोवेव सेफ लिखा होने का यह मतलब नहीं है कि वह फूड सेफ भी हैं। ऐसे में लोग पैराडाइज माइक्रोवेबल फ्रीज बाउल, सेरामिक कांच या स्टेनलेस स्टील के बर्तनों के इस्तेमाल करना सेहतमंत होगा।

Saturday, 20 December 2014

बहुत फायदेमंद है नाखून काटना


लगभग हर कोई इस बात से वाकिफ हैं कि बढ़े हुए नाखूनों में गंदगी को जमा होती है जिनसे संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। हम अपने शरीर का तो ख्याल रखते हैं, लेकिन पैरों और हाथों के नाखून की बात आती है तो शरीर के अनिवार्य लेकिन इस छोटे हिस्से की हमेशा उपेक्षा करते हैं। अपने नाखूनों को काटने या ट्रिम करने की बात आने पर इसे बोरिंग या कम महत्वपूर्ण मानकर इसे भूल जाते हैं या फिर नजरअंदाज कर देते हैं। इस लेख में विस्तार से जानिये क्यों नाखूनों को काटना जरूरी है और इन्हें नजरअंदाज करने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं।

नाखून काटने के स्वास्थ्य लाभ

देखा गया है कि लड़के अपने नाखूनों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते। लेकिन नाखून के अंदर जमा गंदे बैक्टीरिया भयानक बीमारियां पैदा करते हैं। किसी भी प्रकार की नाखूनों की समस्याओं जैसे- अंतर्वर्धित नाखून, स्पून शेप नाखून और पिन्सर नाखून से बचने के लिए नाखूनों को ट्रिम करना बेहतर है। यहां नाखून काटने के बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानकारी दी गई है।

चोटों से बचाव

अगर आप अपने नाखून नहीं काटते हैं, तो आप वास्तव में खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार नाखून नहीं काटने से दरवाजे या किसी और चीज पर लगने से चोट का कारण बन सकता है। यह निश्चित रूप से चोट के निशान पैदा कर सकता है। साथ ही यह बहुत दर्दनाक और कई महीनों तक खून के काले निशान छोड़ सकता है। इसलिए क्षति से बचने के लिए नियमित रूप से नाखूनों को काटना बेहतर होता है। 

बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव

संक्रमण से बचने के लिए अपने नाखूनों की देखभाल करना महत्वपूर्ण होता है। अगर आप लगातार जूते या मोजे पहनते हैं तो आपके पैरों के नाखून बैक्टीरिया गठन को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि पसीने के कारण आपके पैर ठीक प्रकार से सांस लेने में सक्षम नहीं होते हैं। इसलिए संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए अपने नाखून को हमेशा काट कर रखें। साथ ही पैरों के नाखून के संक्रमण से बचने के लिए गंदे मोजे पहनने से बचें।

स्वच्छता

स्वस्थ और सुंदर नाखून अच्छे स्वास्थ्य और परिपक्वता की छाप देते है। लेकिन अगर आप अपने नाखूनों को नियमित रूप से नहीं काटते तो उनमें फंगल इंफेक्शन होने की संभावना रहती है। नियमित रूप से नाखून काटते रहने के स्वास्थ्य लाभों में फंगल इंफेक्शन से छुटकारा पाना भी है। खुजली और लाल दाने वाले इस संक्रमण को एथलीट फुट के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह सफेद धब्बे के रूप में पैर की उंगलियों की बीच की त्वचा पर होता है। इस समस्या में नाखून प्रभावित होकर पीले रंग के दिखने लगते हैं।  इसलिए इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए नाखून काटने बेहतर है।

अंतर्वर्धित नाखून

यह एक गंभीर चिकित्सा हालत है जो नाखून ना काटने के कारण किसी को भी हो सकती है। यह दर्दनाक भी हो सकता है। इस समस्या को अंतर्वर्धित नाखून भी कहा जाता है। इस तरह के नाखून अधिकतर पैरों के अंगूठे में पाए जाते हैं। इस समस्या में दर्द और सूजन कुछ समय बाद संक्रमण में बदल सकता हैं। अगर आपका दर्द असहनीय है तो डॉक्टर से परामर्श करें। इसलिए नाखून चाहे हाथों के हो या फिर पैरों के, स्वास्थ्य लाभों के लिए उन्हें नियमित रूप से काटना अच्छा रहता है।